मैट्रिक परीक्षा में लगातार दूसरी बार फेल होने के बाद एक छात्रा को इतना गहरा सदमा लगा कि उसने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी सानिया के पिता मजदूरी कर घर और पढ़ाई का खर्चा उठा रहे थे।
Bihar News: बिहार के कैमूर जिले के नुआंव ब्लॉक से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां कुचिला थाना क्षेत्र के मुखरांव गांव की एक छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। छात्रा ने यह कदम बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) द्वारा मैट्रिक परीक्षा के नतीजे घोषित किए जाने के बाद उठाया। वह लगातार दूसरी बार इस परीक्षा में फेल हो गई थी।
मजदूरी कर बेटी को पढ़ा रहे थे पिता
जानकारी के मुताबिक, मुखरांव गांव के रहने वाले अशरफ अंसारी की बेटी सानिया खातून राम नारायण प्लस टू स्कूल बहुआरा की छात्रा थी और अपनी पढ़ाई के प्रति बेहद समर्पित थी। अशरफ अंसारी खुद मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी सबसे बड़ी बेटी सानिया को इस उम्मीद के साथ पढ़ाया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह परिवार का सहारा बनेगी। सानिया ने भी अपने पिता के संघर्षों को देख रही थी और सफल होना चाहती थी। लेकिन, उसकी दुखद मौत ने उसके पिता के सपनों को चकनाचूर कर दिया है।
दूसरी बार फेल होने का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई
सानिया ने पिछले साल भी मैट्रिक की परीक्षा दी थी लेकिन उस समय भी वह सफल नहीं हो पाई थी। हार न मानते हुए उसने इस साल फिर से परीक्षा दी। रविवार को जब नतीजे घोषित होने का समय आया, तो वह आरा में अपनी मौसी के घर पर थी। दोपहर में जैसे ही नतीजे घोषित हुए और सानिया को पता चला कि वह एक बार फिर फेल हो गई है, तो वह इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाई। इसके बाद जब घर के बाकी सभी लोग बाहर गए हुए थे और वह घर में अकेली रह गई, तो उसने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।
तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी सानिया
सानिया अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। घर की सबसे बड़ी बेटी होने के नाते जिम्मेदारियों का बोझ और पिता की उम्मीदें शायद उस पर उम्मीद से कहीं ज्यादा भारी पड़ गईं। सानिया के पार्थिव शरीर को जब उनके पैतृक गांव लाया गया, तो हर आंख नम थी। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर हाल बेहाल है.
इस दुखद घटना की खबर मिलते ही RJD के पूर्व उम्मीदवार अजीत कुमार सिंह शोकाकुल परिवार के घर पहुंचे और शोक संतप्त परिजनों को सांत्वना दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि सानिया एक मिलनसार और मेहनती लड़की थी, लेकिन लगातार दूसरी बार की विफलता ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया।
परीक्षा का परिणाम जीवन का अंतिम फैसला नहीं होता। असफलता केवल एक पड़ाव है, अंत नहीं। यदि आप या आपके आसपास कोई भी छात्र मानसिक तनाव महसूस कर रहा है, तो कृपया उनसे बात करें या विशेषज्ञ की सलाह लें। आत्महत्या रोकथाम केंद्र के हेल्पलाइन नंबर 18008914416/ 14416 पर कॉल करके भी मदद ली जा सकती है। जीवन अनमोल है।


