Death Penalty: इजरायल की संसद (नेसेट) ने सोमवार को एक विवादास्पद कानून पारित किया है, जिसके तहत आतंकवादी हमलों के दोषी पाए जाने वाले वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों को अब मृत्युदंड (फांसी की सजा) दी जाएगी। ‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ की रिपोर्ट के अनुसार, 62-47 के मतों से पारित इस कानून को इजरायल के धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर का समर्थन प्राप्त था।
CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विधेयक में कहा गया है कि वेस्ट बैंक के वे लोग, जो ‘इजरायल राज्य के अस्तित्व को नकारने के इरादे से’ किसी इजरायली की हत्या करते हैं, उन्हें मृत्युदंड का सामना करना पड़ेगा। न्यायाधीश केवल अस्पष्ट रूप से परिभाषित ‘विशेष परिस्थितियों’ में ही आजीवन कारावास की सजा दे सकते हैं, जबकि सजा सुनाए जाने के 90 दिनों के भीतर फांसी देना अनिवार्य होगा।
बेन ग्विर ने क्या कहा?
इजरायल की संसद में कानून पारित होने पर बेन ग्विर ने कहा कि यह पीड़ितों के लिए न्याय और दुश्मनों के लिए भय पैदा करने का दिन है। अब आतंकवादियों के लिए जेल से छूटने का कोई रास्ता नहीं बचेगा। इस कानून के तहत सजा सुनाने के लिए न्यायाधीशों के केवल साधारण बहुमत की आवश्यकता होगी और अपील का कोई अधिकार नहीं दिया गया है। यह कानून भविष्य के मामलों पर लागू होगा और इसे पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं किया जाएगा, जिसमें 7 अक्टूबर 2023 के हमास के हमलों के अपराधी शामिल हैं; उनके लिए अलग से विधेयक लाया जाएगा।
कई देशों ने की कानून की निंदा
इजरायली संसद द्वारा पारित मृत्युदंड कानून की फिलिस्तीनी अधिकारियों और कई देशों ने निंदा की है। फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने इस कानून को एक अपराध और कब्जे वाली नीतियों में एक खतरनाक विस्तार करार दिया है।
मंत्रालय का तर्क है कि इजरायली कानून फिलिस्तीनियों पर लागू नहीं होते। उन्होंने आगे कहा कि यह कानून इजरायली औपनिवेशिक व्यवस्था के असली चेहरे को उजागर करता है, जो कानूनी आड़ में बिना किसी उचित न्यायिक प्रक्रिया के की जाने वाली हत्याओं को वैध बनाने की कोशिश कर रहा है।
काउंसिल ऑफ यूरोप के महासचिव एलेन बर्सेट ने कहा कि नेसेट में मृत्युदंड को फिर से लागू करने के पक्ष में हुआ मतदान एक बड़ा सभ्यतागत झटका है। यह ऐसा निर्णय है जो इसे लेने वालों को यूरोप परिषद द्वारा समर्थित मूल्यों की प्रणाली से दूर कर देता है।
वहीं, इटली, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों ने भी इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे मानवीय गरिमा के विरुद्ध और सभ्यता को पीछे ले जाने वाला कदम बताया है।


