बिहारीगंज नगर पंचायत में पार्षदों ने उठाए सवाल:बजट, भुगतान और सैरात बंदोबस्ती को लेकर हुई तीखी बहस

बिहारीगंज नगर पंचायत में पार्षदों ने उठाए सवाल:बजट, भुगतान और सैरात बंदोबस्ती को लेकर हुई तीखी बहस

बिहारीगंज नगर पंचायत की सोमवार को हुई बैठक में पार्षदों ने बजट, सैरात बंदोबस्ती और विकास कार्यों के भुगतान जैसे कई मुद्दों पर सवाल उठाए, जिससे हंगामा हो गया। मुख्य पार्षद नीतू देवी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 73.75 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित था। बैठक की शुरुआत में ही वार्ड पार्षदों ने पूर्व में कराए गए कार्यों का आय-व्यय विवरण प्रस्तुत करने की मांग की। पार्षदों ने आरोप लगाया कि अब तक हुए कार्यों का स्पष्ट लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आधा दर्जन से अधिक पार्षदों ने अपने वार्डों में कराए गए विकास कार्यों का भुगतान लंबित होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि भुगतान न होने के कारण सामग्री आपूर्तिकर्ता लगातार दबाव बना रहे हैं। पार्षदों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए तत्काल भुगतान की मांग की। सैरात बंदोबस्ती को लेकर भी बैठक में तीखी बहस हुई। वार्ड पार्षद मो. आजाद ने कहा कि नियमानुसार मार्च के अंत तक बंदोबस्ती प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कुछ पार्षदों ने सुझाव दिया कि नई बंदोबस्ती होने तक पुराने संवेदक की अवधि बढ़ाई जाए या कोई अस्थायी व्यवस्था की जाए। इस पर कार्यपालक पदाधिकारी मनीला राज ने स्पष्ट किया कि सैरात को नियमों के विरुद्ध ‘फ्री’ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आश्वासन दिया कि बंदोबस्ती प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। बैठक के बाद विवाद और गहरा गया। कुछ पार्षदों ने दावा किया कि बैठक विधिवत नहीं हुई, जबकि मुख्य पार्षद और कार्यपालक पदाधिकारी ने सभी प्रस्तावों के पारित होने की बात कही। इस दौरान, बैठक पंजी फाड़ने और जातिसूचक टिप्पणी के आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए हैं। कार्यपालक पदाधिकारी मनीला राज ने बताया कि बैठक सुचारु रूप से संपन्न हुई थी, लेकिन बाद में नाजिर ने सूचित किया कि एक वार्ड पार्षद पति ने बैठक पंजी का पन्ना फाड़ दिया। वहीं, वार्ड पार्षद पति मिथिलेश पासवान ने आरोप लगाया कि ईओ ने उनकी पत्नी के लिए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उन्हें बैठक से बाहर कर दिया। मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। बिहारीगंज नगर पंचायत की सोमवार को हुई बैठक में पार्षदों ने बजट, सैरात बंदोबस्ती और विकास कार्यों के भुगतान जैसे कई मुद्दों पर सवाल उठाए, जिससे हंगामा हो गया। मुख्य पार्षद नीतू देवी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 73.75 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित था। बैठक की शुरुआत में ही वार्ड पार्षदों ने पूर्व में कराए गए कार्यों का आय-व्यय विवरण प्रस्तुत करने की मांग की। पार्षदों ने आरोप लगाया कि अब तक हुए कार्यों का स्पष्ट लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आधा दर्जन से अधिक पार्षदों ने अपने वार्डों में कराए गए विकास कार्यों का भुगतान लंबित होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि भुगतान न होने के कारण सामग्री आपूर्तिकर्ता लगातार दबाव बना रहे हैं। पार्षदों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए तत्काल भुगतान की मांग की। सैरात बंदोबस्ती को लेकर भी बैठक में तीखी बहस हुई। वार्ड पार्षद मो. आजाद ने कहा कि नियमानुसार मार्च के अंत तक बंदोबस्ती प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कुछ पार्षदों ने सुझाव दिया कि नई बंदोबस्ती होने तक पुराने संवेदक की अवधि बढ़ाई जाए या कोई अस्थायी व्यवस्था की जाए। इस पर कार्यपालक पदाधिकारी मनीला राज ने स्पष्ट किया कि सैरात को नियमों के विरुद्ध ‘फ्री’ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आश्वासन दिया कि बंदोबस्ती प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। बैठक के बाद विवाद और गहरा गया। कुछ पार्षदों ने दावा किया कि बैठक विधिवत नहीं हुई, जबकि मुख्य पार्षद और कार्यपालक पदाधिकारी ने सभी प्रस्तावों के पारित होने की बात कही। इस दौरान, बैठक पंजी फाड़ने और जातिसूचक टिप्पणी के आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए हैं। कार्यपालक पदाधिकारी मनीला राज ने बताया कि बैठक सुचारु रूप से संपन्न हुई थी, लेकिन बाद में नाजिर ने सूचित किया कि एक वार्ड पार्षद पति ने बैठक पंजी का पन्ना फाड़ दिया। वहीं, वार्ड पार्षद पति मिथिलेश पासवान ने आरोप लगाया कि ईओ ने उनकी पत्नी के लिए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उन्हें बैठक से बाहर कर दिया। मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।  

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