जब से बांग्लादेश में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार बनी है, तब से देश में एक के बाद एक पूर्व सैन्य अफसर गिरफ्तार हो रहे हैं। हर गिरफ्तारी के साथ 2007-08 के उस दौर की परतें खुलती जा रही हैं जब देश में फौजी हुकूमत का बोलबाला था।
ताजा मामले में ढाका पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच यानी DB ने बर्खास्त लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद अफजल नासर को मीरपुर से रविवार की देर रात गिरफ्तार किया। उनकी उम्र 61 साल है।
पूछताछ में निकला नाम, फिर हुई गिरफ्तारी
DB के जॉइंट कमिश्नर मोहम्मद नसीरुल इस्लाम ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है। सूत्रों के मुताबिक अफजल नासर का नाम उस वक्त सामने आया जब दो और बड़े पूर्व अफसरों से पूछताछ हो रही थी।
पहले लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मसूद उद्दीन चौधरी को गिरफ्तार किया गया था जिन्हें 2007-08 के सियासी संकट का एक अहम किरदार माना जाता है।
इसके बाद DGFI यानी सैन्य खुफिया संगठन के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) शेख मामून खालेद को भी DB ने उठाया। इन्हीं दोनों की पूछताछ में अफजल नासर का नाम आया।
कौन हैं अफजल नासर?
अफजल नासर नोआखाली के सेनबाग उपजिला के मोजिरखिल इलाके के रहने वाले हैं। उन्होंने 4 जुलाई 1984 को सेना में कदम रखा था। मार्च 2006 से मार्च 2008 तक वो DGFI में तैनात रहे, यानी ठीक उसी दौर में जब बांग्लादेश में फौजी सरकार का राज था।
मसूद उद्दीन चौधरी कौन थे और क्यों अहम हैं?
इस पूरी कहानी की जड़ में मसूद उद्दीन चौधरी का नाम है। 2007-08 में जब फौजी हुकूमत सत्ता में आई तब वो बांग्लादेश सेना की सबसे महत्वपूर्ण 9वीं इन्फैंट्री डिविजन के GOC यानी कमांडिंग ऑफिसर थे।
उस दौर में भ्रष्टाचार विरोध के नाम पर एक कमेटी बनाई गई थी जो बड़े-बड़े कारोबारियों को उठाकर ले जाती थी। मसूद उद्दीन का इस कमेटी में बड़ा रोल था और उनके हाथ में काफी ताकत थी।
बाद में उन्हें ऑस्ट्रेलिया में बांग्लादेश का हाई कमिश्नर बनाया गया। वापस आने के बाद वो पूर्व फौजी तानाशाह जनरल एरशाद की जातीय पार्टी में शामिल हो गए और सांसद भी बने।
मार्च में DB ने रात के ऑपरेशन में उन्हें उनके ढाका आवास से गिरफ्तार किया। पालतान थाने में दर्ज मामले में कोर्ट ने पहले पांच दिन, फिर छह दिन की रिमांड दी।
शेख मामून खालेद भी हिरासत में
DGFI के पूर व महानिदेशक शेख मामून खालेद को DB ने बुधवार को गिरफ्तार किया। मीरपुर थाने में दर्ज हत्या के एक मामले में कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की रिमांड पर भेजा। वो अभी भी DB की हिरासत में हैं और पूछताछ जारी है।
एक के बाद एक गिरफ्तारी, क्या है पूरा मकसद?
बांग्लादेश में यह सिलसिला बता रहा है कि नई सरकार उस पूरे दौर का हिसाब लेना चाहती है जब फौजी सरकार के नाम पर देश में कई ज्यादतियां हुईं। हर गिरफ्तारी से नए नाम सामने आ रहे हैं और यह कड़ी आगे भी बढ़ती दिख रही है।


