Masterstroke: मिडिल ईस्ट की जंग में अरब का बड़ा दांव: होर्मुज नहीं, अब यह रास्ता बनेगा दुनिया की लाइफलाइन

Masterstroke: मिडिल ईस्ट की जंग में अरब का बड़ा दांव: होर्मुज नहीं, अब यह रास्ता बनेगा दुनिया की लाइफलाइन

Global Energy Lifeline : मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग (War) ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार (Energy Market) में हलचल मचा दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर ईरान की धमकियों के बीच सऊदी अरब और यूएई ने अपनी रणनीति (Strategy) बदल दी है। अब अरब देशों ने तेल सप्लाई के लिए बाब अल-मंडेब (Bab-el-Mandeb) और नई पाइपलाइनों (Pipelines) को अपना मुख्य हथियार बनाया है।

होर्मुज की नाकेबंदी को मात देने का मास्टर प्लान (Plan B for Hormuz)

दुनिया का लगभग 20% से 30% तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। ईरान ने कई बार इसे बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इसे देखते हुए सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (East-West Pipeline) यानी ‘पेट्रोलाइन’ को पूरी क्षमता पर चालू कर दिया है। यह पाइपलाइन सऊदी के पूर्वी हिस्सों से तेल लेकर सीधे लाल सागर के यानबू पोर्ट (Yanbu Port) तक पहुंचाती है।

पेट्रोलाइन की ताकत और रणनीतिक बढ़त (Petroline Capacity)

सऊदी अरब की यह पाइपलाइन अब रोजाना लगभग 70 लाख बैरल तेल पंप कर रही है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि तेल टैंकरों को अब फारस की खाड़ी के खतरनाक इलाकों और होर्मुज की ईरानी निगरानी से नहीं गुजरना पड़ेगा। यह सीधे रेगिस्तान को पार कर पश्चिमी तट तक पहुंचता है, जिससे सप्लाई चेन पर ईरान का दबदबा खत्म हो जाता है।

बाब अल-मंडेब: नई उम्मीद और हूती चुनौती (Bab-el-Mandeb Risk)

अरब का यह प्लान लाल सागर के रास्ते दुनिया को तेल भेजने का है। हालांकि, यहाँ एक पेच है। यानबू पोर्ट से निकलने वाले जहाजों को दक्षिण में बाब अल-मंडेब (Bab-el-Mandeb) जलडमरूमध्य से गुजरना होता है। यहाँ यमन के हूती विद्रोही सक्रिय हैं, जिन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है। इस खतरे को देखते हुए सऊदी और उसके सहयोगी देश अब इस समुद्री गलियारे में भारी नौसैनिक सुरक्षा तैनात कर रहे हैं।

UAE का बैकअप: हबशान-फूजैरा पाइपलाइन (UAE Hubshan Pipeline)

सऊदी के साथ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी अपनी तैयारी पुख्ता की है। यूएई की हबशान-फूजैरा पाइपलाइन (Habshan-Fujairah Pipeline) अबू धाबी के तेल को सीधे ओमान की खाड़ी तक पहुँचाती है। यह रोजाना 18 लाख बैरल तेल सप्लाई कर सकती है। इस रूट के इस्तेमाल से जहाज होर्मुज के संकरे और तनावग्रस्त रास्ते को पूरी तरह बायपास कर सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में पहुँच जाते हैं।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर (Impact on India)

भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए खाड़ी देशों का बड़ा ग्राहक है। अगर अरब देशों का यह वैकल्पिक नेटवर्क और पाइपलाइन सिस्टम सफल रहता है, तो युद्ध के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल तेल की सप्लाई सुनिश्चित करेगा, बल्कि ईरान के ‘एनर्जी वेपन’ की शक्ति को भी कम कर देगा।

तेल की कीमतों में हल्की स्थिरता देखी गई

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खबर के बाद तेल की कीमतों में हल्की स्थिरता देखी गई है, क्योंकि निवेशकों को अब सप्लाई रुकने का डर कम सता रहा है। क्या हूती विद्रोही बाब अल-मंडेब में सऊदी के इस वैकल्पिक रूट को निशाना बनाएंगे? अमेरिका और मित्र देशों की नौसेना की अगली चाल पर सबकी नजर है। ओमान और मिस्र जैसे देश भी इस नए रूट से होने वाले व्यापार के कारण अपनी अर्थव्यवस्था में उछाल की उम्मीद कर रहे हैं।

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