Jaipur Pink Elephant Viral Photoshoot: राजस्थान की राजधानी और ‘पिंक सिटी’ के नाम से मशहूर जयपुर अपने किलों और हाथियों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। लेकिन हाल ही में एक रूसी फोटोग्राफर द्वारा हाथी को चमकीले गुलाबी रंग में रंगकर किए गए फोटोशूट ने विवाद खड़ा कर दिया है।
जहां एक ओर इसे कला का नमूना बताया जा रहा है। वहीं, वन्यजीव प्रेमी और आम नागरिक इसे बेजुबान जानवर के साथ दुर्व्यवहार मान रहे हैं। रूस की ट्रैवलिंग आर्ट फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने जयपुर में करीब 6 हफ्ते बिताए। जूलिया के अनुसार, जयपुर के हेरिटेज और यहां के गुलाबी रंग ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने एक मॉडल और गुलाबी हाथी के साथ फोटोशूट करने का निर्णय लिया।

जूलिया ने बताया कि इस शूट के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी। वह सुबह तड़के ऑटो से निकलकर ऐसी जगह तलाशती थीं, जहां हेरिटेज लुक मिले और सरकारी पाबंदियां कम हों। अंततः उन्होंने एक गणेश मंदिर के पास का स्थान चुना।
भारत के रूढ़िवादी समाज में इस तरह के बोल्ड शूट के लिए मॉडल ढूंढना कठिन था। दर्जनों इनकार के बाद उन्होंने मॉडल यशस्वी के साथ यह प्रोजेक्ट पूरा किया। जूलिया का दावा है कि हाथी पर इस्तेमाल किया गया रंग पूरी तरह ऑर्गेनिक (प्राकृतिक) था, जो त्योहारों में इस्तेमाल होता है, इसलिए यह जानवर के लिए सुरक्षित था।
हाथी मालिक और समिति का पक्ष
विवाद बढ़ने पर हाथी के मालिक शादिक खान ने सफाई देते हुए कहा कि ‘चंचल’ नाम की जिस हथिनी का इस्तेमाल किया गया, उसकी उम्र 65 साल थी और वह सवारी के काम में नहीं आती थी। उन्होंने बताया, यह केवल 10 मिनट का शूट था। हमने कच्चा गुलाल लगाया था जिसे तुरंत पानी से धो दिया गया। फरवरी में चंचल का निधन हो चुका है, हम अपने हाथियों को कभी पीड़ा नहीं पहुंचाते।

हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष बल्लू खान ने भी इसकी पुष्टि की कि रंग पूरी बॉडी पर नहीं बल्कि केवल आधे हिस्से पर लगाया गया था और शूट के तुरंत बाद उसे हटा दिया गया था।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
जैसे ही जूलिया ने इन तस्वीरों को इंस्टाग्राम पर साझा किया, यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा। तारीफ करने वालों से कहीं ज्यादा संख्या आलोचना करने वालों की थी। कई यूजर्स ने लिखा कि हाथी की त्वचा बहुत संवेदनशील होती है और उस पर भारी मात्रा में रंग पोतना गलत है।
एक यूजर ने कमेंट किया, आज के समय में जब AI (Artificial Intelligence) इतनी उन्नत है, तो इस तरह के लुक के लिए असली जानवर को परेशान करने की क्या जरूरत थी? एक अन्य यूजर ने लिखा, खुशी है कि आपको जयपुर पसंद आया, लेकिन अगली बार आना तो हाथी को मत रंगना।

वन्यजीव प्रेमियों की चिंता
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही रंग ऑर्गेनिक हो, लेकिन जानवर को लंबे समय तक रंग में रखना और फ्लैश लाइट्स या भारी तामझाम के बीच खड़ा करना उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डालता है। यह घटना दर्शाती है कि पर्यटन और कला के नाम पर जानवरों के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर अब लोग पहले से कहीं अधिक जागरूक और संवेदनशील हो गए हैं।
एक सोशल मीडिया यूजर्स ने लिखा, जयपुर में फोटोशूट के नाम पर एक जिंदा हाथी को सिर से पांव तक चमकीले गुलाबी रंग में रंगना सरासर नीचता। जर्मन फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने कला के नाम पर एक बेजुबान जानवर का जो तमाशा बनाया है, वह उसकी संवेदनहीन मानसिकता का प्रमाण है।
आज के डिजिटल युग में जब AI जैसी तकनीकें मौजूद हैं, तब एक मूक प्राणी को इस तरह पेंट की बाल्टी में डुबो देना कला नहीं बल्कि उसका सीधा शोषण और अपमान है। जूलिया बुरुलेवा, आपको अपनी इस घिनौनी हरकत पर शर्म आनी चाहिए और तुरंत सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि बेजुबानों के साथ ऐसा बर्ताव कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


