बांस खेती को बूस्ट:संभाग के 25 किसान प्रशिक्षण लेने देहरादून गए, प्रोडक्ट बनाने के बारे में जानेंगे

बांस खेती को बूस्ट:संभाग के 25 किसान प्रशिक्षण लेने देहरादून गए, प्रोडक्ट बनाने के बारे में जानेंगे

प्रदेश में सबसे ज्यादा जंगल वाले उदयपुर संभाग में बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग किसानों को प्रशिक्षण दे रहा है। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत किसानों को राज्य के बाहर भेजकर नई तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है। उदयपुर, सलूंबर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों के 25 किसानों को देहरादून स्थित भारतीय वन अनुसंधान संस्थान में एक सप्ताह के प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। उद्यान विभाग के संयुक्त कार्यालय की ओर से किसानों का यह दल रवाना किया गया। देहरादून में 10 से 12 वैरायटी के बांस पर रिसर्च और खेती की जा रही है। यहां बांस से विभिन्न उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं, जिनका प्रशिक्षण भी किसानों को दिया जाएगा। उत्तर-पूर्वी भारत, एमपी और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में बांस से तैयार उत्पाद देश-विदेश भेजे जा रहे हैं। प्रशिक्षण के बाद इन किसानों के माध्यम से राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत स्थानीय स्तर पर पौधारोपण कराया जाएगा। किसान नई तकनीकों को अपनाकर बांस की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देंगे। संभाग में 3.97 लाख हेक्टे. में बांस प्राकृतिक रूप से पाया जाता है
उदयपुर संभाग राजस्थान का प्रमुख बांस उत्पादक क्षेत्र है, जहां लगभग 3.97 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र में बांस प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। उदयपुर के कोटड़ा, झाड़ोल समेत डूंगरपुर और बांसवाड़ा में फैला है। वन विभाग देवला, ओंगणा और कोटड़ा क्षेत्रों में बांस कटाई कराता है, जिससे हर साल तीन करोड़ से अधिक का राजस्व मिलता है, जबकि कुल आय 3.50 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इससे कथौड़ी समुदाय सहित हजारों आदिवासी परिवारों को रोजगार मिलता है, हालांकि बांस आधारित उद्योगों की कमी अब भी चुनौती बनी हुई है।

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