कोरिया में ‘जनभागीदारी से जल संरक्षण’ का अभियान राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में इसकी सराहना करते हुए इसे प्रेरक मॉडल बताया। जिले में ‘कैच द रेन’ और ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के जरिए जिला में ‘आवा पानी झोंकी’ अब जन आंदोलन बन चुका है। इससे भूजल स्तर में बड़ा सुधार हुआ। केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार जिले में जलस्तर 5.41 मीटर तक बढ़ा है। इस वर्ष भी यह अभियान जारी है। अब तक 20612 से ज्यादा जल संरक्षण कार्य पूरे हो चुके हैं या काम जारी पर हैं। इनमें 17229 सामुदायिक और 3383 मनरेगा आधारित काम शामिल हैं। इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत जनभागीदारी रही। महिलाओं को ‘नीर नायिका’ और युवाओं को ‘जल दूत’ बनाकर जिम्मेदारी दी गई। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने भी कहा कि कोरिया मॉडल अन्य राज्यों में लागू किए जाने योग्य है।
क्या है जल संरक्षण का कोरिया मॉडल : कोरिया में हर साल औसतन 1370 मिमी बारिश के बावजूद पानी का तेजी से बहाव हो जाने के कारण भूजल का स्तर काफी नीचे रहता था। इसमें सुधार के लिए जिला प्रशासन ने कैच द रेन और मोर गांव मोर पानी अभियान के जरिए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ लागू किया। इसमें किसानों ने अपनी जमीन के 5 प्रतिशत जमीन हिस्से पर छोटे तालाब, डबरी और सोख्ता गड्ढे बनवाए। इसमें जमा बारिश के पानी से उत्साहवर्द्धक नतीजे सामने आए। प्रदेश को गर्व है
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में कोरिया जिले के किसानों के जल संरक्षण के प्रयासों की सराहना छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। जनभागीदारी से जल संरक्षण का यह अभिनव प्रयास मिसाल बन चुका है। मैं प्रदेश के लोगों से प्रधानमंत्री सूर्यघर बिजली योजना अपनाने का आग्रह करता हूं।’ -विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री


