ओडिशा में नक्सल विरोधी अभियानों के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। नक्सल विरोधी अभियानों की सफलता के बारे में ओडिशा के पुलिस महानिदेशक वाई.बी. खुराानिया ने अहम जानकारी दी है।
ओडिशा में चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों (Anti Naxal Operations) में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। ओडिशा पुलिस के महानिदेशक योगेश बहादुर खुरानिया ने नक्सल विरोधी अभियानों के बारे में अहम जानकारी साझा की है। DGP ने रविवार को बताया कि ओडिशा में 27 उग्रवादियों को मुठभेढ़ में मारा गया है, जबकि 77 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। सुरक्षा बलों को पिछले एक साल में यह बड़ी सफलता मिली है।
सुरक्षा बलों का नक्सलवाद पर बड़ा प्रहार
DGP योगेश बहादुर खुरानिया, फुलबनी में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान नक्सल विरोधी अभियानों में शामिल सुरक्षा बलों के जवानों को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में DGP ने बताया कि 77 माओवादियों ने ओडिशा पुलिस के सामने सरेंडर किया है, जबकि 23 सक्रिय माओवादी कैडरों ने छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण किया। इस दौरान सुरक्षा बलों ने अलग-अलग अभियानों में 27 माओवादियों को ढेर किया है। उन्होंने कहा कि 25 जनवरी 2025 को नुआपाड़ा-गरियाबंद सीमा के पास हुए एक संयुक्त ऑपरेशन में 17 माओवादी मारे गए थे, जिनमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के केंद्रीय समिति का एक सदस्य भी शामिल था।
देश में माओवादियों के प्रभाव को खत्म करने पर जोर
फुलबनी में आयोजित एक कार्यक्रम में DGP ने बताया कि करीब 1 साल पहले देश से माओवादियों के प्रभाव को 31 मार्च 2026 तक खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया था। इस लक्ष्य को तय करने के बाद माओवादियों के खिलाफ अभियान तेज किए गए। DGP के अनुसार, साल 2025 और 2026 में अब तक माओवाद के खिलाफ बड़ी सफलताएं मिली हैं। इसमें सीमा सुरक्षा बल और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल जैसे सशस्त्र पुलिस बलों के साथ-साथ ओडिशा पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप, स्पेशल इंटेलिजेंस विंग और डिस्ट्रिक्ट वॉलंटरी फोर्स की अहम भूमिका रही है।
DGP का माओवादियों को संदेश- सरेंडर करो या अंजाम भुगतो
ओडिशा पुलिस के DGP योगेश बहादुर खुरानिया ने कहा कि ताजा आकलन के अनुसार, ओडिशा में सक्रिय माओवादियों की संख्या अब सिंगल डिजिट में रह गई है। हालांकि, कंधमाल, रायगड़ा और कालाहांडी के जंगलों में अभी भी कुछ माओवादी कैडर सक्रिय हैं। जंगलों में छिपे इन माओवादियों की तलाश में सुरक्षा बल लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रहे हैं। DGP ने शेष माओवादी से अपील की कि वे हथियार डालकर राज्य सरकार की नई पुनर्वास और सरेंडर नीति का लाभ उठाएं। अन्यथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।


