नेपाल में नए PM बालेन शाह का एक और बड़ा एक्शन, पूर्व मंत्री भी अरेस्ट, आंदोलन के दौरान घर पर मिला था नोटों का अंबार

नेपाल में नए PM बालेन शाह का एक और बड़ा एक्शन, पूर्व मंत्री भी अरेस्ट, आंदोलन के दौरान घर पर मिला था नोटों का अंबार

नेपाल की राजनीति में इन दिनों जो हलचल मची है, वो किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं लग रही। रविवार को एक और बड़ा नाम पुलिस की गिरफ्त में आ गया।

नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खड़का को काठमांडू के महाराजगंज इलाके में उनके अपार्टमेंट से सुबह-सुबह गिरफ्तार किया गया। मामला है मनी लॉन्ड्रिंग का।

क्या है गिरफ्तारी की वजह?

बात करें इस गिरफ्तारी की वजह की, तो कहानी पिछले साल सितंबर तक जाती है, जब नेपाल में जेन जी आंदोलन अपने चरम पर था। उस वक्त प्रदर्शनकारियों ने खड़का के घर में आग लगा दी थी। और तब जो नजारा सामने आया, वो हैरान करने वाला था।

नोटों की गड्डियां हवा में उड़ती दिख रही थीं, लोग उन्हें हाथों में लेकर उछाल रहे थे। वो तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हुए। बाद में फॉरेंसिक जांच में इनकी पुष्टि भी हो गई।

बड़े बिजनेसमैन हैं खड़का

नेपाल पुलिस की केंद्रीय जांच ब्यूरो के प्रवक्ता और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिव कुमार श्रेष्ठ ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग विभाग ने पहले ही पुलिस मुख्यालय को खड़का के खिलाफ जांच का अनुरोध भेजा था। उसी के बाद यह कदम उठाया गया।

खड़का कोई साधारण नेता नहीं हैं। होटल से लेकर पनबिजली परियोजनाओं तक उनका कारोबार फैला है। लेकिन ऊर्जा मंत्री रहते हुए उन्होंने जो विवाद खड़े किए, वो भी कम चर्चित नहीं रहे।

बड़े अधिकारी को छोड़ना पड़ा था पद

नेपाल विद्युत प्राधिकरण के तत्कालीन प्रबंध निदेशक कुल मान घीसिंग से उनकी खुलकर ठनी। इसका नतीजा यह हुआ कि घीसिंग को पद छोड़ना पड़ा।

इसके अलावा पनबिजली परियोजनाओं के लाइसेंस और ठेके देने में भी उन पर गड़बड़ी के आरोप लगे, काठमांडू में नेपाल स्काउट्स की जमीन हड़पने का मामला भी उनके नाम से जुड़ा रहा है।

पूर्व पीएम के बाद पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी

यह गिरफ्तारी इसलिए भी अहम है क्योंकि एक दिन पहले ही नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया गया था।

उन पर आरोप है कि सितंबर के जेन जी आंदोलन को कुचलने में उनकी भूमिका रही। खड़का उसी ओली सरकार के मंत्रिमंडल में थे। यानी तीन दिन में तीन मंत्री सलाखों के पीछे चले गए हैं।

भयानक था आंदोलन

वो आंदोलन कितना भयानक था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 8 और 9 सितंबर को 77 लोगों की जान गई और 84 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा की संपत्ति बर्बाद हो गई।

जांच आयोग ने ओली, लेखक और पूर्व पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग के खिलाफ आपराधिक लापरवाही के तहत मुकदमा चलाने की सिफारिश की है, जिसमें 10 साल तक की सजा हो सकती है।

फिलहाल ओली अस्पताल में भर्ती हैं, इसलिए पुलिस उन्हें वर्चुअल तरीके से कोर्ट के सामने पेश करने की तैयारी में है। नेपाल की अदालतें इन दिनों खासी व्यस्त हैं।

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