दिल्ली पुलिस को मिलेगा स्मार्ट टेक्नोलॉजी का नया बल, सी-डॉट के साथ हुआ समझौता, राजस्थान में भी हो सकता है लागू

दिल्ली पुलिस को मिलेगा स्मार्ट टेक्नोलॉजी का नया बल, सी-डॉट के साथ हुआ समझौता, राजस्थान में भी हो सकता है लागू

जयपुर/नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस की काम करने की क्षमता और जन सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से मजबूत बनाने के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने दिल्ली पुलिस के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 28 मार्च 2026 को किया गया। इसके तहत सी-डॉट दिल्ली पुलिस को 9 उन्नत स्वदेशी तकनीकी समाधान उपलब्ध कराएगा, जो स्मार्ट पुलिसिंग, सुरक्षित संचार, चेहरे की पहचान, साइबर सुरक्षा और क्वांटम सुरक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। जिससे पुलिस की काम करने की क्षमता बढ़ेगी, संचार बेहतर होगा और सुरक्षा मजबूत होगी। सी-डॉट भारत सरकार का एक प्रमुख टेलीकॉम रिसर्च संस्थान है।

नई तकनीकों से क्या फायदा होगा ?

Smart Policing
Smart Policing
  • चेहरा पहचानने की व्यवस्था (Facial Recognition System): भीड़ में या CCTV में किसी संदिग्ध व्यक्ति, लापता व्यक्ति या पुराने अपराधी को तुरंत पहचान लेगी।
  • समवाद (Samvaad): पुलिस वाले आपस में सुरक्षित तरीके से चैट, ऑडियो कॉल, वीडियो कॉल और फाइल शेयर कर सकेंगे।- समवाद प्राइम (Samvaad Prime) : खास हैंडसेट पर सुरक्षित मैसेज सिस्टम। बड़े अधिकारियों और महत्वपूर्ण ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल होगा।
  • सी-डॉट मीट: सुरक्षित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग। मीटिंग, ब्रिफिंग और ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होगा।- मिशन क्रिटिकल सर्विसेज (MCX): आपात स्थिति, भीड़ नियंत्रण या बड़ी घटना के समय फील्ड में पुलिसकर्मियों के बीच तेज और सुरक्षित बातचीत।
  • इंटेलिजेंट अटेंडेंस सिस्टम: चेहरे से ही हाजिरी लगेगी, प्रॉक्सी (दूसरे की हाजिरी) नहीं लग सकेगी।- सेल ब्रॉडकास्ट: जरूरी अलर्ट (जैसे यातायात, लापता व्यक्ति या आपात सूचना) लोगों के मोबाइल पर भेज सकेगा।
  • त्रिनेत्रा (Trinetra): AI आधारित साइबर सुरक्षा सिस्टम। पुलिस के कंप्यूटर सिस्टम को हैकिंग और साइबर अटैक से बचाएगा।
  • क्वांटम सुरक्षा तकनीक भविष्य में आने वाले बहुत मजबूत हैकिंग अटैक से बचाने वाली एडवांस सुरक्षा (एन्क्रिप्शन)।

जांच प्रक्रिया और साइबर सुरक्षा में होगा सुधार

इस सहयोग से दिल्ली पुलिस की जांच प्रक्रिया, भीड़ निगरानी, समन्वय और साइबर सुरक्षा में काफी सुधार होगा। समझौते पर सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा, “दिल्ली पुलिस के साथ यह साझेदारी स्वदेशी नवाचार को वास्तविक मैदान में उतारने का प्रमाण है। हम दिल्ली में एक सुरक्षित, स्मार्ट और आत्मनिर्भर पुलिसिंग इकोसिस्टम बनाने में योगदान दे रहे हैं।” समारोह में दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा और दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। दोनों पक्षों ने इस साझेदारी को देशभर के लिए एक मॉडल बनाने की प्रतिबद्धता जताई।यह समझौता आत्मनिर्भर भारत और प्रौद्योगिकी आधारित कानून प्रवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राजस्थान के लिए महत्व

यह मॉडल राजस्थान पुलिस के लिए भी बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। राजस्थान में बढ़ते साइबर अपराध, भीड़ प्रबंधन और आधुनिक निगरानी की जरूरत को देखते हुए राज्य पुलिस भी इसी तरह की स्वदेशी तकनीकों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली मॉडल को राजस्थान की पुलिस स्टेशनों, जयपुर, जोधपुर, उदयपुर जैसे बड़े शहरों और संवेदनशील इलाकों में लागू किया जा सकता है।

AI का बड़ा रोल

यह पूरी प्रणाली 100% AI आधारित नहीं है। लेकिन अधिकांश महत्वपूर्ण हिस्सों में AI की बड़ी भूमिका है। जिनमें फेशियल रिकग्निशन सिस्टम, त्रिनेत्रा ईएसओसी (साइबर सुरक्षा), त्रिनेत्रा 360 (साइबर इंटेलिजेंस) और इंटेलिजेंट अटेंडेंस सिस्टम प्रमुख हैं। यह एक हाइब्रिड सिस्टम है जिसमें AI मुख्य रूप से निगरानी और साइबर सुरक्षा में काम करेगा। इससे पुलिस की दक्षता बढ़ेगी और सुरक्षा मजबूत होगी।

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