नौ दिन बाद फिर बंद हुआ बाला किला का रास्ता, मायूस लौटे लोग

नौ दिन बाद फिर बंद हुआ बाला किला का रास्ता, मायूस लौटे लोग

अलवर. नवरात्र के बाद फिर से बाला किला और करणी माता को जाने वाला रास्ता बंद कर दिया गया है। शारदीय नवरात्र के बाद चैत्र नवरात्र में यह रास्ता खोला गया था, लेकिन शनिवार को रास्ता फिर से बंद किया गया है। यही नहीं प्रतापबंध स्थित प्रवेश द्वार पर सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से लिखवाया गया है कि मार्ग क्षतिग्रस्त होने की वजह से रास्ता बंद है।
अचानक बंद किए रास्ते की वजह से शहर से बाहर आने वाले श्रद्धालुओं को बिना करणी माता के दर्शन किए ही लौटना पड़ा। किशनगढ़बास से महिलाओं का एक दल यहां दर्शनों के लिए पहुंचा था, लेकिन उन्हें एंट्री नहीं दी गई। एक महिला ने बताया कि मैंने अपनी बेटी को दिल्ली से यहां दर्शनों के लिए बुलाया है, लेकिन निराशा हाथ लगी। इस बार चैत्र नवरात्र में यह मार्ग खुलने की उम्मीद कम ही थी, लेकिन करणी माता के अनुयायियों के दबाव के चलते रास्ते को खोला गया। हालांकि यहां चोपहिया वाहनों की एंट्री बंद की गई थी, लेकिन नौ दिन में कई बार ऐसे मौके आए, जब चोपहिया वाहनों को एंट्री दी गई और यहां रास्ता जाम हो गया। यह मार्ग लगातार बंद होने की वजह से कई बाघ-बाघिन ने यहां अपनी टेरेटरी भी बना ली है।
अब भी सही नहीं हुआ मार्ग
बाला किला मार्ग पिछले साल बारिश के दौरान ढह गया था। इसके बाद इसे सही करवाकर शारदीय नवरात्र में लोगों को एंट्री दी गई, लेकिन मार्ग पूरी तरह सही नहीं होने के कारण इसे फिर से बंद कर दिया गया। अब चैत्र नवरात्र के नौ दिनों तक मार्ग को खोलने के बाद शनिवार से यहां एंट्री को बंद कर दिया गया है। गौरतलब है कि पिछले साल ही इस मार्ग को सही किया गया था। केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसका उद्घाटन किया था, लेकिन कुछ दिन बाद ही बारिश में यह ढह गया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी की कार्यशैली को लेकर सवाल भी उठे थे।
सरकार को भी राजस्व का नुकसान
रास्ता बंद होने की वजह से यहां जंगल सफारी नहीं हो पा रही है। बाला किला में भी एंट्री बंद है, इससे राजस्व को नुकसान हो रहा है। हालांकि पर्यटकाें को अंधेरी क्षेत्र में सफारी करवाई जा रही है, जहां कुछ बाघ-बाघिन की कई बार साइटिंग हुई है।

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