जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एटीएम मशीन काटकर चोरी करने के मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों को जमानत देते हुए उन्हें सामुदायिक सेवा के तहत 30 दिन तक प्रतिदिन कम से कम पांच पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को अपराधियों के पुनर्वास और अपराध की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश भी दिए है।
न्यायाधीश चंद्र प्रकाश श्रीमाली की एकल पीठ ने वारिस उर्फ लहाकी और उस्मान उर्फ अंधा की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। पीठ के अनुसार आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने जांच पूरी कर चालान पेश कर दिया है और आरोपियों से कोई बरामदगी शेष नहीं है।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि दोनों आरोपियों ने गैस कटर से एसबीआई के एटीएम को काटकर चोरी की और चोरी किए गए वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर अपराध किया। वारिस के खिलाफ तीन और उस्मान के खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज होने का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया गया। कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि केवल आपराधिक इतिहास के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा गया कि यदि अन्य परिस्थितियां अनुकूल हों तो लंबित आपराधिक मामलों के कारण ही जमानत से वंचित करना उचित नहीं है। पीठ ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं बल्कि अपराधियों का सुधार और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी है।
सुधारात्मक उपायों को प्राथमिकता
पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि छोटे या पहली बार अपराध करने वालों को जेल में रखने से कई बार वे और अधिक गंभीर अपराधी बन सकते हैं, इसलिए सुधारात्मक उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। दोनों आरोपी 30 दिन तक प्रतिदिन कम से कम पांच पौधे लगाएंगे और देखभाल करेंगे। यह कार्य आदेश की तारीख से एक सप्ताह के भीतर शुरू करना होगा।
वन अधिकारी पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराएंगे। पालन रिपोर्ट फोटो व वीडियो सहित संबंधित पुलिस थाने को दी जाएगी। पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि अपराधियों के आपराधिक व्यवहार के कारणों की पहचान करने, पुनर्वास की व्यवस्था करने और अपराध की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।
पृष्ठभूमि की जानकारी मांगी
पुलिस अधिकारियों को भी निर्देश दिया गया है कि वे आरोपियों की पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि का विस्तृत विवरण पीठ के समक्ष प्रस्तुत करें, जिससे सुधारात्मक उपाय तय करने में मदव मिल सके। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भी योजना बनाकर ऐसे आरोपियों के लिए काउंसलिंग, कौशल विकास और समाज में पुनर्स्थापन जैसे कार्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।


