यूएस मीडिया रिपोर्ट में खुलासा, पेंटागन कर रहा ईरान पर जमीनी हमले की तैयारी, 3500 मरीन भेजे मिडिल ईस्ट

यूएस मीडिया रिपोर्ट में खुलासा, पेंटागन कर रहा ईरान पर जमीनी हमले की तैयारी, 3500 मरीन भेजे मिडिल ईस्ट

Iran-Israel War: अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग को लेकर यूएस की मीडिया ने बड़ा खुलासा किया है। वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि हजारों की संख्या में अमेरिकी सैनिक मिडिल ईस्ट पहुंच रहे हैं। यह युद्ध का एक नया और खतरनाक दौर बन सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) ईरान में जमीनी हमले की तैयारी कर रहा है।

स्पेशल फोर्स और इंफ्रेंट्री के जवान होंगे ऑपरेशन में शामिल

वाशिंगटन रिपोर्ट ने यूएस अधिकारियों के हवाले दावा किया है कि कोई भी संभावित जमीनी ऑपरेशन पूरी तरह से हमला नहीं होगा। इसके बजाय, इसमें स्पेशल ऑपरेशन फोर्स और इंफ्रेंट्री के जवान शामिल होंगे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ऐसे मिशन में US सैनिकों को कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ सकता है। इसमें ईरानी ड्रोन और मिसाइलें, आमने-सामने की जंग और IED का हमला शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रंप लगातार दोहरी बात कर रहे हैं। कभी वह कहते हैं कि युद्ध अब खत्म होने वाला है, तो कभी वह इसे और बढ़ाने की धमकी देते हैं।

रूबियो ने कहा था हम जमीन पर बिना सैनिक उतारे भी जीत सकते

US विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका बिना जमीनी सैनिकों के भी अपने सभी लक्ष्य हासिल कर सकता है, लेकिन वॉशिंगटन पोस्ट ने बताया कि इसके लिए काफी पहले से ही योजना बनाई जा रही है। एक अधिकारी ने कहा कि यह कोई आखिरी समय में की गई योजना नहीं है।

3500 मरीन पहुंचे मध्य पूर्व

इस बीच, यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घोषणा की कि लगभग 3,500 मरीनों की एक टास्क फोर्स मध्य पूर्व पहुंच गई है। CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि यूएस सैलर्स और मरीन्स यूएसएस ट्रिपोली (LHA 7) पर सवार होकर 27 मार्च को यूएस सेंट्रल कमांड क्षेत्र में पहुंचे।

अमेरिका-क्लास एम्फीबियस असेल्ट शिप ट्रिपोली ट्रिपोली एम्फीबियस रेडी ग्रुप / 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट (MEU) का फ्लैगशिप है। इसमें परिवहन और स्ट्राइक फाइटर एयरक्राफ्ट, एम्फीबियस असेल्ट और टैक्टिकल एसेट्स शामिल हैं। यह यूनिट तेजी से तैनाती, सामरिक स्थानों को सुरक्षित करने, निकासी या तटीय लक्ष्यों पर हमलों के लिए जानी जाती है। यह तैनाती ईरान के साथ चल रहे युद्ध से जुड़ी व्यापक अमेरिकी सैन्य बढ़ोतरी का हिस्सा है।

यूएसए के इस कदम से बढ़ सकते हैं तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी अम्फीबियस फोर्स समुद्र-आधारित हमलों और जमीनी अभियानों दोनों के लिए सक्षम है। पेंटागन ने पहले 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के पैराट्रूपर्स को भी मध्य पूर्व भेजने का आदेश दिया था, जो क्षेत्र में तनाव बढ़ने का संकेत है।विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ईरान की तेल सुविधाओं और मिसाइल क्षमता को लक्ष्य बनाकर क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है। हालांकि, जमीनी अभियान से अमेरिकी सैनिकों को काफी जोखिम हो सकता है और युद्ध लंबा खिंचने की आशंका बनी हुई है।

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