झारखंड पुलिस के पास एके-47 जैसे अत्याधुनिक हथियारों की 49 प्रतिशत तक कमी है। इससे पुलिस एसएलआर जैसे हथियारों पर निर्भर है। यह खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट से हुआ है। इसके बाद अब सरकार ने झारखंड पुलिस को आधुनिक और तकनीक से लैस बनाने के लिए करीब 30 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बनाई है। इस आधुनिकीकरण अभियान में नए हथियार, अत्याधुनिक उपकरण और मोबिलिटी संसाधनों की खरीद होगी। इस खर्च में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की भागीदारी होगी, जो देशभर में चल रही पुलिस आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है। ड्रोन, नाइट विजन, हाई-रेंज राइफल की भी होगी खरीद झारखंड नक्सल प्रभावित राज्यों में शामिल रहा है, जहां घने जंगल और दुर्गम इलाके सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने रहते हैं। इस वर्ष झारखंड पुलिस को लिए ड्रोन, नाइट विजन कैमरा, हाई-रेंज राइफल और कम्युनिकेशन सिस्टम की खरीद होगी। इससे पुलिस को सपोर्ट मिलता है, जिससे नक्सलियों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होता है। नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन को और प्रभावी बनाने के लिए अत्याधुनिक हथियार और इक्यूपमेंट बहुत जरूरी है। इन जगहों पर होगा इसका उपयोग नए वाहन मिल चुके, हथियार मिलने से स्मार्ट होगी पुलिस आधुनिक हथियारों और टेक्नोलॉजी के आने से झारखंड पुलिस स्मार्ट पुलिसिंग की ओर बढ़ेगी। हाल ही में राज्य में 1400 से अधिक नए वाहन थानों को मिले हैं। इसके साथ ही कई हाईटेक थानों की भी शुरुआत हुई है, जो इसी दिशा में बड़ा कदम है। इससे रिस्पॉन्स टाइम कम होगा और गश्ती व्यवस्था मजबूत होगी। झारखंड पुलिस के पास अभी इंसास राइफल, एसएलआर, कार्बाइन, पिस्टल और एके-47 जैसे आधुनिक हथियार मौजूद हैं। लेकिन कई जिलों में एके-47 की संख्या सीमित है। 5 जिलों को नक्सलमुक्त करने पर भी खर्च होंगे 60 करोड़… राज्य के कुछ जिलों पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा, बोकारो, चतरा और लातेहार में अभी भी नक्सलियों का प्रभाव है। इन जिलों को पूरी तरह से नक्सल मुक्त कराने पर अगले वित्तीय वर्ष में 60 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इन जिलों में अभियान और विकास के माध्यम से वामपंथ उग्रवाद को खत्म करने की योजना है। झारखंड पुलिस के पास एके-47 जैसे अत्याधुनिक हथियारों की 49 प्रतिशत तक कमी है। इससे पुलिस एसएलआर जैसे हथियारों पर निर्भर है। यह खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट से हुआ है। इसके बाद अब सरकार ने झारखंड पुलिस को आधुनिक और तकनीक से लैस बनाने के लिए करीब 30 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बनाई है। इस आधुनिकीकरण अभियान में नए हथियार, अत्याधुनिक उपकरण और मोबिलिटी संसाधनों की खरीद होगी। इस खर्च में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की भागीदारी होगी, जो देशभर में चल रही पुलिस आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है। ड्रोन, नाइट विजन, हाई-रेंज राइफल की भी होगी खरीद झारखंड नक्सल प्रभावित राज्यों में शामिल रहा है, जहां घने जंगल और दुर्गम इलाके सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने रहते हैं। इस वर्ष झारखंड पुलिस को लिए ड्रोन, नाइट विजन कैमरा, हाई-रेंज राइफल और कम्युनिकेशन सिस्टम की खरीद होगी। इससे पुलिस को सपोर्ट मिलता है, जिससे नक्सलियों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होता है। नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन को और प्रभावी बनाने के लिए अत्याधुनिक हथियार और इक्यूपमेंट बहुत जरूरी है। इन जगहों पर होगा इसका उपयोग नए वाहन मिल चुके, हथियार मिलने से स्मार्ट होगी पुलिस आधुनिक हथियारों और टेक्नोलॉजी के आने से झारखंड पुलिस स्मार्ट पुलिसिंग की ओर बढ़ेगी। हाल ही में राज्य में 1400 से अधिक नए वाहन थानों को मिले हैं। इसके साथ ही कई हाईटेक थानों की भी शुरुआत हुई है, जो इसी दिशा में बड़ा कदम है। इससे रिस्पॉन्स टाइम कम होगा और गश्ती व्यवस्था मजबूत होगी। झारखंड पुलिस के पास अभी इंसास राइफल, एसएलआर, कार्बाइन, पिस्टल और एके-47 जैसे आधुनिक हथियार मौजूद हैं। लेकिन कई जिलों में एके-47 की संख्या सीमित है। 5 जिलों को नक्सलमुक्त करने पर भी खर्च होंगे 60 करोड़… राज्य के कुछ जिलों पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा, बोकारो, चतरा और लातेहार में अभी भी नक्सलियों का प्रभाव है। इन जिलों को पूरी तरह से नक्सल मुक्त कराने पर अगले वित्तीय वर्ष में 60 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इन जिलों में अभियान और विकास के माध्यम से वामपंथ उग्रवाद को खत्म करने की योजना है।


