देवरिया जिले के भटनी चीनी मिल मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ED ने मिल परिसर पर नोटिस चस्पा कर उसे अपने कब्जे में ले लिया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है। जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
ED की जांच में मिला मनी लॉन्ड्रिंग का सबूत, संपति हुई जब्त
ED द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, भटनी चीनी मिल से जुड़ी संपत्तियों को पहले ही 27 फरवरी 2025 को अस्थायी रूप से अटैच किया गया था। बाद में 28 जुलाई 2025 को सक्षम प्राधिकरण ने इस अटैचमेंट को मंजूरी दे दी थी, औऱ अब मार्च 2026 में नोटिस चस्पा किया गया है। ED की जांच में यह सामने आया कि भटनी चीनी मिल से संबंधित जमीन और संपत्तियां M/s Honeywell Sugars Pvt. Ltd. के नाम पर थीं।
इन संपत्तियों में देवरिया जिले के सलेमपुर तहसील के विभिन्न गांवों की जमीन शामिल है, जिनका कुल क्षेत्रफल करीब 11.577 हेक्टेयर बताया गया है। ED ने पाया कि यह संपत्तियां मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी हुई हैं, जिसके चलते इन्हें जब्त कर लिया गया।
बसपा सरकार में खुला था अनियमितता का सबूत
आप को बता दें कि वर्ष 2011 में तत्कालीन मायावती की सरकार के दौरान भटनी चीनी मिल को करीब 5 करोड़ रुपये में ‘हनी वेल्स’ नामक कंपनी को बेच दिया गया था। आरोप है कि इस सौदे में भारी अनियमितताएं हुईं और मिल के साथ-साथ नूरीगंज बाजार भटनी की जमीन समेत कई संपत्तियों को बेनामी तरीके से ट्रांसफर कर दिया गया।
ED ने चीनी मिल की संपति जब्त की, नोटिस भी चस्पा हुई
सरकार बदलने के बाद वर्ष 2018 में इस पूरे प्रकरण की जांच CBI को सौंपी गई थी। CBI द्वारा FIR दर्ज कर जांच शुरू की गई, जिसके बाद ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से अपनी जांच तेज कर दी। सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान संपत्तियों में हेराफेरी और सौदे में अनियमितताओं के संकेत मिले। इसके आधार पर ED ने कार्रवाई करते हुए अब चीनी मिल की संपत्तियों को जब्त कर लिया हैं और नोटिस चस्पा कर दिया हैं।
इस कार्रवाई के बाद अब मामले में संबंधित लोगों से पूछताछ तेज होने की संभावना है। साथ ही, मामला न्यायालय में विचाराधीन रहेगा, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा। ED की इस कारवाई के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।


