अजमेर में कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक युवक ने कोर्ट की कार्यवाही (प्रोसिडिंग) का वीडियो बना लिया। जब एक कोर्ट कर्मचारी ने युवक को रोका तो उसने बदतमीजी की। इसके बाद वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसका मोबाइल फोन ले लिया। इसके बाद वीडियो को डिलीट कर दिया। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने आरोपी पर एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया। जुर्माना न भरने पर उसे एक महीने की जेल की सजा सुनाई गई। जुर्माना भरने के बाद युवक को रिहा कर दिया गया। यह मामला अजमेर के अतिरिक्त सिविल जज और न्यायिक मजिस्ट्रेट, कम संख्या-02 का है। घटना पर कोर्ट ने लिया संज्ञान फरहान खान (21) पुत्र उस्मान, चौमू के हाजी कॉलोनी के इमाम चौक, वार्ड नंबर 28 का रहने वाला है। अदालत की कार्यवाही का वीडियो बना रहा था। जब एक कोर्ट कर्मचारी ने उसे वीडियो बनाने से रोका, तो उसने बदतमीजी की। इस पर फरहान खान को न्यायालय में न्यायिक हिरासत में ले लिया गया। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 267 और 61 (2) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 384 के तहत अपराध का संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया गया। बचाव पक्ष ने यह रखा पक्ष सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा- आरोपी एक नौजवान युवक है। अनजाने में कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो बनाया था। इसके पीछे उसकी कोई गलत मंशा नहीं थी, इसलिए आरोपी के प्रति नरमी बरतते हुए उसे माफ किया जाए और कारावास की सजा न देकर केवल कम से कम जुर्माना लगाया जाए। वहीं, सहायक अभियोजन अधिकारी ने उचित आदेश पारित करने का निवेदन किया। कोर्ट ने माना दोषी कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा- आजकल युवा सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि पाने के लिए न्यायालय की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने से भी नहीं हिचकिचाते। इस मामले में भी आरोपी ने सिर्फ कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो ही नहीं बनाया, बल्कि कोर्ट के कर्मचारी से बदतमीजी भी की। इतना ही नहीं, जब पुलिसकर्मी कोर्ट के आदेश पर उसका मोबाइल चेक कर रहा था, तो उससे मोबाइल छीनकर वीडियो डिलीट कर दिया। यह बहुत गंभीर बात है। इसलिए आरोपी को माफ नहीं किया जा सकता, उसे सजा मिलनी ही चाहिए। कोर्ट ने फरहान खान पर एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया और कहा कि अगर जुर्माना नहीं भरा, तो एक महीने के लिए जेल में रहना होगा। जुर्माना भरने के बाद उसे छोड़ दिया गया।


