गर्भवती को ऑपरेशन टेबल पर लिटाकर सो गया स्टाफ, दर्द से चीखी तो दौड़कर पहुंचे परिजन

गर्भवती को ऑपरेशन टेबल पर लिटाकर सो गया स्टाफ, दर्द से चीखी तो दौड़कर पहुंचे परिजन

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से एक बेहद ही शर्मनाक घटना सामने आई है। यहां प्रसव के लिए आई एक गर्भवती महिला को ऑपरेशन थिएटर (OT) के भीतर टेबल पर लिटाकर डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के सोने का गंभीर आरोप लगा है। जानकीपुरम के निवासी अमित अपनी पत्नी मीनाक्षी को 24 मार्च की रात करीब 12 बजे प्रसव पीड़ा होने पर आपातकालीन स्थिति में अस्पताल लेकर पहुंचे थे। पीड़ित पति का आरोप है कि जब वे अस्पताल पहुंचे, तब वहां मौजूद डॉक्टर और कर्मचारी सो रहे थे। काफी देर इंतजार करने के बाद कर्मचारियों ने गर्भवती महिला को ओटी के भीतर पहुंचाया, लेकिन वह फिर सो गए।

परिजनों के अनुसार, अस्पताल कर्मियों ने जांच करने के बाद प्रसूता से कहा कि प्रसव में अभी काफी समय लगेगा और उसे थोड़ा इंतजार करना होगा। इतना कहकर स्टाफ महिला को ओटी की टेबल पर लावारिस हालत में लिटाकर दूसरे कमरे में सोने चला गया। लगभग आधे घंटे बाद जब प्रसूता की तकलीफ अत्यधिक बढ़ गई और उसने दर्द के मारे शोर मचाया, तब भी अस्पताल के किसी कर्मचारी के कान पर जूं नहीं रेंगी।

चीख सुनकर अंदर भागे परिजन

अंततः ओटी के बाहर बैठे पति और सास महिला की चीखें सुनकर भीतर दौड़े और वहां का नजारा देख दंग रह गए। परिजनों ने खुद दूसरे कमरे में जाकर सो रहे कर्मचारियों को जगाया, जिसके बाद आनन-फानन में डॉक्टर मौके पर पहुंचे और सुरक्षित प्रसव कराया गया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि वे समय पर भीतर न पहुंचते, तो लापरवाही के कारण मां और बच्चे की जान भी जा सकती थी।

2200 रुपए नेग के नाम पर लेने का आरोप

गंभीर लापरवाही के अलावा, अस्पताल प्रशासन पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के भी आरोप लगे हैं। परिजनों का दावा है कि डिलीवरी के बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने ‘नेग’ (बधाई) के नाम पर 2200 रुपये की अवैध वसूली की। आरोप है कि अलीगंज CHC में हर प्रसव पर इसी तरह पैसे वसूले जाते हैं और यदि कोई गरीब परिवार इसका विरोध करता है, तो उसे ‘केस बिगाड़ने’ की धमकी दी जाती है। पीड़ित ने इस संबंध में उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।

अधीक्षक बोले- नहीं मिली शिकायत

अलीगंज CHC के प्रभारी अधीक्षक डॉ. हेमंत ने कहा कि स्टाफ के सोने और अवैध वसूली के सभी आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक उन्हें कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है, लेकिन यदि परिजन लिखित में अपनी बात रखते हैं, तो मामले की निष्पक्षता से जांच कराई जाएगी। अधीक्षक ने आश्वासन दिया कि यदि जांच में कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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