‘तीन महीने में पद छोड़ने की नौबत क्यों आई?’:बांका में प्रशांत किशोर का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज

‘तीन महीने में पद छोड़ने की नौबत क्यों आई?’:बांका में प्रशांत किशोर का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज

जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बांका दौरे के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने दावा किया कि 202 विधायकों के समर्थन के बावजूद मुख्यमंत्री को तीन महीने के भीतर ही अपना पद छोड़ने की नौबत आ रही है। प्रशांत किशोर ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ के तहत राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं। शनिवार शाम को प्रशांत किशोर बांका जिले पहुंचे। यहां उन्होंने सर्किट हाउस के समीप स्थित होटल मधुवन विहार में जन सुराज के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने की रणनीति और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की। अप्रैल, मई और जून में पूरे राज्य में संगठन का पुनर्गठन करेगी जन सुराज प्रशांत किशोर ने बताया कि जन सुराज पार्टी अगले तीन महीनों, यानी अप्रैल, मई और जून में पूरे राज्य में संगठन का पुनर्गठन करेगी। इस अवधि में जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर पर संगठन को मजबूत करने का काम किया जाएगा। इसके बाद जुलाई महीने से पूरे बिहार में बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान चलाया जाएगा, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को संगठन से जोड़ना है। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव परिणाम आने के बाद जन सुराज के नेताओं ने पश्चिम चंपारण स्थित गांधी भितिहरवा आश्रम में एक दिन का उपवास रखा था। उस समय यह घोषणा की गई थी कि बिहार में बनी नई सरकार को अपने वादों को पूरा करने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ के तहत जन सुराज के कार्यकर्ता घर-घर जाकर जनता के बीच अपनी बात रखेंगे। यह अभियान अगले पांच वर्षों तक प्रभावी ढंग से चलाया जाएगा। ”हर विधानसभा क्षेत्र में 60 से 70 करोड़ रुपये खर्च कर वोट खरीदे” मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा पर तंज कसते हुए प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि चुनाव में सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में 60 से 70 करोड़ रुपये खर्च कर वोट खरीदे हैं। उन्होंने अपने दावे को दोहराते हुए कहा कि 202 विधायकों के समर्थन के बावजूद मुख्यमंत्री पद छोड़ने की स्थिति तीन महीने के भीतर ही बन रही है। उन्होंने कहा कि यह जीत किसी व्यक्ति या गठबंधन की लोकप्रियता की नहीं, बल्कि पैसे और चुनाव आयोग की मदद से बने परिणाम का असर है। बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के बाद जो भी बिहार चलाएगा, उसकी चिंता बिहार से ज्यादा गुजरात की फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की कमी को लेकर होगी। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बांका दौरे के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने दावा किया कि 202 विधायकों के समर्थन के बावजूद मुख्यमंत्री को तीन महीने के भीतर ही अपना पद छोड़ने की नौबत आ रही है। प्रशांत किशोर ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ के तहत राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं। शनिवार शाम को प्रशांत किशोर बांका जिले पहुंचे। यहां उन्होंने सर्किट हाउस के समीप स्थित होटल मधुवन विहार में जन सुराज के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने की रणनीति और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की। अप्रैल, मई और जून में पूरे राज्य में संगठन का पुनर्गठन करेगी जन सुराज प्रशांत किशोर ने बताया कि जन सुराज पार्टी अगले तीन महीनों, यानी अप्रैल, मई और जून में पूरे राज्य में संगठन का पुनर्गठन करेगी। इस अवधि में जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर पर संगठन को मजबूत करने का काम किया जाएगा। इसके बाद जुलाई महीने से पूरे बिहार में बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान चलाया जाएगा, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को संगठन से जोड़ना है। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव परिणाम आने के बाद जन सुराज के नेताओं ने पश्चिम चंपारण स्थित गांधी भितिहरवा आश्रम में एक दिन का उपवास रखा था। उस समय यह घोषणा की गई थी कि बिहार में बनी नई सरकार को अपने वादों को पूरा करने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘बिहार नवनिर्माण अभियान’ के तहत जन सुराज के कार्यकर्ता घर-घर जाकर जनता के बीच अपनी बात रखेंगे। यह अभियान अगले पांच वर्षों तक प्रभावी ढंग से चलाया जाएगा। ”हर विधानसभा क्षेत्र में 60 से 70 करोड़ रुपये खर्च कर वोट खरीदे” मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा पर तंज कसते हुए प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि चुनाव में सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में 60 से 70 करोड़ रुपये खर्च कर वोट खरीदे हैं। उन्होंने अपने दावे को दोहराते हुए कहा कि 202 विधायकों के समर्थन के बावजूद मुख्यमंत्री पद छोड़ने की स्थिति तीन महीने के भीतर ही बन रही है। उन्होंने कहा कि यह जीत किसी व्यक्ति या गठबंधन की लोकप्रियता की नहीं, बल्कि पैसे और चुनाव आयोग की मदद से बने परिणाम का असर है। बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के बाद जो भी बिहार चलाएगा, उसकी चिंता बिहार से ज्यादा गुजरात की फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की कमी को लेकर होगी।  

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