सुपौल के विभिन्न प्रखंडों में शुक्रवार देर रात अचानक मौसम ने करवट ली। तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि ने जहां किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया, वहीं कई इलाकों में सड़कों पर 1.5 फीट तक जलजमाव की समस्या भी गंभीर हो गई है। इस आपदा से खासकर मक्का की फसल को भारी नुकसान हुआ है। प्रतापगंज प्रखंड के सुखानगर, भवानीपुर उत्तर एवं चिलौनी पंचायतों में आई तेज आंधी और ओलावृष्टि ने दर्जनों किसानों की तैयार मक्का फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। खेतों में खड़ी फसल तेज हवा और ओलों की मार से जमीन पर गिर गई। किसानों का कहना है कि फसल कटाई के करीब थी, लेकिन अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा ने महीनों की मेहनत को खत्म कर दिया। नुकसान का आकलन कर राहत दिलाने की अपील की गई कई किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी। अब फसल नष्ट होने से उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है और परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया है। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से शीघ्र सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही कृषि विभाग से भी नुकसान का आकलन कर राहत दिलाने की अपील की गई है। वहीं, जिले के निर्मली, मरौना और सरायगढ़-भपटियाही क्षेत्रों में हल्की बारिश दर्ज की गई, जिससे वहां फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। राहगीरों और वाहनों को आवागमन में परेशानी हो रही इधर, किशनपुर प्रखंड के किशनपुर उत्तर पंचायत अंतर्गत थरबिटिया मौजहा मार्ग पर पीरगंज वार्ड नंबर 2 स्थित इस्लाम घर के पास जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो गई है। जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़क पर पानी जमा हो गया है, जिससे राहगीरों और वाहनों को आवागमन में परेशानी हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या हर वर्ष होती है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। बीडीओ पिंकी कुमारी ने बताया कि जलजमाव की सूचना मिली है और निकासी की व्यवस्था की जा रही है। सुपौल के विभिन्न प्रखंडों में शुक्रवार देर रात अचानक मौसम ने करवट ली। तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि ने जहां किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया, वहीं कई इलाकों में सड़कों पर 1.5 फीट तक जलजमाव की समस्या भी गंभीर हो गई है। इस आपदा से खासकर मक्का की फसल को भारी नुकसान हुआ है। प्रतापगंज प्रखंड के सुखानगर, भवानीपुर उत्तर एवं चिलौनी पंचायतों में आई तेज आंधी और ओलावृष्टि ने दर्जनों किसानों की तैयार मक्का फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। खेतों में खड़ी फसल तेज हवा और ओलों की मार से जमीन पर गिर गई। किसानों का कहना है कि फसल कटाई के करीब थी, लेकिन अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा ने महीनों की मेहनत को खत्म कर दिया। नुकसान का आकलन कर राहत दिलाने की अपील की गई कई किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी। अब फसल नष्ट होने से उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है और परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया है। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से शीघ्र सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही कृषि विभाग से भी नुकसान का आकलन कर राहत दिलाने की अपील की गई है। वहीं, जिले के निर्मली, मरौना और सरायगढ़-भपटियाही क्षेत्रों में हल्की बारिश दर्ज की गई, जिससे वहां फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। राहगीरों और वाहनों को आवागमन में परेशानी हो रही इधर, किशनपुर प्रखंड के किशनपुर उत्तर पंचायत अंतर्गत थरबिटिया मौजहा मार्ग पर पीरगंज वार्ड नंबर 2 स्थित इस्लाम घर के पास जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो गई है। जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़क पर पानी जमा हो गया है, जिससे राहगीरों और वाहनों को आवागमन में परेशानी हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या हर वर्ष होती है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। बीडीओ पिंकी कुमारी ने बताया कि जलजमाव की सूचना मिली है और निकासी की व्यवस्था की जा रही है।


