Middle-East Crisis: ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य कार्रवाई के 28 दिन बाद अब हूती विद्रोही भी जंग में शामिल हो गए हैं। इससे मध्य-पूर्व का संघर्ष और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इस युद्ध में यमन से पहली बार मिसाइल दागे जाने से साफ है कि इजरायल अब कई दिशाओं से हमले झेल रहा है। उधर, हूती विद्रोहियों के जंग में शामिल होने पर अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर भी दबाव बढ़ेगा।
वैश्विक व्यापार की नाकेबंदी
जैसे स्ट्रेट ऑफ होर्मूज समुद्री मार्ग से होकर दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति होती है, उसी तरह बाब अल-मंडेब स्ट्रेट भी वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद अहम रास्ता है। बाब अल-मंडेब स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है।
भौगोलिक रूप से यह यमन और अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में स्थित जिबूती व इरिट्रिया के बीच पड़ता है। होर्मूज की तरह ही, बाब अल-मंडेब भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद रणनीतिक मार्ग है, जो यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया को आपस में जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है।
इजरायल हमले के बाद अब हूती फिर से बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाते हैं, तो एशिया और यूरोप के बीच का व्यापार प्रभावित होगा। जहाजों को अफ्रीका के चारों ओर घूमकर जाना पड़ेगा, जिससे सामान महंगा हो जाएगा। चूंकि इस रास्ते से भारी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है, हमलों से वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।
हूती के पास लंबी दूरी की मिसाइलें-ड्रोन
हूतियों के पास ईरान द्वारा दी गई लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें और घातक ड्रोन हैं। ईरान युद्ध में कूदकर अब हूतियों ने इजरायल पर दबाव बढ़ा दिया है। अब उसे कई मोर्चे पर युद्ध लड़ना पड़ रहा है। इजरायल एक तरफ जहां लेबनान से हिजबुल्ला के हमले झेल रहा, तो दूसरी तरफ गाजा से हमास एक्टिव है। अब यमन से हूती विद्रोहियों के हमले ने इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है।
सऊदी अरब और UAE की चिंता बढ़ेगी
ईरान युद्ध में हूतियों के कूदने से सऊदी अरब और UAE की चिंता बढ़ गई है। इसकी वजह यह है कि हूती फिर से इन देशों के तेल प्रतिष्ठानों और शहरों को निशाना बना सकते हैं। इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता आ जाएगी। ऐसे में दोनों देशों को अपनी रक्षा पर अधिक खर्च करना पड़ेगा।
अमेरिका के लिए आर्थिक रूप से घाटे का सौदा
लाल सागर में अमेरिकी नौसेना की उपस्थिति पहले से ही है, लेकिन हूतियों के ड्रोन और मिसाइल हमले कभी न खत्म होने वाले युद्ध का हिस्सा हैं। सस्ते ड्रोनों को रोकने के लिए महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग करना अमेरिका के लिए आर्थिक रूप से घाटे का सौदा साबित हो सकता है।


