रक्त कैंसर के इलाज में नई थेरेपी से उम्मीद:पटना में हेमैटोलॉजिकल मैलिग्नेंसी पर विशेषज्ञों का मंथन, बोले-लक्षणों को सामान्य समस्या मानकर अनदेखा न करें

रक्त कैंसर के इलाज में नई थेरेपी से उम्मीद:पटना में हेमैटोलॉजिकल मैलिग्नेंसी पर विशेषज्ञों का मंथन, बोले-लक्षणों को सामान्य समस्या मानकर अनदेखा न करें

पटना में शुक्रवार को रक्त कैंसर के आधुनिक इलाज पर एक दिवसीय सेमिनार ‘अपडेट ऑन हेमैटोलॉजिकल मैलिग्नेंसी’ का आयोजन किया गया। इसमें देशभर से आए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। यह कार्यक्रम राजधानी के एक निजी होटल में कैंसर केयर एंड क्योर पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट और बुद्धा कैंसर सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। रक्त कैंसर के इलाज में नई थेरेपी पर चर्चा कार्यक्रम के आयोजनकर्ता बुद्धा कैंसर सेंटर के निदेशक डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि, मल्टीपल मायलोमा और ल्यूकेमिया जैसे रक्त कैंसर के इलाज में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मल्टीपल मायलोमा बुजुर्गों में पाई जाती- डॉ. संजीव लखनऊ के रक्त रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव ने मल्टीपल मायलोमा पर को लेकर बताया कि, यह बीमारी मुख्य रूप से बुजुर्गों में पाई जाती है। इसके सामान्य लक्षणों में हड्डियों में दर्द, लगातार थकान और उल्टी महसूस होना शामिल हैं। केमिकल, पेस्टिसाइड या अत्यधिक रेडिएशन के संपर्क में आने वाले लोगों में इस बीमारी का खतरा अधिक होता है। लक्षणों को सामान्य समस्या मानकर अनदेखा न करें- डॉ. अविनाश वरिष्ठ हेमैटोलॉजिस्ट डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने एक्यूट मायलॉयड ल्यूकेमिया (एएमएल) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि, यह कैंसर आमतौर पर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में होता है और तेजी से फैलता है। इसके शुरुआती लक्षणों में थकान, खून की कमी, सांस लेने में कठिनाई और हड्डियों में दर्द शामिल हैं। डॉ. सिंह ने सलाह दी कि इन लक्षणों को उम्र संबंधी सामान्य समस्या मानकर अनदेखा न करें और तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लें। विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव कार्यक्रम में गुरुग्राम से डॉ. वेदम रामप्रसाद, डॉ. अंकिता जायसवाल, डॉ. सैकत मंडल सहित पटना के वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह, डॉ. राजेश कुमार सिंह, डॉ. मनीषा सिंह, डॉ. बी. सान्याल और डॉ. दिनेश कुमार सिन्हा उपस्थित रहे। सभी विशेषज्ञों ने आधुनिक उपचार पद्धतियों और मरीजों में हो रहे सुधार के अपने अनुभव साझा किए। ऐसे आयोजन ज्ञान और उपचार दोनों के लिए जरूरी कार्यक्रम के अंत में बुद्धा कैंसर सेंटर के निदेशक डॉ. अरविंद कुमार ने सभी विशेषज्ञों का धन्यवाद करते हुए कहा कि, ‘इस तरह के आयोजनों की निरंतर आवश्यकता है। इससे कम समय में किसी विशेष विषय पर गहन चर्चा संभव होती है और चिकित्सकों को नई जानकारी मिलती है, जिसका सीधा लाभ मरीजों को मिलता है।’ इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और समय पर इलाज से रक्त कैंसर जैसे गंभीर रोगों पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव है। पटना में शुक्रवार को रक्त कैंसर के आधुनिक इलाज पर एक दिवसीय सेमिनार ‘अपडेट ऑन हेमैटोलॉजिकल मैलिग्नेंसी’ का आयोजन किया गया। इसमें देशभर से आए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। यह कार्यक्रम राजधानी के एक निजी होटल में कैंसर केयर एंड क्योर पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट और बुद्धा कैंसर सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। रक्त कैंसर के इलाज में नई थेरेपी पर चर्चा कार्यक्रम के आयोजनकर्ता बुद्धा कैंसर सेंटर के निदेशक डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि, मल्टीपल मायलोमा और ल्यूकेमिया जैसे रक्त कैंसर के इलाज में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। मल्टीपल मायलोमा बुजुर्गों में पाई जाती- डॉ. संजीव लखनऊ के रक्त रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव ने मल्टीपल मायलोमा पर को लेकर बताया कि, यह बीमारी मुख्य रूप से बुजुर्गों में पाई जाती है। इसके सामान्य लक्षणों में हड्डियों में दर्द, लगातार थकान और उल्टी महसूस होना शामिल हैं। केमिकल, पेस्टिसाइड या अत्यधिक रेडिएशन के संपर्क में आने वाले लोगों में इस बीमारी का खतरा अधिक होता है। लक्षणों को सामान्य समस्या मानकर अनदेखा न करें- डॉ. अविनाश वरिष्ठ हेमैटोलॉजिस्ट डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने एक्यूट मायलॉयड ल्यूकेमिया (एएमएल) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि, यह कैंसर आमतौर पर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में होता है और तेजी से फैलता है। इसके शुरुआती लक्षणों में थकान, खून की कमी, सांस लेने में कठिनाई और हड्डियों में दर्द शामिल हैं। डॉ. सिंह ने सलाह दी कि इन लक्षणों को उम्र संबंधी सामान्य समस्या मानकर अनदेखा न करें और तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लें। विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव कार्यक्रम में गुरुग्राम से डॉ. वेदम रामप्रसाद, डॉ. अंकिता जायसवाल, डॉ. सैकत मंडल सहित पटना के वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह, डॉ. राजेश कुमार सिंह, डॉ. मनीषा सिंह, डॉ. बी. सान्याल और डॉ. दिनेश कुमार सिन्हा उपस्थित रहे। सभी विशेषज्ञों ने आधुनिक उपचार पद्धतियों और मरीजों में हो रहे सुधार के अपने अनुभव साझा किए। ऐसे आयोजन ज्ञान और उपचार दोनों के लिए जरूरी कार्यक्रम के अंत में बुद्धा कैंसर सेंटर के निदेशक डॉ. अरविंद कुमार ने सभी विशेषज्ञों का धन्यवाद करते हुए कहा कि, ‘इस तरह के आयोजनों की निरंतर आवश्यकता है। इससे कम समय में किसी विशेष विषय पर गहन चर्चा संभव होती है और चिकित्सकों को नई जानकारी मिलती है, जिसका सीधा लाभ मरीजों को मिलता है।’ इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और समय पर इलाज से रक्त कैंसर जैसे गंभीर रोगों पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव है।  

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