Rising Rajasthan : फ्रांस दूतावास नाराज, सीधे सीएम भजनलाल को लिखी चिठ्ठी, जानें क्यों मचा हंगामा

Rising Rajasthan : फ्रांस दूतावास नाराज, सीधे सीएम भजनलाल को लिखी चिठ्ठी, जानें क्यों मचा हंगामा

Rising Rajasthan : राजस्थान में निवेश को लेकर सरकार के दावों के बीच सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। फ्रांस दूतावास ने सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चिठ्ठी लिखकर फ्रांसीसी कंपनी सौफ्लेट माल्ट इंडिया के प्रोजेक्ट को जमीन नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है। प्रोजेक्ट के ‘रिस्क’ में आने की आशंका तक जता दी है।

दूतावास की ओर से 20 मार्च को लिखे पत्र में साफ लिखा है कि सीएम स्तर पर सकारात्मक बातचीत और सहमति बनने के बाद भी रीको से जमीन नहीं मिली। जमीन आवंटन के लिए जो कीमत प्रस्तावित की है, वह पहले तय दर से काफी अधिक है। साथ ही जमीन आवंटन की समय सीमा भी बढ़ाकर दिसंबर 2026 तक कर दी गई है। इससे प्रोजेक्ट के लिए जोखिम की स्थिति बन गई है और निवेश को लेकर अनिश्चितता पैदा हो रही है, जबकि कंपनी राज्य में निवेश को लेकर प्रतिबद्ध है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि कंपनी इन समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री से दोबारा मीटिंग करना चाहती है, ताकि कोई रास्ता निकाला जा सके। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह राज्य में निवेश जारी रखना चाहती है। यह पत्र वायरल होने के बाद रीको से लेकर सरकार तक हलचल मची हुई है। वहीं विपक्ष ने भी इसे आड़े हाथों लेते हुए विदेशी निवेशकों को परेशान करने का आरोप लगाया है।

1200 करोड़ का माल्ट प्लांट: कोटा में 50 एकड़ चिन्हित

रीको अधिकारियों के अनुसार कंपनी मुख्य रूप से बियर और फूड इंडस्ट्री के लिए जौ से माल्ट बनाने का काम करती है। राइजिंग राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान प्रदेश में प्लांट लगाने के लिए एमओयू किया। इसके तहत करीब 1200 करोड़ रुपए के निवेश से 3 लाख टन क्षमता का प्लांट दो चरणों में 2027-28 तक स्थापित किया जाना है। पहले फेज में एक लाख टन और दूसरे फेज में 2 लाख टन क्षमता होगी। कंपनी को करीब 50 एकड़ जमीन वहां चाहिए जहां पानी की उपलब्धता हो, इसके लिए कोटा में जमीन चिहिन्त की गई है।

कंपनी के आरोप व रीको का जवाब

कंपनी- कंपनी सहमति बनने के बाद भी रीको से नहीं मिली
रीको- कंपनी के मांग के अनुरूप कोटा एयरोसिटी के पास भूमि चिन्हित की है और 18 फरवरी को कोटा विकास प्राधिकरण स्तर पर रीको को 35 हेक्टेयर भूमिका आवंटन किया गया। कंपनी ने 25 फरवरी को इसमें से 20 हेक्टेयर (50 एकड़) विकसित भूमि (सभी आधारभूत सुविधाओं सहित) की मांग रखी। 5 मार्च को जयपुर में हुई बैठक में भी कंपनी ने विकसित भूमि पर जोर दिया। जिसे तैयार करने में 8-10 महीने लगन थे। इसके बाद 9 मार्च को कंपनी ने ईमेल के जरिए समय को देखते हुए अर्ध विकसित भूमि लेने पर सहमति जताई।

कंपनी- तय दर से अधिक बताई जमीन की कीमत
रीको- विकसित और अर्द्ध विकसित भूमि की आवंटन धर्म में अंतर स्वाभाविक है। इसी आधार पर कंपनी से अंतिम निर्णय के लिए बातचीत जारी है। कंपनी का प्रस्ताव मिलते ही नियम अनुसार आवंटन किया जाएगा

कंपनी को विकल्प दिए हैं जल्द आवंटन करेंगे

कंपनी को आवश्यकता अनुसार कई बिल्कुल दिखाएं हैं। कंपनी के अंतिम चयन के बाद भूमि का आवंटन कर दिया जाएगा। रीको राज्य में निवेशकों को जमीन आवंटित करने के लिए तत्पर है, ताकि राज्य में अधिक से अधिक राजस्व आ सके।
शिवांगी स्वर्णकर, प्रबंध निदेशक, रीको

इधर सियासत गरमाई, सिस्टम की मंशा पर बड़ा सवाल

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे सोशल मीडिया पर शेयर कर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा है कि, इस पत्र ने राजस्थान की निवेश नीति की असल तस्वीर सामने लाकर रख दी है। यदि मुख्यमंत्री स्तर पर बातचीत के बाद भी निवेश धरातल पर नहीं उतर रहा तो ये सीधे-सीधे सिस्टम की मंशा पर बड़ा सवाल है। विदेशी कंपनी जमीन के लिए भटक रही है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *