लुधियाना-जालंधर की तर्ज पर अब नूरसराय बनेगा ‘एग्रीकल्चर हब’:इंजीनियरिंग के छात्र मशीनों की डिजाइनिंग करेंगे; जीविका दीदियों के पास कस्टम हायरिंग सेंटर की कमान

लुधियाना-जालंधर की तर्ज पर अब नूरसराय बनेगा ‘एग्रीकल्चर हब’:इंजीनियरिंग के छात्र मशीनों की डिजाइनिंग करेंगे; जीविका दीदियों के पास कस्टम हायरिंग सेंटर की कमान

नालंदा जिले का नूरसराय अब पंजाब के लुधियाना-जालंधर की तरह कृषि यंत्रों के एक बड़े ‘प्रोडक्शन हब’ के रूप में अपनी पहचान बनाने को तैयार है। जिला प्रशासन की अनूठी पहल के बाद अब आधुनिक खेती की भारी मशीनों के डिजाइन के लिए स्थानीय निर्माताओं को दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना होगा। चंडी इंजीनियरिंग कॉलेज और जिले के पांच आईटीआई के युवा इंजीनियर अपने अद्यतन सॉफ्टवेयर और नई सोच से इन मशीनों की डिजाइन तैयार करेंगे। इंजीनियरों और निर्माताओं के बीच हुआ करार जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि नूरसराय में पहले से ही बेहतरीन कृषि यंत्र बनाए जा रहे हैं, लेकिन डिजाइनिंग के स्तर पर कुछ तकनीकी कमियां थीं। इसके समाधान के लिए प्रशासन ने चंडी इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों और आईटीआई के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का समन्वय स्थानीय निर्माताओं के साथ कराया है। अब जो जटिल तकनीकी काम पहले बाहरी राज्यों में होता था, उसे जिले के ही युवा इंजीनियर अंजाम दे रहे हैं। इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि स्थानीय प्रतिभाओं को भी बड़ा मंच मिलेगा। नूरसराय में बन रही ‘ट्री ट्रांसप्लांटर’ जैसी भारी मशीनें नूरसराय की निर्माण इकाइयों में अब सामान्य उपकरणों के अलावा ‘ट्री ट्रांसप्लांटर’ (पेड़ों को जड़ समेत विस्थापित करने वाली मशीन) और ‘स्ट्रॉ रीपर’ जैसी भारी मशीनों का निर्माण शुरू हो गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान इन आधुनिक उपकरणों का शानदार प्रदर्शन किया गया, जिसे विशेषज्ञों ने काफी सराहा है। जीविका दीदियों के हाथ में होगी कस्टम हायरिंग सेंटर की कमान कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत नूरसराय के ‘विशाल जीविका विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड’ को कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए समिति को 2 लाख 91 हजार रुपये का चेक भी प्रदान किया है। इस केंद्र के माध्यम से किसानों को कम किराए पर आधुनिक मशीनें उपलब्ध होंगी। जिलाधिकारी के अनुसार, इस पहल का दोहरा लाभ होगा। एक तरफ किसानों की लागत घटेगी, वहीं दूसरी ओर जीविका से जुड़ी महिलाओं की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। आत्मनिर्भरता की ओर कदम प्रशासन का लक्ष्य नालंदा को कृषि यंत्रों के उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है। स्थानीय स्तर पर डिजाइनिंग और प्रोडक्शन शुरू होने से न केवल लुधियाना-जालंधर पर निर्भरता खत्म होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। नालंदा जिले का नूरसराय अब पंजाब के लुधियाना-जालंधर की तरह कृषि यंत्रों के एक बड़े ‘प्रोडक्शन हब’ के रूप में अपनी पहचान बनाने को तैयार है। जिला प्रशासन की अनूठी पहल के बाद अब आधुनिक खेती की भारी मशीनों के डिजाइन के लिए स्थानीय निर्माताओं को दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना होगा। चंडी इंजीनियरिंग कॉलेज और जिले के पांच आईटीआई के युवा इंजीनियर अपने अद्यतन सॉफ्टवेयर और नई सोच से इन मशीनों की डिजाइन तैयार करेंगे। इंजीनियरों और निर्माताओं के बीच हुआ करार जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि नूरसराय में पहले से ही बेहतरीन कृषि यंत्र बनाए जा रहे हैं, लेकिन डिजाइनिंग के स्तर पर कुछ तकनीकी कमियां थीं। इसके समाधान के लिए प्रशासन ने चंडी इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों और आईटीआई के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का समन्वय स्थानीय निर्माताओं के साथ कराया है। अब जो जटिल तकनीकी काम पहले बाहरी राज्यों में होता था, उसे जिले के ही युवा इंजीनियर अंजाम दे रहे हैं। इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि स्थानीय प्रतिभाओं को भी बड़ा मंच मिलेगा। नूरसराय में बन रही ‘ट्री ट्रांसप्लांटर’ जैसी भारी मशीनें नूरसराय की निर्माण इकाइयों में अब सामान्य उपकरणों के अलावा ‘ट्री ट्रांसप्लांटर’ (पेड़ों को जड़ समेत विस्थापित करने वाली मशीन) और ‘स्ट्रॉ रीपर’ जैसी भारी मशीनों का निर्माण शुरू हो गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान इन आधुनिक उपकरणों का शानदार प्रदर्शन किया गया, जिसे विशेषज्ञों ने काफी सराहा है। जीविका दीदियों के हाथ में होगी कस्टम हायरिंग सेंटर की कमान कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत नूरसराय के ‘विशाल जीविका विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड’ को कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए समिति को 2 लाख 91 हजार रुपये का चेक भी प्रदान किया है। इस केंद्र के माध्यम से किसानों को कम किराए पर आधुनिक मशीनें उपलब्ध होंगी। जिलाधिकारी के अनुसार, इस पहल का दोहरा लाभ होगा। एक तरफ किसानों की लागत घटेगी, वहीं दूसरी ओर जीविका से जुड़ी महिलाओं की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। आत्मनिर्भरता की ओर कदम प्रशासन का लक्ष्य नालंदा को कृषि यंत्रों के उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है। स्थानीय स्तर पर डिजाइनिंग और प्रोडक्शन शुरू होने से न केवल लुधियाना-जालंधर पर निर्भरता खत्म होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।  

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