बगहा-दो प्रखंड की देवरिया तरुअनवा पंचायत अंतर्गत भेलाही गांव में आयोजित श्री श्री 108 श्री शिव महाशक्ति रुद्र महायज्ञ के तहत धार्मिक वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा है। महायज्ञ के सप्तमी दिवस में श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दूर-दराज के गांवों से भी लोग यज्ञ स्थल पर पहुंचकर पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता रंजीत ठेकेदार ने की, जबकि संचालन बीडीसी प्रतिनिधि चितरंजन महतो और कोषाध्यक्ष अजय कुमार ठेकेदार ने संयुक्त रूप से किया। महायज्ञ के अवसर पर अयोध्या धाम से पधारी कथा वाचिका नारायणी तिवारी ने श्री रामकथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब भगवान स्वयं अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। भगवान श्री राम का अवतरण भी इसी उद्देश्य से हुआ था। सप्तम दिवस की कथा में राम नवमी के पावन अवसर पर भगवान श्री राम के जन्मोत्सव का विशेष वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा वाचिका ने महाराज दशरथ की प्रतीक्षा और उनके तप का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्ची भक्ति और धैर्य का फल अवश्य मिलता है। उन्होंने यह भी बताया कि जीवन में यदि कुछ मांगना हो, तो भगवान से भौतिक वस्तुएं नहीं बल्कि स्वयं भगवान को ही मांगना चाहिए, जिससे जीवन सार्थक हो जाता है। कार्यक्रम के दौरान अयोध्या से आए रामलीला कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी जीवंत झांकियों और अभिनय ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। बगहा-दो प्रखंड की देवरिया तरुअनवा पंचायत अंतर्गत भेलाही गांव में आयोजित श्री श्री 108 श्री शिव महाशक्ति रुद्र महायज्ञ के तहत धार्मिक वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा है। महायज्ञ के सप्तमी दिवस में श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दूर-दराज के गांवों से भी लोग यज्ञ स्थल पर पहुंचकर पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता रंजीत ठेकेदार ने की, जबकि संचालन बीडीसी प्रतिनिधि चितरंजन महतो और कोषाध्यक्ष अजय कुमार ठेकेदार ने संयुक्त रूप से किया। महायज्ञ के अवसर पर अयोध्या धाम से पधारी कथा वाचिका नारायणी तिवारी ने श्री रामकथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब भगवान स्वयं अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। भगवान श्री राम का अवतरण भी इसी उद्देश्य से हुआ था। सप्तम दिवस की कथा में राम नवमी के पावन अवसर पर भगवान श्री राम के जन्मोत्सव का विशेष वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा वाचिका ने महाराज दशरथ की प्रतीक्षा और उनके तप का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्ची भक्ति और धैर्य का फल अवश्य मिलता है। उन्होंने यह भी बताया कि जीवन में यदि कुछ मांगना हो, तो भगवान से भौतिक वस्तुएं नहीं बल्कि स्वयं भगवान को ही मांगना चाहिए, जिससे जीवन सार्थक हो जाता है। कार्यक्रम के दौरान अयोध्या से आए रामलीला कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी जीवंत झांकियों और अभिनय ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।


