‘सीमा से 10 km के अंदर जितने भी अवैध अतिक्रमण हैं, वे सारे सबसे पहले अभियान चलाकर दूर किए जाएंगे। घुसपैठिए को चिह्नित कर भारत से बाहर भेजने का कार्यक्रम यहां से शुरू करेंगे।’ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 26 फरवरी 2026 को अररिया के सिकटी में यह ऐलान किया था। इसके एक महीने बाद एक्शन दिखने लगा है। देखिए 3 तस्वीर… किशनगंज के दिघलबैंक प्रखंड में भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस दौरान नो मेंस लैंड को अतिक्रमण मुक्त किया गया। बॉर्डर से सटे 500 मीटर दूरी पर स्थित 20 मकानों को तोड़ दिया गया। इसमें रहने वालों को दूसरी जगह भेजा गया है। बिहार-नेपाल सीमा पर अतिक्रमण की क्या स्थिति है? प्रशासन द्वारा इसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है? सीमा से लगे इलाकों की क्या हालत है? पढ़िए रिपोर्ट..। बिहार नेपाल सीमा पर अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन ने क्या किया? किशनगंज के दिघलबैंक प्रखंड में भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। बॉर्डर से 500 मीटर दूरी तक स्थित 20 मकानों को तोड़ दिया गया। पक्के मकानों को गिराने के लिए बुलडोजर इस्तेमाल किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों और SSB की संयुक्त जांच में सीमा से सटे छह स्थानों पर अवैध कब्जा पाया गया। पता चला कि 20 परिवारों ने घर बनाकर रहना शुरू कर दिया था। इन्हें हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। ये लोग लंबे समय से सरकारी जमीन पर रह रहे थे। कुछ ने तो पक्के मकान बना लिए थे। यह भी सामने आया कि नो मेंस लैंड के कुछ हिस्सों में लोगों ने खेती शुरू कर दी है। चाय के बागान लगा दिए हैं। 25 साल से बॉर्डर पर रह रहा था, सरकार ने दी जमीन अतिक्रमण विरोधी अभियान में दिघलबैंक के आजम के घर को भी तोड़ा गया है। हमने उनसे बात की। आजम ने कहा, ‘मैं और मेरे परिवार के लोग बॉर्डर पर 25 साल से रह रहे थे। मेरे घर को तोड़कर हटा दिया गया। सरकार से रहने के लिए 4 कट्ठा जमीन मिली है। बंदोबस्त के लिए पैसे मिले हैं।’ वहीं, दिघलबैंक के इशराउल हक ने बताया, ‘मेरा घर दिघलबैंक में बॉर्डर के पास था। वहीं, मेरा जन्म हुआ। पुलिस-प्रशासन की टीम आई। घर तोड़ दिया गया। अधिकारी बोल रहे थे कि सरकारी जमीन पर है। चाय बागान भी सरकारी जमीन पर है।’ सीमा से 15 km दूर तक हटेगा अतिक्रमण अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर हमने किशनगंज के डीएम विशाल राज से बात की। उन्होंने कहा कि पहले जांच के बाद 6 जगहों पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई थी। इन्हें अतिक्रमण मुक्त किया गया है। 6 जगहों पर अतिक्रमण चिह्नित किया गया था। यहां कार्रवाई हुई है। सीमा से 15 किलोमीटर दूर तक सरकारी जमीन पर जो भी अतिक्रमण मिलेगा उसे हटाया जाएगा।- विशाल राज, डीएम किशनगंज अमित शाह ने कहा था- घुसपैठिए देश की सुरक्षा के लिए खतरा 26 फरवरी 2026 को अररिया के सिकटी में गृह मंत्री ने भाषण देते हुए घुसपैठियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। उन्होंने सीमा से 10 किलोमीटर दूर तक अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाने की घोषणा की थी। गृह मंत्री ने कहा था, ‘घुसपैठिए सिर्फ हमारे चुनाव को प्रभावित नहीं करते। गरीबों के राशन में भी वो हिस्सा ले जाते हैं। युवाओं के रोजगार की संभावनाओं को कम करते हैं। देश की सुरक्षा के लिए भी ये घुसपैठिए बहुत बड़ी चुनौती हैं। अब समय आ गया है कि देश को घुसपैठियों से मुक्त कराने का अभियान चलाया जाए।’ उन्होंने कहा, ‘सीमा से 10 km के अंदर जितने भी अवैध अतिक्रमण हैं वो सारे के सारे अभियान चलाकर दूर किए जाएंगे। घुसपैठियों को चिह्नित कर भारत के बाहर भेजने का कार्यक्रम भी हम यहां से शुरू करेंगे।’ अब जानिए किशनगंज में सीमा के पास के इलाके की हालत गृह मंत्री के इस बयान के बाद जमीनी स्थिति जानने के लिए दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम किशनगंज जिला के सीमा के पास के इलाके में पहुंची। किशनगंज में नेपाल से करीब 114 km लंबी सीमा है। यहां से बांग्लादेश बॉर्डर सिर्फ 22 किमी दूर है। इलाका राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यह चिकन नेक क्षेत्र में आता है। टीम सबसे पहले काकरोदा स्थित बीओपी पहुंची। यहां बॉर्डर से महज 200 मीटर की दूरी पर पंडित बस्ती नामक इलाका है। ग्रामीणों के अनुसार सीमा से सटी इस बस्ती में मुख्य रूप से एक समुदाय के लोग बसे हुए हैं। हमने देखा कि सीमा पर लोगों ने घर बना रखे हैं। सुरक्षा बलों के जवान लगातार गश्त कर रहे हैं। कई घर बॉर्डर से 100-200 मीटर के अंदर बने हैं। इसके बाद टीम नेपाल बॉर्डर की ओर बढ़ी। यहां भी बॉर्डर से सटे कई घर मिले। लोग खुलेआम रह रहे हैं। नेपाल बॉर्डर खुला होने के कारण आना-जाना अपेक्षाकृत आसान है। कई घर बॉर्डर पिलर से महज कुछ फीट दूर बने हैं। सीमांचल में घुसपैठियों के खिलाफ एक्शन प्लान तैयार गृह मंत्री के दौरे के बाद सीमांचल में घुसपैठियों के खिलाफ एक्शन प्लान तैयार हो रहा है। आने वाले दिनों में अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज होने की उम्मीद है। किशनगंज जैसे जिलों में आधार केंद्रों की जांच तेज होगी। इस इलाके में बसे घुसपैठियों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत की नागरिकता हासिल करने के आरोप लगे हैं। स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं (जैसे वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम) को मजबूत करने पर जोर है ताकि बॉर्डर गांवों में लोगों का पलायन रुके और सुरक्षा बढ़े। भूमिहीन हैं सीमा के पास बसे लोग भारत नेपाल सीमा स्थित फतेहपुर में रहने वाले तुलेश कुमार सिंह ने बताया, ‘यहां रहने वाले ज्यादातर लोग भूमिहीन हैं। उनके पास अपनी जमीन नहीं है। अगर जमीन मिले तो लोग सरकारी जमीन छोड़ देंगे।’ तुलेश सिंह ने कहा, ‘बॉर्डर के पास जो लोग बसे हैं उनके पास या तो जमीन नहीं है, या बहुत कम है। सरकार जमीन देती है तो हमलोग आराम से दूसरी जगह चले जाएंगे।’ स्थानीय निवासी गंगा प्रसाद ने कहा, ‘जिन लोगों के पास जमीन नहीं है उन्हें सरकार जमीन दे तब उनके घर हटाए। इससे किसी को दिक्कत नहीं होगी।’ ‘सीमा से 10 km के अंदर जितने भी अवैध अतिक्रमण हैं, वे सारे सबसे पहले अभियान चलाकर दूर किए जाएंगे। घुसपैठिए को चिह्नित कर भारत से बाहर भेजने का कार्यक्रम यहां से शुरू करेंगे।’ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 26 फरवरी 2026 को अररिया के सिकटी में यह ऐलान किया था। इसके एक महीने बाद एक्शन दिखने लगा है। देखिए 3 तस्वीर… किशनगंज के दिघलबैंक प्रखंड में भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस दौरान नो मेंस लैंड को अतिक्रमण मुक्त किया गया। बॉर्डर से सटे 500 मीटर दूरी पर स्थित 20 मकानों को तोड़ दिया गया। इसमें रहने वालों को दूसरी जगह भेजा गया है। बिहार-नेपाल सीमा पर अतिक्रमण की क्या स्थिति है? प्रशासन द्वारा इसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है? सीमा से लगे इलाकों की क्या हालत है? पढ़िए रिपोर्ट..। बिहार नेपाल सीमा पर अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन ने क्या किया? किशनगंज के दिघलबैंक प्रखंड में भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। बॉर्डर से 500 मीटर दूरी तक स्थित 20 मकानों को तोड़ दिया गया। पक्के मकानों को गिराने के लिए बुलडोजर इस्तेमाल किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों और SSB की संयुक्त जांच में सीमा से सटे छह स्थानों पर अवैध कब्जा पाया गया। पता चला कि 20 परिवारों ने घर बनाकर रहना शुरू कर दिया था। इन्हें हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। ये लोग लंबे समय से सरकारी जमीन पर रह रहे थे। कुछ ने तो पक्के मकान बना लिए थे। यह भी सामने आया कि नो मेंस लैंड के कुछ हिस्सों में लोगों ने खेती शुरू कर दी है। चाय के बागान लगा दिए हैं। 25 साल से बॉर्डर पर रह रहा था, सरकार ने दी जमीन अतिक्रमण विरोधी अभियान में दिघलबैंक के आजम के घर को भी तोड़ा गया है। हमने उनसे बात की। आजम ने कहा, ‘मैं और मेरे परिवार के लोग बॉर्डर पर 25 साल से रह रहे थे। मेरे घर को तोड़कर हटा दिया गया। सरकार से रहने के लिए 4 कट्ठा जमीन मिली है। बंदोबस्त के लिए पैसे मिले हैं।’ वहीं, दिघलबैंक के इशराउल हक ने बताया, ‘मेरा घर दिघलबैंक में बॉर्डर के पास था। वहीं, मेरा जन्म हुआ। पुलिस-प्रशासन की टीम आई। घर तोड़ दिया गया। अधिकारी बोल रहे थे कि सरकारी जमीन पर है। चाय बागान भी सरकारी जमीन पर है।’ सीमा से 15 km दूर तक हटेगा अतिक्रमण अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर हमने किशनगंज के डीएम विशाल राज से बात की। उन्होंने कहा कि पहले जांच के बाद 6 जगहों पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई थी। इन्हें अतिक्रमण मुक्त किया गया है। 6 जगहों पर अतिक्रमण चिह्नित किया गया था। यहां कार्रवाई हुई है। सीमा से 15 किलोमीटर दूर तक सरकारी जमीन पर जो भी अतिक्रमण मिलेगा उसे हटाया जाएगा।- विशाल राज, डीएम किशनगंज अमित शाह ने कहा था- घुसपैठिए देश की सुरक्षा के लिए खतरा 26 फरवरी 2026 को अररिया के सिकटी में गृह मंत्री ने भाषण देते हुए घुसपैठियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। उन्होंने सीमा से 10 किलोमीटर दूर तक अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाने की घोषणा की थी। गृह मंत्री ने कहा था, ‘घुसपैठिए सिर्फ हमारे चुनाव को प्रभावित नहीं करते। गरीबों के राशन में भी वो हिस्सा ले जाते हैं। युवाओं के रोजगार की संभावनाओं को कम करते हैं। देश की सुरक्षा के लिए भी ये घुसपैठिए बहुत बड़ी चुनौती हैं। अब समय आ गया है कि देश को घुसपैठियों से मुक्त कराने का अभियान चलाया जाए।’ उन्होंने कहा, ‘सीमा से 10 km के अंदर जितने भी अवैध अतिक्रमण हैं वो सारे के सारे अभियान चलाकर दूर किए जाएंगे। घुसपैठियों को चिह्नित कर भारत के बाहर भेजने का कार्यक्रम भी हम यहां से शुरू करेंगे।’ अब जानिए किशनगंज में सीमा के पास के इलाके की हालत गृह मंत्री के इस बयान के बाद जमीनी स्थिति जानने के लिए दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम किशनगंज जिला के सीमा के पास के इलाके में पहुंची। किशनगंज में नेपाल से करीब 114 km लंबी सीमा है। यहां से बांग्लादेश बॉर्डर सिर्फ 22 किमी दूर है। इलाका राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यह चिकन नेक क्षेत्र में आता है। टीम सबसे पहले काकरोदा स्थित बीओपी पहुंची। यहां बॉर्डर से महज 200 मीटर की दूरी पर पंडित बस्ती नामक इलाका है। ग्रामीणों के अनुसार सीमा से सटी इस बस्ती में मुख्य रूप से एक समुदाय के लोग बसे हुए हैं। हमने देखा कि सीमा पर लोगों ने घर बना रखे हैं। सुरक्षा बलों के जवान लगातार गश्त कर रहे हैं। कई घर बॉर्डर से 100-200 मीटर के अंदर बने हैं। इसके बाद टीम नेपाल बॉर्डर की ओर बढ़ी। यहां भी बॉर्डर से सटे कई घर मिले। लोग खुलेआम रह रहे हैं। नेपाल बॉर्डर खुला होने के कारण आना-जाना अपेक्षाकृत आसान है। कई घर बॉर्डर पिलर से महज कुछ फीट दूर बने हैं। सीमांचल में घुसपैठियों के खिलाफ एक्शन प्लान तैयार गृह मंत्री के दौरे के बाद सीमांचल में घुसपैठियों के खिलाफ एक्शन प्लान तैयार हो रहा है। आने वाले दिनों में अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज होने की उम्मीद है। किशनगंज जैसे जिलों में आधार केंद्रों की जांच तेज होगी। इस इलाके में बसे घुसपैठियों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत की नागरिकता हासिल करने के आरोप लगे हैं। स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं (जैसे वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम) को मजबूत करने पर जोर है ताकि बॉर्डर गांवों में लोगों का पलायन रुके और सुरक्षा बढ़े। भूमिहीन हैं सीमा के पास बसे लोग भारत नेपाल सीमा स्थित फतेहपुर में रहने वाले तुलेश कुमार सिंह ने बताया, ‘यहां रहने वाले ज्यादातर लोग भूमिहीन हैं। उनके पास अपनी जमीन नहीं है। अगर जमीन मिले तो लोग सरकारी जमीन छोड़ देंगे।’ तुलेश सिंह ने कहा, ‘बॉर्डर के पास जो लोग बसे हैं उनके पास या तो जमीन नहीं है, या बहुत कम है। सरकार जमीन देती है तो हमलोग आराम से दूसरी जगह चले जाएंगे।’ स्थानीय निवासी गंगा प्रसाद ने कहा, ‘जिन लोगों के पास जमीन नहीं है उन्हें सरकार जमीन दे तब उनके घर हटाए। इससे किसी को दिक्कत नहीं होगी।’


