मां बागेश्वरी सिद्धपीठ में काशी की तर्ज पर हुई आरती

मां बागेश्वरी सिद्धपीठ में काशी की तर्ज पर हुई आरती

चैती नवरात्र के पावन अवसर पर मां बागेश्वरी सिद्धपीठ मंदिर परिसर में महाअष्टमी के मौके पर भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मंदिर समिति द्वारा काशी की प्रसिद्ध गंगा आरती की तर्ज पर मां बागेश्वरी की भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने मां बागेश्वरी से क्षेत्र की सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए मंगल कामना की। देर रात तक पूरा मंदिर परिसर भक्ति और अटूट आस्था का केंद्र बना रहा। बनारस से आए पुरोहित आचार्य दिवाकर एवं विकास पंडित ने पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इस महाआरती को संपन्न कराया। इस विशेष अनुष्ठान में यज्ञाधीश एवं संचालक राम नाथ पांडे की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनके मार्गदर्शन में काशी की आध्यात्मिक शैली में आरती संपन्न हुई। जैसे ही मंत्रोच्चार के बीच आरती की विशाल लौ प्रज्वलित हुई, पूरा परिसर ””जय माता दी”” के जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालुओं को घर बैठे काशी की दिव्यता की अनुभूति हुई। महाआरती के पश्चात मंदिर प्रांगण में डांडिया कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अनुशासन बनाए रखने हेतु महिला-पुरुष जोड़ों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई थी। दर्जनों जोड़ों ने पारंपरिक भजनों और भक्ति गीतों की धुन पर डांडिया नृत्य कर उत्सव की शोभा बढ़ाई। खासकर महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन में चार चांद लगा दिए। पूजा कमेटी के अध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि इस भव्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य जगत कल्याण और गंगा माता की अविरलता हेतु प्रार्थना करना है। ऐसे धार्मिक कार्यक्रम समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाने के साथ-साथ आपसी एकता और भाईचारे को भी मजबूत करते हैं।कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष सहित निगरानी कमेटी के सदस्यों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई। चैती नवरात्र के पावन अवसर पर मां बागेश्वरी सिद्धपीठ मंदिर परिसर में महाअष्टमी के मौके पर भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मंदिर समिति द्वारा काशी की प्रसिद्ध गंगा आरती की तर्ज पर मां बागेश्वरी की भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने मां बागेश्वरी से क्षेत्र की सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए मंगल कामना की। देर रात तक पूरा मंदिर परिसर भक्ति और अटूट आस्था का केंद्र बना रहा। बनारस से आए पुरोहित आचार्य दिवाकर एवं विकास पंडित ने पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इस महाआरती को संपन्न कराया। इस विशेष अनुष्ठान में यज्ञाधीश एवं संचालक राम नाथ पांडे की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनके मार्गदर्शन में काशी की आध्यात्मिक शैली में आरती संपन्न हुई। जैसे ही मंत्रोच्चार के बीच आरती की विशाल लौ प्रज्वलित हुई, पूरा परिसर ””जय माता दी”” के जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालुओं को घर बैठे काशी की दिव्यता की अनुभूति हुई। महाआरती के पश्चात मंदिर प्रांगण में डांडिया कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अनुशासन बनाए रखने हेतु महिला-पुरुष जोड़ों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई थी। दर्जनों जोड़ों ने पारंपरिक भजनों और भक्ति गीतों की धुन पर डांडिया नृत्य कर उत्सव की शोभा बढ़ाई। खासकर महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने आयोजन में चार चांद लगा दिए। पूजा कमेटी के अध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि इस भव्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य जगत कल्याण और गंगा माता की अविरलता हेतु प्रार्थना करना है। ऐसे धार्मिक कार्यक्रम समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाने के साथ-साथ आपसी एकता और भाईचारे को भी मजबूत करते हैं।कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष सहित निगरानी कमेटी के सदस्यों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई।  

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