लखनऊ में विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर ‘अभिव्यक्ति कल्चरल एंड वेल्फेयर सोसाइटी’ की ओर से ‘सावधान सीवर खुला है’ नाटक का मंचन किया गया। अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में आयोजित इस नाटक ने देश की गंभीर सीवर समस्याओं को उजागर किया और दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। नाटक में देश के विभिन्न शहरों में ओवरफ्लो होती सीवर व्यवस्था, गंदगी के फैलाव, बीमारियों और मैन्युअल सफाई के दौरान होने वाली मौतों जैसी गंभीर समस्याओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने दर्शाया कि यह समस्या किसी एक शहर तक सीमित न होकर पूरे देश की वास्तविकता बन चुकी है। 26 लोगों की मौत हो गई थी नाटक के लेखक एवं निर्देशक, सुप्रसिद्ध रंगकर्मी के.के. अग्रवाल ने बताया कि हाल ही में 26 जनवरी को इंदौर में सीवर का दूषित पानी पीने के पानी में मिलने से 26 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग बीमार पड़े थे। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं देश के कई शहरों में आम हो चुकी हैं, जिसका समाधान भ्रष्टाचार और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण नहीं हो पा रहा है। कलाकारों ने अभिनय से दर्शकों को आकर्षित किया नाटक में एन.एन. परेशान (भानु प्रकाश पाण्डेय), सदाशिव निश्चिंत (के.के. अग्रवाल), चीख चिल्लानी (अलका कुदेसिया), प्रजातंत्र (अजय भटनागर), नाकाम सहाय (माधव सक्सेना), तड़के जी (देव शर्मा), बेकल बेकार (राज मानकानी) और हरदम भिड़े (राजीव त्रिपाठी) जैसे कलाकारों ने अपनी सशक्त भूमिकाओं से दर्शकों की सराहना बटोरी। जर्जर सीवर नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए खतरा मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. वेंकटेश दत्ता ने इस अवसर पर कहा कि जर्जर सीवर व्यवस्था न केवल शहरों के नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि नदियों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने बताया कि ट्रीटमेंट प्लांट के खराब होने से गंदा पानी सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है, जिससे जलीय जीवों का अस्तित्व भी संकट में है।कार्यक्रम के अंत में ‘अभिव्यक्ति’ संस्था के उपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने सभी को विश्व रंगमंच दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने दोहराया कि संस्था समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को नाटक के माध्यम से उठाती रहेगी।


