जोधपुर शहर में आस्था, परंपरा और शाही वैभव का अनूठा संगम देखने को मिला। एक ओर जहां भीतरी शहर में विभिन्न समितियों द्वारा शुक्रवार को देर रात तक भव्य भोळावणी मेले का आयोजन किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर मेहरानगढ़ दुर्ग से राज गणगौर की सवारी शाही लवाजमे के साथ पूरे शहर के आकर्षण का केंद्र बनी रही। इसमें युवा पुरुष 16 श्रृंगार कर और भारी स्वर्णाभूषण धारण कर गवर माता का स्वरूप बने। मान्यता है कि सात दिन तक पीहर (मायके) में रहने के बाद गवर माता को जल पिलाकर ससुराल के लिए विदा किया जाता है। इसी विदाई की परंपरा को भोळावणी कहा जाता है। इस ऐतिहासिक आयोजन की झलक पाने के लिए शहरवासियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इससे रास्तों पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया।
महारानी ने की पूजा, 6 बजे रवाना हुई सवारी महरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के पीआरओ राजेंद्रसिंह लीलिया ने बताया- किले के नागणेच्या माता मंदिर प्रांगण में शुक्रवार शाम महारानी हेमलता राज्ये द्वारा राज गणगौर की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद पूर्व राजपरिवार की महिलाओं ने परिक्रमा कर पूजा में भाग लिया। राजदानाध्यक्ष ललित कुमार त्रिवेदी, अश्विनी त्रिवेदी, घनश्याम त्रिवेदी, राजवेदिया अश्विनी कुमार दवे, भगवानसिंह राजपुरोहित और सुरेश व्यास ने परंपरागत रूप से श्री गणगौर माताजी की पूजा संपन्न करवाई। घूमर नृत्य और पारंपरिक गणगौर गीतों के गायन के बीच ठीक शाम 6 बजे राज गणगौर की सवारी बाड़ी के महलों से ढोल-नगाड़ों के साथ नीचे उतरीं। इस दौरान महारानी की गणगौर बाड़ी के महलों में ही विराजमान रही। चोकेलाव महल से जुलूस में शामिल हुए पूर्व नरेश नागणेच्चा मंदिर से पूरबियों की वेशभूषा में सफेद जामा, केसरिया पगड़ी और कमरबंद बांधे पालकी वाहक खासे को अपने कंधे पर उठाकर रवाना हुए। भव्य जुलूस के आगे पूर्व राज परिवार के मारवाड़ स्टेट के ‘राज सूरज’ नामक घोड़े पर मारवाड़ का ऐतिहासिक पचरंगा निशान फहराया जा गया। जुलूस के अंत में सूतरी नगाड़ा व नोबत चल रहे थे। सोने-चांदी की छड़ियां लिए छड़ीबरदार और शाही निशान के साथ यह सवारी सूरजपोल, लोहापोल और इमरती पोल होते हुए राव जोधा के फलसे से चोकेलाव महल पहुंची। यहां से पूर्व नरेश गजसिंह इस जुलूस में शरीक हुए। पूर्व नरेश गजसिंह ने किले के फतेहपोल के बाहर स्थित गणेश जी की मूर्ति की विधिवत पूजा की। यहां राज गणगौर की सवारी पर जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई। इसके बाद रानीसर पहुंचकर पूर्व नरेश द्वारा राज गणगौर का विधिवत पूजन व जल अर्पण कर भोळावणी की रस्म अदायगी की गई। भीतरी शहर के मेले में 16 श्रृंगार कर गवर माता बने पुरुष राज गणगौर की सवारी के अलावा, शहर के आडा बाजार और कुम्हारियां कुआं क्षेत्र में भीतरी शहर के भोळावणी मेले की भी धूम नजर आ रही है। कुम्हारियां कुआं गणगौर कमेटी के अध्यक्ष अमित फोफलिया, सचिव सूर्यांश मुथा और कोषाध्यक्ष हिमांशु मुथा ने बताया कि मेले में भगवान महाकाल और श्रीनाथजी की पैदल झांकियों सहित कुल 11 आकर्षक झांकियां शामिल की गई। फगड़ा घुड़ला कमेटी और खांडा फलसा समिति के पदाधिकारियों के अनुसार- इस मेले की सबसे अनूठी और प्राचीन परंपरा के तहत युवा पुरुष 16 श्रृंगार कर और भारी स्वर्णाभूषण धारण कर गवर माता का स्वरूप बनते हैं। ये स्वर्णाभूषण पहनकर गवर माता का मनमोहक रूप धरे हैं। शोभायात्रा में झांकियों के माध्यम से समाज में व्याप्त कुप्रथाओं के दुष्परिणामों को दर्शाते हुए नारी शक्ति को गलत संगति से बचने का कड़ा संदेश भी दिया जाता है। जालोरी गेट से शुरू होने वाली यह भव्य शोभायात्रा आडा बाजार होते हुए आधी रात के बाद घंटाघर पहुंचेगी, जहां गवर माता को जल अर्पण के साथ ईसर जी के मनाने की परंपरा का निर्वहन करते हुए मेले का समापन होगा।


