कुशीनगर में जिला प्रशासन ने एक डीजल विक्रय केंद्र का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई जनपद में डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी रोकने के लिए चलाए जा रहे विशेष जांच अभियान के तहत की गई है।
जिलाधिकारी कार्यालय के निर्देश पर 26 मार्च 2026 को एक प्रशासनिक टीम ने विक्रय केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण किया। भौतिक सत्यापन के दौरान स्टॉक रिकॉर्ड और वास्तविक भंडारण में भारी अंतर सामने आया।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, स्टॉक रजिस्टर में 5 मार्च 2026 को 8000 लीटर पेट्रोल और 4000 लीटर डीजल की आपूर्ति दर्ज थी। इसके बाद कोई नई एंट्री नहीं की गई थी। हालांकि, मौके पर पेट्रोल टैंक (क्षमता 16 हजार लीटर) में केवल 1913 लीटर और डीजल टैंक (क्षमता 30 हजार लीटर) में मात्र 1859 लीटर ईंधन ही पाया गया।
अधिकारियों ने इस गंभीर विसंगति पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की। केंद्र प्रबंधक ने बताया कि कंपनी द्वारा पहले क्रेडिट पर ईंधन दिया जाता था, लेकिन अब यह सुविधा बंद हो गई है, जिससे नई आपूर्ति नहीं हो पा रही है। प्रशासन ने इस स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए इसे नियमों का उल्लंघन करार दिया।
निरीक्षण के समय केंद्र संचालक भी मौके पर मौजूद थे और उन्होंने जांच रिपोर्ट से सहमति व्यक्त की। जांच में यह भी सामने आया कि ईंधन के भंडारण, रखरखाव और वितरण के निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। इससे उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही थी और क्षेत्र में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। इन गंभीर अनियमितताओं के मद्देनजर, प्रशासन ने लाइसेंसी अशोक कुमार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके डीजल विक्रय लाइसेंस संख्या 177/2022 को निलंबित कर दिया है। उन्हें एक सप्ताह के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो लाइसेंस निरस्तीकरण सहित कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य पेट्रोल पंप संचालकों में भी हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच अभियान आगे और तेज किया जाएगा। साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि कहीं भी कालाबाजारी, जमाखोरी या कृत्रिम संकट की जानकारी मिलने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।


