मुजफ्फरपुर में गायघाट के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह समेत पूरी छापेमारी टीम को आज निलंबित कर दिया गया है। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने यह कार्रवाई ग्रामीण एसपी राजेश कुमार की जांच रिपोर्ट के आधार पर की। बता दें कि थानाध्यक्ष की गोली से ग्रामीण की मौत हुई थी। कल तेजस्वी यादव ने मृतक के परिजनों से मुलाकात की थी। इन्होंने कहा था कि पुलिस बेलगाम है। जगतवीर राय को न्याय दिलाने के लिए मानवाधिकार आयोग में भी मांग करूंगा। सरकार से मैं मांग करता हूं कि जल्द से जल्द अविलंब आरोपी की गिरफ्तारी करें, नहीं तो पूरा मुजफ्फरपुर जिला बंद रहेगा। मैं कमजोर नहीं हूं। यदि किसी को लगता है कि हम कमजोर हैं, तो भूल जाएं, हमें सीटें भले कम मिली है। लेकिन हमें वोट का प्रतिशत अधिक है, जनता हमारे साथ है। टीम पर कर्तव्य में लापरवाही और विवेकपूर्ण निर्णय नहीं लेने का आरोप है। मामला 17 मार्च 2026 की रात गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनिया गांव का है। पुलिस टीम यहां छापेमारी करने गई थी। इस दौरान बदमाशों ने शोर मचाकर ग्रामीणों को इकट्ठा कर लिया। भीड़ ने पुलिस बल पर पथराव किया और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। फायरिंग भी की गई थी। भीड़ के बीच घिरने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह ने अपनी जान बचाने के लिए हवाई फायरिंग की और किसी तरह वहां से निकल पाए। इस घटना में एक ग्रामीण जगतवीर राय की मौत हो गई थी। ग्रामीण एसपी की जांच रिपोर्ट में छापेमारी प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, थानाध्यक्ष राजा सिंह पर्याप्त पुलिस बल और बिना पहले की जानकारी के बिना ही संवेदनशील इलाके में छापेमारी करने चले गए थे। ग्रामीणों के विरोध को किया नजरअंदाज चोरनिया गांव में पहले भी तत्कालीन थानाध्यक्ष सरुण कुमार मंडल के साथ ग्रामीणों की ओर से विरोध की घटना हो चुकी थी, जिसे नजरअंदाज किया गया। छापेमारी दल ने संयमित और विवेकपूर्ण तरीके से कार्रवाई नहीं की, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई। स्थानीय चौकीदार प्रहलाद कुमार ने भी फरार बदमाश और ग्रामीणों के संभावित विरोध के बारे में टीम को पहले से आगाह नहीं किया था। इन पर गिरी गाज- 1. राजा सिंह (तत्कालीन थानाध्यक्ष, गायघाट)
2. मनीष कुमार (पु.अ.नि.)
3. रंजन कुमार (पी.टी.सी.)
4. चांदनी कुमारी (म.सि.)
5. ओम प्रकाश (चा.ह.)
6. प्रहलाद कुमार (स्थानीय चौकीदार) इसके अलावा, टीम में शामिल गृह रक्षकों (अपरजीत कुमार और मनिष कुमार) के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जिला पदाधिकारी को लेटर लिखा गया है। इस कार्रवाई से जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। जानिए क्या है पूरा मामला…. दरअसल, मामला मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट थाना क्षेत्र के बेरूआ पंचायत के चोरनिया गांव का है। गोली लगने से जगतवीर राय की मौत हुई थी। पुलिस की ओर से कहा गया है कि 17 मार्च को पुलिस पॉक्सो एक्ट के एक आरोपी को गिरफ्तार करने गांव पहुंची थी। आरोपी को पकड़ने के दौरान ग्रामीण उग्र हो गए थे और विरोध शुरू हो गया था। विवाद बढ़ते-बढ़ते हिंसक झड़प में बदल गया। पुलिस पर हमला हुआ तो जवानों ने बचाव में हवाई फायरिंग की। इसके बाद ग्रामीणों की ओर से भी गोलीबारी हुई। इसी दौरान जगवीर राय को गोली लग गई, जिससे उनकी मौत हो गई। थानाध्यक्ष पर सीने में गोली मारने का ओरोप है। बेटे का आरोप, थानाध्यक्ष ने सीने में मारी गोली वहीं, मृतक के बेटे अविनाश कुमार ने बताया, ‘पुलिस छापेमारी के दौरान पिता ने टीम को रोकने की कोशिश की, जिस पर थानाध्यक्ष ने सीधे उनके सीने में गोली मार दी। एक और गोली चलाई गई, जो भैंस को छूते हुए निकल गई। गोली लगने के बाद मौके पर ही पिता की मौत हो गई।’ मुजफ्फरपुर में गायघाट के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह समेत पूरी छापेमारी टीम को आज निलंबित कर दिया गया है। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने यह कार्रवाई ग्रामीण एसपी राजेश कुमार की जांच रिपोर्ट के आधार पर की। बता दें कि थानाध्यक्ष की गोली से ग्रामीण की मौत हुई थी। कल तेजस्वी यादव ने मृतक के परिजनों से मुलाकात की थी। इन्होंने कहा था कि पुलिस बेलगाम है। जगतवीर राय को न्याय दिलाने के लिए मानवाधिकार आयोग में भी मांग करूंगा। सरकार से मैं मांग करता हूं कि जल्द से जल्द अविलंब आरोपी की गिरफ्तारी करें, नहीं तो पूरा मुजफ्फरपुर जिला बंद रहेगा। मैं कमजोर नहीं हूं। यदि किसी को लगता है कि हम कमजोर हैं, तो भूल जाएं, हमें सीटें भले कम मिली है। लेकिन हमें वोट का प्रतिशत अधिक है, जनता हमारे साथ है। टीम पर कर्तव्य में लापरवाही और विवेकपूर्ण निर्णय नहीं लेने का आरोप है। मामला 17 मार्च 2026 की रात गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनिया गांव का है। पुलिस टीम यहां छापेमारी करने गई थी। इस दौरान बदमाशों ने शोर मचाकर ग्रामीणों को इकट्ठा कर लिया। भीड़ ने पुलिस बल पर पथराव किया और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। फायरिंग भी की गई थी। भीड़ के बीच घिरने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह ने अपनी जान बचाने के लिए हवाई फायरिंग की और किसी तरह वहां से निकल पाए। इस घटना में एक ग्रामीण जगतवीर राय की मौत हो गई थी। ग्रामीण एसपी की जांच रिपोर्ट में छापेमारी प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, थानाध्यक्ष राजा सिंह पर्याप्त पुलिस बल और बिना पहले की जानकारी के बिना ही संवेदनशील इलाके में छापेमारी करने चले गए थे। ग्रामीणों के विरोध को किया नजरअंदाज चोरनिया गांव में पहले भी तत्कालीन थानाध्यक्ष सरुण कुमार मंडल के साथ ग्रामीणों की ओर से विरोध की घटना हो चुकी थी, जिसे नजरअंदाज किया गया। छापेमारी दल ने संयमित और विवेकपूर्ण तरीके से कार्रवाई नहीं की, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई। स्थानीय चौकीदार प्रहलाद कुमार ने भी फरार बदमाश और ग्रामीणों के संभावित विरोध के बारे में टीम को पहले से आगाह नहीं किया था। इन पर गिरी गाज- 1. राजा सिंह (तत्कालीन थानाध्यक्ष, गायघाट)
2. मनीष कुमार (पु.अ.नि.)
3. रंजन कुमार (पी.टी.सी.)
4. चांदनी कुमारी (म.सि.)
5. ओम प्रकाश (चा.ह.)
6. प्रहलाद कुमार (स्थानीय चौकीदार) इसके अलावा, टीम में शामिल गृह रक्षकों (अपरजीत कुमार और मनिष कुमार) के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जिला पदाधिकारी को लेटर लिखा गया है। इस कार्रवाई से जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। जानिए क्या है पूरा मामला…. दरअसल, मामला मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट थाना क्षेत्र के बेरूआ पंचायत के चोरनिया गांव का है। गोली लगने से जगतवीर राय की मौत हुई थी। पुलिस की ओर से कहा गया है कि 17 मार्च को पुलिस पॉक्सो एक्ट के एक आरोपी को गिरफ्तार करने गांव पहुंची थी। आरोपी को पकड़ने के दौरान ग्रामीण उग्र हो गए थे और विरोध शुरू हो गया था। विवाद बढ़ते-बढ़ते हिंसक झड़प में बदल गया। पुलिस पर हमला हुआ तो जवानों ने बचाव में हवाई फायरिंग की। इसके बाद ग्रामीणों की ओर से भी गोलीबारी हुई। इसी दौरान जगवीर राय को गोली लग गई, जिससे उनकी मौत हो गई। थानाध्यक्ष पर सीने में गोली मारने का ओरोप है। बेटे का आरोप, थानाध्यक्ष ने सीने में मारी गोली वहीं, मृतक के बेटे अविनाश कुमार ने बताया, ‘पुलिस छापेमारी के दौरान पिता ने टीम को रोकने की कोशिश की, जिस पर थानाध्यक्ष ने सीधे उनके सीने में गोली मार दी। एक और गोली चलाई गई, जो भैंस को छूते हुए निकल गई। गोली लगने के बाद मौके पर ही पिता की मौत हो गई।’


