शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के भीतर अंदरूनी कलह की खबरें तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि राज्यसभा सीट को लेकर संजय राउत के दिए बयान पर प्रियंका चतुर्वेदी बेहद नाराज हैं। उन्होंने उद्धव ठाकरे के सामने अपनी नाराजगी जताई। रिपोर्ट्स के अनुसार, सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने शरद पवार के लिए राज्यसभा सीट छोड़ने के मुद्दे पर पार्टी की आंतरिक बैठक में खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की और बैठक छोड़कर चली गईं। हालांकि, संजय राउत ने इन खबरों को महज एक अफवाह करार दिया है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने क्या कहा?
मुंबई में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी सांसदों की अहम बैठक बुलाई थी। बैठक की शुरुआत में उन्होंने अपने सांसदों पर भरोसा जताते हुए कहा, “मुझे भाजपा और एनसीपी के लोग कहते हैं कि आपके सांसद टूटेंगे, लेकिन मुझे आप पर पूरा विश्वास है और वह इसी भरोसे पर यह राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे हैं।“
बैठक के दौरान राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की ओर से उनसे संपर्क कर राज्यसभा सीट को लेकर आग्रह किया गया था। इस पर उन्होंने साफ कहा था कि इस विषय पर एनसीपी (शरद पवार) से बात की जानी चाहिए और उनके कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति न की जाए।
इसी चर्चा के बीच प्रियंका चतुर्वेदी ने आपत्ति जताते हुए सवाल किया कि पार्टी के बड़े नेता संजय राउत ने शरद पवार का नाम राज्यसभा चुनाव के लिए क्यों लिया और इस पर सार्वजनिक बयान क्यों दिया। इस पर उद्धव ठाकरे ने जवाब देते हुए कहा कि पार्टी के मुखिया वह है, वही अंतिम निर्णय लेंगे और किसी के बयान से फर्क नहीं पड़ता।
संजय राउत ने कहा- मैं बालासाहेब के समय से पार्टी में हूं
हालांकि, इस पूरे विवाद पर संजय राउत ने अलग रुख अपनाया है। उन्होंने इन खबरों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि मैं उस बैठक में नहीं था, लेकिन ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं है और यह सिर्फ अफवाहें हैं। राउत ने यह भी कहा कि वह पार्टी के स्थापना के समय से जुड़े हुए हैं और बालासाहेब ठाकरे द्वारा नियुक्त नेताओं में शामिल रहे हैं।
राउत ने जोर देकर कहा, मैं उन लोगों में से एक हूं जिन्हें खुद बालासाहेब ठाकरे ने नेता नियुक्त किया था। उद्धव ठाकरे के साथ उनका किस तरह का रिश्ता है, यह सब जानते हैं। अगर पार्टी इस तरह की अफवाहों पर ध्यान देती, तो वह आज इतनी मजबूत नहीं हो पाती और आगे नहीं बढ़ पाती। लेकिन अंदरूनी मतभेद की खबरें निराधार हैं।
गौरतलब हो कि महाराष्ट्र में राज्यसभा की सात सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च को हुए। महाराष्ट्र विधानसभा में संख्या बल के आधार पर केवल एक उम्मीदवार कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार), शिवसेना (उद्धव ठाकरे) गठबंधन से जीत सकता था। इसलिए महाविकास आघाडी (MVA) से एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार को फिर से राज्यसभा के लिए नामित किया गया, जबकि शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी दोबारा राज्यसभा जाने की इच्छुक थी। क्योंकि शरद पवार के साथ ही उनका भी राज्यसभा का कार्यकाल अगले महीने अप्रैल में समाप्त हो रहा है।


