सिद्धार्थनगर में पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत देखने को मिली। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों तक ईंधन की कमी से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। कई पेट्रोल पंपों पर दोपहर 12 बजे के बाद ईंधन पूरी तरह खत्म हो गया, जिससे लोगों को घंटों लंबी कतारों में खड़े रहना पड़ा। सुबह से उमड़ी भीड़, दोपहर तक हालात बेकाबू
सुबह से ही पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़नी शुरू हो गई थी, जो दोपहर तक बेकाबू हो गई। बांसी स्टैंड स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप पर पूरे नगर के लोग जुट गए। यहां बाइक, कार और अन्य वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मधुकरपुर क्षेत्र के दोनों पेट्रोल पंपों पर दोपहर बाद ईंधन खत्म हो गया। बांसी स्टैंड के तीन में से दो पेट्रोल पंप पूरी तरह सूख गए, जबकि एक पंप पर सीमित मात्रा में ईंधन मिलने से भारी भीड़ उमड़ी रही। पकड़ी क्षेत्र के दोनों पेट्रोल पंपों पर भी पेट्रोल-डीजल समाप्त हो गया। डुमरियागंज से शोहरतगढ़ तक एक जैसी स्थिति
डुमरियागंज, इटवा, बांसी और शोहरतगढ़ समेत जिले के अधिकांश क्षेत्रों में हालात समान रहे। कुछ पंपों पर सीमित मात्रा में ईंधन उपलब्ध था, जहां लोग घंटों लाइन में अपनी बारी का इंतजार करते रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर रही। लोगों को कई किलोमीटर दूर तक पेट्रोल की तलाश में भटकना पड़ा। लोगों का गुस्सा फूटा, बोले- आधा दिन लाइन में निकल गया ईंधन संकट को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।
रामकुमार यादव ने कहा, “मैं सुबह 9 बजे से लाइन में लगा हूं, लेकिन दोपहर तक पेट्रोल नहीं मिला। कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है।” लोग बोले… मो. आरिफ बोले, “प्रशासन कह रहा है कि कमी नहीं है, लेकिन पंपों पर पेट्रोल ही नहीं है।” अनिल चौधरी ने कहा, “तीन-तीन घंटे लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है, यह आम आदमी के साथ अन्याय है।” सुरेश निषाद बोले, “हम मजदूर हैं, आधा दिन पेट्रोल के चक्कर में निकल गया।” सीमा सिंह ने बताया, “बच्चों को स्कूल छोड़ने और घर के कामों में दिक्कत हो रही है।” रवि शुक्ला बोले, “अगर कमी नहीं है तो पंप सूखे क्यों हैं?” कलीम अहमद ने कहा, “यह साफ तौर पर व्यवस्था की विफलता है।” भीड़ संभालने के लिए पुलिस तैनात
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा। कुछ जगहों पर भीड़ के कारण हल्की नोकझोंक भी हुई, जिसे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया। प्रशासन बोला- अफवाहों पर ध्यान न दें
प्रशासन लगातार दावा करता रहा कि जिले में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ जाएगी। हालांकि, सूत्रों के अनुसार 25 मार्च को जिले के करीब 80% पेट्रोल पंपों पर किसी न किसी समय ईंधन समाप्त हो गया था, जिससे आपूर्ति और वितरण व्यवस्था में खामियां उजागर हुईं। व्यापार और परिवहन सेवाएं भी प्रभावित
ईंधन संकट का असर व्यापार और परिवहन सेवाओं पर भी पड़ा। छोटे दुकानदार, वाहन चालक और दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। कई लोगों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कमी के कारण उनका पूरा दिन बेकार चला गया। बड़े सवाल छोड़ गया ईंधन संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बिगड़ने या समय पर आपूर्ति न पहुंचने से ऐसी स्थिति बनती है। अगर प्रशासन पहले से सतर्क रहता और पर्याप्त ईंधन उपलब्ध कराता, तो संकट से बचा जा सकता था। फिलहाल प्रशासन आपूर्ति बहाल करने के प्रयास में जुटा है, लेकिन यह घटना कई सवाल खड़े कर गई है—क्या भविष्य में भी लोगों को ऐसी परेशानी झेलनी पड़ेगी या इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे?


