गैस आपूर्ति में 6 माह की औसत खपत के 80% तक सीमित करने के फैसले के खिलाफ शहर के उद्योग जगत में तीखी नाराजगी देखने को मिली। नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स में आयोजित बैठक में उद्योगपतियों ने गेल गैस अधिकारियों के सामने इस निर्णय का खुलकर विरोध किया और इसे लघु उद्योगों के लिए नुकसानदायक बताया। बैठक की अध्यक्षता संजय गोयल ने की, जिसमें गेल गैस के मार्केटिंग डीजीएम मदन मोहन भी मौजूद रहे। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि गैस कटौती का आधार 6 माह की औसत खपत नहीं, बल्कि दैनिक अनुबंधित मात्रा होना चाहिए। उनका कहना था कि मौजूदा व्यवस्था अनुबंध की शर्तों के विपरीत है और इससे उद्योगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। गेल गैस प्रकोष्ठ के चेयरमैन मनोज कुमार बंसल ने बताया कि 65% विनियमन केवल आरएलएनजी आपूर्ति पर लागू है, जबकि टीटीजेड क्षेत्र के ग्राहकों के लिए घरेलू गैस आवंटन में कोई कटौती नहीं की गई है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को 80% सीमा के नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बन रही है। चैम्बर पदाधिकारियों ने बताया कि आगरा के अधिकांश फाउंड्री उद्योग लघु श्रेणी के हैं, जहां गैस की खपत नियमित नहीं होती। ऐसे में 6 माह की औसत के आधार पर सीमा तय करना उद्योगों को बंद करने जैसा है। उपाध्यक्ष विवेक जैन ने कहा कि पहले से ही वैश्विक परिस्थितियों के कारण कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित है, ऐसे में अतिरिक्त प्रतिबंध उद्योगों पर भारी पड़ेंगे। बैठक में उद्योगपतियों ने सुझाव दिया कि 5000 रुपये प्रतिदिन तक गैस उपयोग करने वाली इकाइयों पर कोई कटौती न की जाए। साथ ही गैस आपूर्ति पूर्व निर्धारित स्तर पर सुनिश्चित करने और कटौती केवल अनुबंधित मात्रा के आधार पर करने की मांग रखी गई। एलसी (लेटर ऑफ क्रेडिट) नवीनीकरण में आ रही बैंकिंग समस्याओं को भी उठाया गया। गेल गैस के अधिकारी मदन मोहन ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था सरकार के निर्देशों के अनुसार लागू की गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उद्योगों द्वारा उठाए गए मुद्दों को उच्च स्तर पर भेजा जाएगा और समाधान के प्रयास किए जाएंगे। एलसी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए बैंकों के साथ बैठक कराने की भी बात कही गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि चैम्बर का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही नई दिल्ली जाकर संबंधित अधिकारियों से मुलाकात करेगा और आगरा के उद्योगों की स्थिति से अवगत कराएगा।


