महाराष्ट्र के अकोला नगर निगम (Akola Municipal Corporation) की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। शिवसेना के दो गुटों के बीच चल रहा संघर्ष अब चरम पर पहुंच गया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका देते हुए उनके 6 में से 4 पार्षदों (नगरसेवकों) को अपने पाले में कर लिया है। इस दलबदल ने नगर निगम के भीतर सत्ता और वर्चस्व के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।
बहुमत के दम पर लिया बड़ा फैसला
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद नगर निगम में पार्टी के समूह नेता के पद को लेकर खींचतान शुरू हो गई थी। शिंदे गुट में शामिल हुए पार्षदों ने अपनी ताकत दिखाने के लिए एक विशेष बैठक बुलाई। इस बैठक में आक्रामक रुख अपनाते हुए बहुमत के आधार पर मौजूदा समूह नेता विजय इंगले को पद से हटा दिया गया। शिंदे गुट के पदाधिकारी मंगेश काले के अनुसार, अब विजय इंगले की जगह सागर भारुका को नया समूह नेता चुना गया है। इस बदलाव से यह साफ हो गया है कि अब नगर निगम के प्रशासनिक कामकाज और निर्णयों में शिंदे सेना का दबदबा रहेगा।
ठाकरे गुट ने की पार्षदों को अयोग्य ठहराने की मांग
अपने ही साथियों की बगावत से नाराज ठाकरे गुट अब कानूनी कार्रवाई के मूड में है। विजय इंगले ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीधे अमरावती विभागीय आयुक्त का दरवाजा खटखटाया है। ठाकरे गुट का आरोप है कि शिंदे गुट में शामिल हुए पार्षद सागर भारुका, मनोज पाटिल, सुरेखा काले और सोनाली सरोदे ने मूल पार्टी को छोड़कर अवैध रूप से दूसरे गुट में विलय किया है। उन्होंने एक ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि इन चारों पार्षदों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया है, इसलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से अयोग्य घोषित किया जाए।
अकोला में सियासी पारा चढ़ा
उधर, शिंदे गुट ने ठाकरे गुट के सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। उनका तर्क है कि लोकतंत्र में बहुमत सर्वोपरि है और उनके पास आवश्यक संख्या बल मौजूद है, इसलिए नई नियुक्तियां पूरी तरह संवैधानिक हैं। दूसरी ओर, ठाकरे गुट इसे कानून और अनुशासन का खुला उल्लंघन बता रहा है। अब पूरा जिला इस बात का इंतजार कर रहा है कि विभागीय आयुक्त इस शिकायत पर क्या फैसला लेते हैं। क्या ये 4 पार्षद अयोग्य ठहराये जाएंगे? यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।


