पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में मंगलवार को द्वितीय संस्थान अनुसंधान दिवस 2026 का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देना और युवा डॉक्टरों को शोध के लिए प्रेरित करना था। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार ने अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 2 करोड़ रुपये के आंतरिक फंड की घोषणा की। यह राशि नवाचार-आधारित परियोजनाओं पर काम कर रहे डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को प्रदान की जाएगी। मरीज की मानसिक स्थिति को समझना, इलाज जितना अहम- डॉ. बी. एन. गंगाधर कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ओरेशन’ रहा, जिसे डॉ. बी. एन. गंगाधर ने प्रस्तुत किया। उन्होंने जोर दिया कि अब समय आ गया है कि एमबीबीएस पाठ्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। डॉ. गंगाधर के अनुसार, प्रत्येक डॉक्टर के लिए मरीज की मानसिक स्थिति को समझना, शारीरिक बीमारी के इलाज जितना ही महत्वपूर्ण है। देश के कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ हुए शामिल मंगलवार को इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के मुख्य सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए। इनमें एम्स कल्याणी, आरएमआरआईएमएस पटना, आईआईटी पटना, एनआईटी पटना और सीडैक मुंबई के विशेषज्ञ भी उपस्थित थे। सभी विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुसंधान-आधारित दृष्टिकोण और विभिन्न क्षेत्रों के बीच तालमेल बढ़ाने पर बल दिया। डीन (रिसर्च) डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि, ‘पिछले चार वर्षों में संस्थान को आईसीएमआर, डीबीटी, डीएसटी, डीआरडीओ और आयुष से लगभग 10 करोड़ रुपये का अनुसंधान अनुदान प्राप्त हुआ है, जो संस्थान की बढ़ती शोध क्षमता को दर्शाता है।’ इस दौरान 2024-25 सत्र के बेस्ट रिसर्च वर्क और रिसर्च पेपर के लिए डॉक्टरों, रेजिडेंट्स और छात्रों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में डॉक्टर, विभागाध्यक्ष और छात्र मौजूद रहे। पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में मंगलवार को द्वितीय संस्थान अनुसंधान दिवस 2026 का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देना और युवा डॉक्टरों को शोध के लिए प्रेरित करना था। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार ने अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 2 करोड़ रुपये के आंतरिक फंड की घोषणा की। यह राशि नवाचार-आधारित परियोजनाओं पर काम कर रहे डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को प्रदान की जाएगी। मरीज की मानसिक स्थिति को समझना, इलाज जितना अहम- डॉ. बी. एन. गंगाधर कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ओरेशन’ रहा, जिसे डॉ. बी. एन. गंगाधर ने प्रस्तुत किया। उन्होंने जोर दिया कि अब समय आ गया है कि एमबीबीएस पाठ्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। डॉ. गंगाधर के अनुसार, प्रत्येक डॉक्टर के लिए मरीज की मानसिक स्थिति को समझना, शारीरिक बीमारी के इलाज जितना ही महत्वपूर्ण है। देश के कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ हुए शामिल मंगलवार को इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के मुख्य सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए। इनमें एम्स कल्याणी, आरएमआरआईएमएस पटना, आईआईटी पटना, एनआईटी पटना और सीडैक मुंबई के विशेषज्ञ भी उपस्थित थे। सभी विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुसंधान-आधारित दृष्टिकोण और विभिन्न क्षेत्रों के बीच तालमेल बढ़ाने पर बल दिया। डीन (रिसर्च) डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि, ‘पिछले चार वर्षों में संस्थान को आईसीएमआर, डीबीटी, डीएसटी, डीआरडीओ और आयुष से लगभग 10 करोड़ रुपये का अनुसंधान अनुदान प्राप्त हुआ है, जो संस्थान की बढ़ती शोध क्षमता को दर्शाता है।’ इस दौरान 2024-25 सत्र के बेस्ट रिसर्च वर्क और रिसर्च पेपर के लिए डॉक्टरों, रेजिडेंट्स और छात्रों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में डॉक्टर, विभागाध्यक्ष और छात्र मौजूद रहे।


