जौनपुर जिले में बड़ी संख्या में अपात्र लोग भी मुफ्त राशन योजना का लाभ उठा रहे हैं। जिले में 5085 ऐसे राशन कार्ड धारक पाए गए हैं जिनके पास चार पहिया वाहन हैं, फिर भी वे गरीबों के लिए निर्धारित मुफ्त राशन प्राप्त कर रहे हैं। विभाग ने ऐसे सभी कार्डों की जांच शुरू कर दी है और अपात्र पाए जाने पर उन्हें रद्द किया जाएगा। इस गड़बड़ी का मुख्य कारण सत्यापन प्रक्रिया में बरती गई उदासीनता है। इसके अतिरिक्त, आवेदन के समय संपत्ति का स्पष्ट ब्योरा देने का कोई प्रावधान न होने से भी अपात्रों को आसानी से राशन कार्ड मिल जाते हैं। जिला आपूर्ति विभाग इन मामलों की गहन जांच कर रहा है। यदि किसी राशन कार्ड धारक के पास चार पहिया वाहन पाया जाता है, तो उसका राशन कार्ड तत्काल रद्द कर दिया जाएगा। यदि वाहन नहीं मिलता है, तो संबंधित व्यक्ति से एक शपथ पत्र लिया जाएगा, जिसे भविष्य के साक्ष्य के रूप में रखा जाएगा। यदि बाद में उसके नाम पर वाहन पाया जाता है, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चार पहिया वाहन मालिकों के अलावा, बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने अपनी आय छिपाकर राशन कार्ड बनवाए हैं। अब पूरी व्यवस्था ऑनलाइन होने के कारण अपात्रों के राशन कार्ड तेजी से निरस्त किए जा रहे हैं। विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए सत्यापन प्रक्रिया में तेजी ला रहा है कि केवल पात्र लाभार्थियों को ही योजना का लाभ मिले। जनपद में राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए पिछले छह वर्षों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहले कार्डधारकों के सत्यापन और जांच का कोई निश्चित पैमाना नहीं था। अब सबसे पहले कार्डधारकों के आधार कार्ड लिंक किए गए, फिर उनकी सीडिंग कराई गई। तीसरे चरण में बायोमीट्रिक ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी की गई, जिससे मृतक कार्डधारकों के नाम पोर्टल से हटाने में मदद मिली। विभिन्न ब्लॉकों में मिले अपात्रों की संख्या इस प्रकार है: करंजाकला में 4, केराकत में 30, जखनिया में 22, बक्शा में 1, बदलापुर में 1, बरसठी में 48, मड़ियाहूं में 109, मुंगराबादशाहपुर में 21, मधुनीगंज में 43, रामनगर में 13, रामपुर में 85, शाहगंज में 15, सिकरारा में 3 और सुईथाकला में 31 अपात्र पाए गए हैं। जिला आपूर्ति अधिकारी (डीएसओ) संतोष विक्रम शाही ने बताया कि पहले राशन कार्ड धारकों के सत्यापन का कोई पैमाना नहीं था। हालांकि, अब भारत सरकार समय-समय पर अपात्रों की सूची उपलब्ध कराती है, जिसकी जांच कराई जाती है और अपात्रों के नाम सूची से हटा दिए जाते हैं।


