‘38 साल पहले मेरे सास-ससुर ने पुत्र प्राप्ति के लिए छठ व्रत किया था। दंपती भभुआ से छठ के लिए औरंगाबाद के सूर्य मंदिर आए थे। एक साल बाद ही मन्नत पूरी हो गई। करीब 8 साल पहले मेरे सास-ससुर का निधन हो गया। निधन से पहले सास ने मुझे छठ पर मांगी गई मन्नत के बारे में बताया था। कुछ कारणों से अब तक देव नहीं आई थी।’ भभुआ की सुधा देवी ने बताया। ‘28 साल पहले छठ के दौरान मेरा बेटा छठ मेला में ही खो गया था। काफी तलाश किया, लेकिन मेरा 3 साल का बेटा नहीं मिला। इसके बाद छठी मइया से मन्नत मांगी, बेटा चार घंटे बाद बाद ही मिल गया। 25 साल बाद छठी मइया के पास दोबारा आई हूं।’ गढ़वा की आशा ने बताया। ‘मेरा जन्म नहीं हुआ था। माता-पिता को संतान नहीं हो रही थी। छठी मइया से माता-पिता ने मन्नत मांगी थी, जिसके बाद मेरा जन्म हुआ, अब मैं परिवार के साथ छठ करने देव आया हूं।’ आसनसोल के वीरेंद्र शाह ने बताया। औरंगाबाद के सूर्यनगरी देव में मंगलवार को चैती छठ करने पहुंचे तीन छठ व्रतियों की ये कहानी है। व्रतियों ने बताया कि कई साल पहले मांगी गई मन्नत पूरी हुई, लेकिन किसी काम की वजह से हम लोग दोबारा देव नहीं आ पाए। अब मौका मिला है तो चैती छठ में देव आकर छठी मइया को धन्यवाद अर्पित कर रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट। पहले देव में सूर्यकुंड में छठ की 3 तस्वीरें देखिए सबसे पहले भभुआ की रहने वाली सुधा देवी की कहानी भभुआ जिले के कुदरा प्रखंड के नेवरास गांव की रहने वाली सुधा देवी इस बार चैती छठ कर रही हैं। सुधा ने बताया कि मैं अपनी देवरानी सविता देवी, पति और देवर समेत पूरे परिवार के साथ छठी मइया के पास आई हूं। सुधा बताती हैं कि मेरी सास ने 38 साल पहले जो मन्नत मांगा था, वो तो तत्काल पूरा हो गया था, लेकिन छठी मइया को धन्यवाद देने अब अपने पति और देवर के साथ आई हूं। अफसोस है कि मेरे सास-सुसर हम लोगों के साथ नहीं हैं, लेकिन ये उनकी आखिरी इच्छा है, जिसे आज पूरा कर रही हूं। सुधा ने बताया कि मेरी सास अमरावती देवी और ससुर लाल बहादुर सेठ को शादी के 8 साल के बाद भी कोई संतान नहीं हुआ। 38 साल पहले सास अपने परिवार के साथ देव पहुंची थी। छठ व्रत करते हुए सास ने छठी मइया और भगवान सूर्य से पुत्र की प्राप्ति की कामना की थी। उन्होंने बताया कि सास और ससुर की आस्था रंग लाई और एक साल बाद ही मेरी सास को जुड़वां बेटे हुए। एक मेरे पति अजय सेठ और देवर विजय सेठ। उन्होंने बताया कि जुड़वां बेटों के जन्म होने के बाद मेरी सास किसी कारण से देव नहीं आ पाई। 8 साल पहले सास-ससुर का हो चुका है निधन सुधा ने बताया कि करीब आठ साल पहले मेरी सास और ससुर का निधन हो गया था, लेकिन उनकी मन्नत अधूरी रह गई। निधन से पहले सास ने अपनी मन्नत की बात मुझे और देवरानी को बताई थी। सास-ससुर की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए मैं अपनी देवरानी के साथ इस साल छठ व्रत करने देव आई हूं। सुधा और सविता ने बताया कि ये केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि हम दोनों के सास-ससुर की आत्मा की शांति के लिए किया गया संकल्प है। 28 साल पहले छठ व्रत के दौरान ही देव मेला में खोया था एकलौता पुत्र झारखंड के गढ़वा जिले से आई आशा कुंवर ने बताया कि करीब 28 साल पहले जब मैं अपने परिवार के साथ देव में छठ पूजा करने आई थी। उस वक्त मेरा बेटा 3 साल का था। वे बताती है कि छठ मेला में ही मेरा बेटा अमित कुमार खो गया था। काफी खोजबीन के बावजूद जब बेटा नहीं मिला तो मैंने भगवान सूर्य से मन्नत मांगी कि अगर मेरा बेटा मिल जाएगा तो पूरे परिवार के साथ यहां आऊंगी और दोबारा छठ व्रत करूंगी। आशा कुंवर बताती है कि मन्नत के तीन से चार घंटे बाद ही मेरा बेटा मुझे वापस मिल गया था। करीब 25 साल बाद अब मैंने अपनी उस प्रतिज्ञा को पूरा किया है। इस बार मैं अपने बेटे अमित कुमार, बेटी मीना देवी और बहू शब्या देवी के साथ देव पहुंची हूं और पूरे विधि-विधान से छठ व्रत कर रही हूं। आशा कुंवर ने भावुक होते हुए कहा कि भगवान सूर्य की कृपा से ही उनका परिवार आज एक साथ है और उनकी हर मुराद यहां पूरी हुई है। मन्नत पूरा होने के बाद बंगाल से छठ करने पहुंचा दंपती वहीं पश्चिम बंगाल के आसनसोल से आए वीरेंद्र शाह भी अपने माता-पिता की मन्नत पूरी करने देव पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता नरेश साहू और माता प्रभा देवी ने उनकी शादी के बाद ये संकल्प लिया था कि यदि परिवार में पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी तो वे देव में छठ व्रत करेंगे और बच्चे का मुंडन संस्कार भी यहीं कराएंगे। वीरेंद्र साह बताते हैं कि छठी मइया ने मेरे माता-पिता के मन्नत को पूरा किया था। आज मैं अपनी पत्नी गीता देवी और पूरे परिवार के साथ देव पहुंचकर छठ व्रत कर रहा हूं और अपने माता-पिता की अधूरी मन्नत को पूरा कर रहा हूं। बेटे की कामना के लिए मन्नत मांगने यूपी से आया दंपती उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से भी कई श्रद्धालु इस बार देव पहुंचे हैं। कचनारवा गांव निवासी मनोज गुप्ता अपनी पत्नी संध्या देवी के साथ पुत्र प्राप्ति की कामना लेकर छठ व्रत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि देव सूर्य मंदिर की महिमा के बारे में काफी सुना है और उन्हें विश्वास है कि भगवान सूर्य उनकी मनोकामना अवश्य पूरी करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मन्नत पूरी होती है तो वे दोबारा पूरे परिवार के साथ यहां आकर भगवान को धन्यवाद देंगे। सूर्यनगरी देव में जुटे 7 लाख से अधिक श्रद्धालु औरंगाबाद में मंगलवार की शाम संध्या अर्घ्य के अवसर पर सूर्यकुंड एवं रूद्र कुंड तालाब में लगभग 7 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। दोपहर लगभग 3 बजे से ही सूर्यकुंड परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी, जो शाम ढलते-ढलते जनसागर में तब्दील हो गई। श्रद्धालु पवित्र कुंड में स्नान कर विधि-विधान के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते नजर आए। पूरे देव क्षेत्र में भक्ति, आस्था और श्रद्धा का अद्वितीय दृश्य देखने को मिला। सूर्यकुंड तालाब में स्नान और अर्घ्य अर्पण को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से कुष्ठ जैसे गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है, वहीं देव सूर्य मंदिर में पूजा-अर्चना करने से संतान सुख, विशेषकर पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि बिहार के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु यहां छठ पर्व के अवसर पर पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराने और मन्नत पूरी होने पर छठ व्रत करने के लिए देव पहुंचते हैं। ‘38 साल पहले मेरे सास-ससुर ने पुत्र प्राप्ति के लिए छठ व्रत किया था। दंपती भभुआ से छठ के लिए औरंगाबाद के सूर्य मंदिर आए थे। एक साल बाद ही मन्नत पूरी हो गई। करीब 8 साल पहले मेरे सास-ससुर का निधन हो गया। निधन से पहले सास ने मुझे छठ पर मांगी गई मन्नत के बारे में बताया था। कुछ कारणों से अब तक देव नहीं आई थी।’ भभुआ की सुधा देवी ने बताया। ‘28 साल पहले छठ के दौरान मेरा बेटा छठ मेला में ही खो गया था। काफी तलाश किया, लेकिन मेरा 3 साल का बेटा नहीं मिला। इसके बाद छठी मइया से मन्नत मांगी, बेटा चार घंटे बाद बाद ही मिल गया। 25 साल बाद छठी मइया के पास दोबारा आई हूं।’ गढ़वा की आशा ने बताया। ‘मेरा जन्म नहीं हुआ था। माता-पिता को संतान नहीं हो रही थी। छठी मइया से माता-पिता ने मन्नत मांगी थी, जिसके बाद मेरा जन्म हुआ, अब मैं परिवार के साथ छठ करने देव आया हूं।’ आसनसोल के वीरेंद्र शाह ने बताया। औरंगाबाद के सूर्यनगरी देव में मंगलवार को चैती छठ करने पहुंचे तीन छठ व्रतियों की ये कहानी है। व्रतियों ने बताया कि कई साल पहले मांगी गई मन्नत पूरी हुई, लेकिन किसी काम की वजह से हम लोग दोबारा देव नहीं आ पाए। अब मौका मिला है तो चैती छठ में देव आकर छठी मइया को धन्यवाद अर्पित कर रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट। पहले देव में सूर्यकुंड में छठ की 3 तस्वीरें देखिए सबसे पहले भभुआ की रहने वाली सुधा देवी की कहानी भभुआ जिले के कुदरा प्रखंड के नेवरास गांव की रहने वाली सुधा देवी इस बार चैती छठ कर रही हैं। सुधा ने बताया कि मैं अपनी देवरानी सविता देवी, पति और देवर समेत पूरे परिवार के साथ छठी मइया के पास आई हूं। सुधा बताती हैं कि मेरी सास ने 38 साल पहले जो मन्नत मांगा था, वो तो तत्काल पूरा हो गया था, लेकिन छठी मइया को धन्यवाद देने अब अपने पति और देवर के साथ आई हूं। अफसोस है कि मेरे सास-सुसर हम लोगों के साथ नहीं हैं, लेकिन ये उनकी आखिरी इच्छा है, जिसे आज पूरा कर रही हूं। सुधा ने बताया कि मेरी सास अमरावती देवी और ससुर लाल बहादुर सेठ को शादी के 8 साल के बाद भी कोई संतान नहीं हुआ। 38 साल पहले सास अपने परिवार के साथ देव पहुंची थी। छठ व्रत करते हुए सास ने छठी मइया और भगवान सूर्य से पुत्र की प्राप्ति की कामना की थी। उन्होंने बताया कि सास और ससुर की आस्था रंग लाई और एक साल बाद ही मेरी सास को जुड़वां बेटे हुए। एक मेरे पति अजय सेठ और देवर विजय सेठ। उन्होंने बताया कि जुड़वां बेटों के जन्म होने के बाद मेरी सास किसी कारण से देव नहीं आ पाई। 8 साल पहले सास-ससुर का हो चुका है निधन सुधा ने बताया कि करीब आठ साल पहले मेरी सास और ससुर का निधन हो गया था, लेकिन उनकी मन्नत अधूरी रह गई। निधन से पहले सास ने अपनी मन्नत की बात मुझे और देवरानी को बताई थी। सास-ससुर की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए मैं अपनी देवरानी के साथ इस साल छठ व्रत करने देव आई हूं। सुधा और सविता ने बताया कि ये केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि हम दोनों के सास-ससुर की आत्मा की शांति के लिए किया गया संकल्प है। 28 साल पहले छठ व्रत के दौरान ही देव मेला में खोया था एकलौता पुत्र झारखंड के गढ़वा जिले से आई आशा कुंवर ने बताया कि करीब 28 साल पहले जब मैं अपने परिवार के साथ देव में छठ पूजा करने आई थी। उस वक्त मेरा बेटा 3 साल का था। वे बताती है कि छठ मेला में ही मेरा बेटा अमित कुमार खो गया था। काफी खोजबीन के बावजूद जब बेटा नहीं मिला तो मैंने भगवान सूर्य से मन्नत मांगी कि अगर मेरा बेटा मिल जाएगा तो पूरे परिवार के साथ यहां आऊंगी और दोबारा छठ व्रत करूंगी। आशा कुंवर बताती है कि मन्नत के तीन से चार घंटे बाद ही मेरा बेटा मुझे वापस मिल गया था। करीब 25 साल बाद अब मैंने अपनी उस प्रतिज्ञा को पूरा किया है। इस बार मैं अपने बेटे अमित कुमार, बेटी मीना देवी और बहू शब्या देवी के साथ देव पहुंची हूं और पूरे विधि-विधान से छठ व्रत कर रही हूं। आशा कुंवर ने भावुक होते हुए कहा कि भगवान सूर्य की कृपा से ही उनका परिवार आज एक साथ है और उनकी हर मुराद यहां पूरी हुई है। मन्नत पूरा होने के बाद बंगाल से छठ करने पहुंचा दंपती वहीं पश्चिम बंगाल के आसनसोल से आए वीरेंद्र शाह भी अपने माता-पिता की मन्नत पूरी करने देव पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता नरेश साहू और माता प्रभा देवी ने उनकी शादी के बाद ये संकल्प लिया था कि यदि परिवार में पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी तो वे देव में छठ व्रत करेंगे और बच्चे का मुंडन संस्कार भी यहीं कराएंगे। वीरेंद्र साह बताते हैं कि छठी मइया ने मेरे माता-पिता के मन्नत को पूरा किया था। आज मैं अपनी पत्नी गीता देवी और पूरे परिवार के साथ देव पहुंचकर छठ व्रत कर रहा हूं और अपने माता-पिता की अधूरी मन्नत को पूरा कर रहा हूं। बेटे की कामना के लिए मन्नत मांगने यूपी से आया दंपती उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से भी कई श्रद्धालु इस बार देव पहुंचे हैं। कचनारवा गांव निवासी मनोज गुप्ता अपनी पत्नी संध्या देवी के साथ पुत्र प्राप्ति की कामना लेकर छठ व्रत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि देव सूर्य मंदिर की महिमा के बारे में काफी सुना है और उन्हें विश्वास है कि भगवान सूर्य उनकी मनोकामना अवश्य पूरी करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मन्नत पूरी होती है तो वे दोबारा पूरे परिवार के साथ यहां आकर भगवान को धन्यवाद देंगे। सूर्यनगरी देव में जुटे 7 लाख से अधिक श्रद्धालु औरंगाबाद में मंगलवार की शाम संध्या अर्घ्य के अवसर पर सूर्यकुंड एवं रूद्र कुंड तालाब में लगभग 7 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। दोपहर लगभग 3 बजे से ही सूर्यकुंड परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी, जो शाम ढलते-ढलते जनसागर में तब्दील हो गई। श्रद्धालु पवित्र कुंड में स्नान कर विधि-विधान के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते नजर आए। पूरे देव क्षेत्र में भक्ति, आस्था और श्रद्धा का अद्वितीय दृश्य देखने को मिला। सूर्यकुंड तालाब में स्नान और अर्घ्य अर्पण को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से कुष्ठ जैसे गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है, वहीं देव सूर्य मंदिर में पूजा-अर्चना करने से संतान सुख, विशेषकर पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि बिहार के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु यहां छठ पर्व के अवसर पर पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराने और मन्नत पूरी होने पर छठ व्रत करने के लिए देव पहुंचते हैं।


