पूर्णिया में चैती छठ बुधवार को उदीयमान भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। सुबह से ही छठ घाटों पर व्रतियों-श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। जैसे ही सूर्य की पहली किरणें पड़ी, व्रतियों ने पूरे विधि-विधान के साथ नदी, तालाब और जलाशयों में खड़े होकर भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मेयर विभा कुमारी, डिप्टी मेयर पल्लवी गुप्ता और भाजपा नेत्री नूतन गुप्ता भी छठ घाट पहुंची और अर्घ्य दिया। सुबह ही शहर के पक्की तालाब, कला भवन छठ घाट, सौरा नदी घाट और गुलाबबाग छठ घाट, पॉलिटेक्निक छठ घाट पर श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। घाटों पर छठ मइया के गीत गूंजते रहे। व्रती महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में जल में खड़ी होकर पूजा-अर्चना करती नजर आईं। छठ गीतों और भक्ति संगीत की गूंज के बीच पूरे शहर में आध्यात्मिक माहौल बना रहा। छठ पूजा से सभी बाधाएं दूर होती व्रतियों ने बताया कि उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देना इस महापर्व का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र क्षण होता है। मान्यता है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। श्रद्धालुओं ने कहा कि चैती छठ सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस दौरान जो एकता और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है, वह अद्भुत होता है। घाटों पर सुरक्षा के भी रहे इंतजाम
वहीं, प्रशासन की ओर से घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। नगर निगम ने साफ-सफाई, रोशनी और पेयजल की बेहतर व्यवस्था की, जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ ही चार दिनों तक चला चैती छठ महापर्व श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हो गया। पूर्णिया में चैती छठ बुधवार को उदीयमान भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। सुबह से ही छठ घाटों पर व्रतियों-श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। जैसे ही सूर्य की पहली किरणें पड़ी, व्रतियों ने पूरे विधि-विधान के साथ नदी, तालाब और जलाशयों में खड़े होकर भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मेयर विभा कुमारी, डिप्टी मेयर पल्लवी गुप्ता और भाजपा नेत्री नूतन गुप्ता भी छठ घाट पहुंची और अर्घ्य दिया। सुबह ही शहर के पक्की तालाब, कला भवन छठ घाट, सौरा नदी घाट और गुलाबबाग छठ घाट, पॉलिटेक्निक छठ घाट पर श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। घाटों पर छठ मइया के गीत गूंजते रहे। व्रती महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में जल में खड़ी होकर पूजा-अर्चना करती नजर आईं। छठ गीतों और भक्ति संगीत की गूंज के बीच पूरे शहर में आध्यात्मिक माहौल बना रहा। छठ पूजा से सभी बाधाएं दूर होती व्रतियों ने बताया कि उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देना इस महापर्व का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र क्षण होता है। मान्यता है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। श्रद्धालुओं ने कहा कि चैती छठ सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस दौरान जो एकता और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है, वह अद्भुत होता है। घाटों पर सुरक्षा के भी रहे इंतजाम
वहीं, प्रशासन की ओर से घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। नगर निगम ने साफ-सफाई, रोशनी और पेयजल की बेहतर व्यवस्था की, जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ ही चार दिनों तक चला चैती छठ महापर्व श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हो गया।


