मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने जन्मदिन पर बुधवार को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व आएंगे। वे यहां बामनेर नदी में 13 कछुए छोड़ेंगे। इसके अलावा टाइगर रिजर्व में चीतों के पुनर्वास के लिए बनाए जा रहे सॉफ्ट रिलीज बोमा का भूमिपूजन भी करेंगे। अधिकारियों ने मंगलवार को मुहली पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। यहीं हेलिपेड बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री संभवत: दोपहर बाद आएंगे। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व क्षेत्रफल में प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिले के 72 गांवों को जोड़ते हुए कुल क्षेत्रफल 2339 वर्ग किलोमीटर में फैला है। प्रदेश का यह 7वां और भारत का 54वां टाइगर रिजर्व है। वर्ष 2023 में इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। एक समय यह क्षेत्र भेड़ियों के लिए जाना जाता था। अब यहां बाघ, तेंदुओं के बाद चीतों की बसाहट होगी। शीघ्र ही कूनो से चीतों को लाकर यहां बसाया जाएगा। बाघों की संख्या पर भ्रम, 32 की मौजूदगी का दावा : टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 32 बाघों की मौजूदगी दावा किया जा रहा है। महीनेभर पहले तक यहां 25 बाघ बताए जा रहे थे। हालांकि बाहरी बाघों का मूवमेंट भी रहता है इसलिए संख्या को लेकर भ्रम की स्थिति बनी है। यहां भेड़िया, भालू, सियार, लकड़बग्घा, लोमड़ी, सूअर, नीलगाय, जंगली सूअर, चौसिंघा, काला हिरण, चिंकारा, कछुआ और मगरमच्छ सहित पशु-पक्षी मौजूद हैं।


