विक्की कुमार | अमृतसर रिश्तों की डोर जब टूटती है, तो पीछे सिर्फ यादों का समंदर रह जाता है। पंजाब वेयरहाउस अमृतसर के डीएम गगनदीप रंधावा के रणजीत एवेन्यू स्थित घर से लेकर दुर्ग्याणा शिवपुरी तक मंगलवार को हर आंख नम थी और हर जुबां पर उनके अनुशासन की चर्चा थी। विभाग के नर्म स्वभाव के अधिकारी को उनके परिवार ने कफन में नहीं, बल्कि उसी ‘साहबी’ रुतबे के साथ विदा किया, जिसके लिए वे ताउम्र पहचाने गए। बड़ी ही गरिमा के साथ उनके सिर पर पगड़ी सजाई गई और शरीर पर कोट-पेंट पहनाया गया। पत्नी और बच्चों ने अपने कांपते हाथों से अंतिम बार अपने मुखिया को संवारा, मानो वे कह रहे हों कि आप हमारे लिए हमेशा एक ‘नायक’ ही रहेंगे। अंतिम सफर से पहले घर के अंदर का दृश्य पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने वाला था। पार्थिव शरीर के पास उनकी पत्नी उपिंदर कौर और बड़ी बेटी सीरत कौर बेसुध खड़ी थीं। अंतिम यात्रा श्मशानघाट पहुंची, तो वहां उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ थी। इनमें पनग्रेन, पनसप, वेयरहाउस और मार्कफेड के अफसरों से लेकर राजनीतिक पार्टियों के नेता शामिल रहे। श्मशानघाट पर सबसे भावुक पल वह था, जब चिता को मुखाग्नि देने का समय आया। बड़ी बेटी सीरत कौर और उनके छोटे बेटे ने मिलकर पिता की पार्थिव देह को मुखाग्नि दी। एक पिता और पति के रूप में उनका जाना परिवार के लिए ऐसा घाव है, जिसे वक्त शायद ही कभी भर पाए। गगनदीप रंधावा के अंतिम संस्कार के दौरान माहौल काफी गमगीन रहा। शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस घटना को दर्दनाक बताया। मजीठिया ने कहा कि यह देखना बहुत मुश्किल था कि बच्चों को पिता को मुखाग्नि देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि एक टैलेंटेड ऑफिसर को आज हम केवल इसलिए खो चुके हैं क्योंकि जिम्मेदार लोग अपनी अकड़ में बैठे रहे। मजीठिया ने इसे गिरफ्तारी नहीं बल्कि एक तरह का सरंडर बताया और आरोप लगाया कि आरोपी को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। जिस तरह के हालात हैं, उसमें पंजाब पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना मुश्किल है, इसलिए केस की बागडोर तुरंत सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए। रंधावा की मौत के मामले में इंसाफ की मांग अब तेज होने लगी है। हलका सेंट्रल के पूर्व पार्षद विकास सोनी की अगुवाई में जलियांवाला बाग में कैंडल मार्च निकाला गया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने एकजुटता का प्रदर्शन किया। मोमबत्तियां जलाकर डॉ. रंधावा को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद विकास ने कहा कि यह दुखद घटना पूरे शहर के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले की पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की जाए और जो भी दोषी हैं, उन्हें कानून के दायरे में लाकर सख्त सजा दिलाई जाए। सोनी ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक परिवार की निजी पीड़ा नहीं, बल्कि सच्चाई और न्याय की सामूहिक लड़ाई है। सभी ने एक स्वर में सरकार से निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की मांग की। रंधावा के भाई वरिंदरपाल सिंह ने कहा कि वह चाहते हैं कि साइंटिफिक और निष्पक्ष तरीके से जांच करके सच सामने लाया जाए। उन्होंने फिर जोर देकर कहा कि उन्हें स्थानीय जांच पर भरोसा नहीं है। सीबीआई से जांच करवाई जाए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मामले में खुद दखल देकर जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने। इसके साथ ही, उन्होंने अब तक की पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल अन्य सभी चेहरों को भी जल्द बेनकाब किया जाना चाहिए। मौत के चौथे दिन रंधावा के शव को पोस्टमार्टम के बाद उनके रणजीत एवेन्यू स्थित घर में लाया गया। जहां परिवार का हर सदस्य उनसे लिपट-लिपट कर रोया। उन्हें वही पेंट-कोट और पगड़ी पहनाए गए, जिन्हें पहनकर वह दफ्तर जाया करते थे। इस दौरान हर कोई पूर्व मंत्री भुल्लर को कोस रहा था। फोटो| सुनील कुमार पूर्व कैबिनेट मंत्री लालजीत भुल्लर की पत्नी सुरिंदरपाल कौर भुल्लर भी पेशी के वक्त अदालत पहुंची। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनके पति बेगुनाह हैं। मामला अदालत में है। जांच चल रही है। उन्हें अदालत पर भरोसा है। उनके पति पूरी तरह से साफ होकर ही बाहर निकलेंगे। इसी बीच भुल्लर के समर्थकों ने अदालत के बाहर भुल्लर के पक्ष में नारेबाजी भी की। इससे पहले सुरिंदरपाल कौर ने कहा कि विरोधी पार्टियों के नेता उस समय कहां थे, जब फरीदकोट में कटारिया परिवार ने पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का नाम लेकर आत्महत्या कर ली थी। अकाली दल और कांग्रेस ने उस समय उस परिवार के साथ धरना क्यों नहीं लगाया। तरनतारन में जहरीली शराब से मारे लोगों के मामले में उस समय हरमिंदर गिल का नाम उछला था। उस समय धरने क्यों नहीं लगाए गए। बचाव पक्ष के वकील राजिंदर पाल ने सुनवाई के बाद कहा कि पुलिस ने ज्यादा समय का रिमांड मांगा था, लेकिन कोर्ट ने संतुलित फैसला लेते हुए 5 दिन की कस्टडी दी है। उन्होंने कहा कि अभी केस की पूरी स्थिति साफ नहीं है और कई तथ्य सामने आने बाकी हैं। वकील राजिंदर पाल ने यह भी साफ किया कि डिफेंस को अभी केस के सारे डाक्यूमेंट्स और पूरी जानकारी नहीं मिली है। इस वजह से फिलहाल केस की मूल बातों पर ज्यादा टिप्पणी करना संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसे ही पूरी जानकारी मिलेगी, डिफेंस अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेगा। अदालत की प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि कानूनी सिस्टम के हिसाब से ही आगे की कार्रवाई होगी और सच्चाई जल्द सामने आ जाएगी। फिलहाल पुलिस रिमांड के ये 5 दिन जांच के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं, जिनमें पुलिस आगे की पूछताछ करेगी और सबूत इकट्ठे करेगी।


