मथुरा के विश्राम घाट पर नवरात्र के छठे दिन यमुना जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु घाट पर उमड़ पड़े। भक्तों ने यमुना जी में दूध अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। जन्मोत्सव के दौरान यमुना जी का दही, बूरा, घी, शहद और दूध से अभिषेक किया गया। इस दौरान विधिवत रूप से मंत्रोच्चारण भी किए गए। पूरे विश्राम घाट को आकर्षक रोशनी और फूलों से सजाया गया था, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा। मंदिरों में विशेष पूजन, आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें संत-महंतों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम के तहत विश्राम घाट की मुख्य संस्था ने शहर में यमुना शुद्धिकरण को लेकर एक जनजागरण यात्रा निकाली। यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी, जिसमें आकर्षक झांकियां, भजन मंडलियां और धार्मिक झलकियां शामिल थीं। यात्रा में शामिल लोगों ने ‘यमुना स्वच्छ बनाओ’ जैसे नारों के माध्यम से जनमानस को जागरूक करने का प्रयास किया। संस्था से जुड़े राकेश तिवारी ने बताया कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति की प्रतीक है। उन्होंने जोर दिया कि जब तक समाज के हर वर्ग की भागीदारी नहीं होगी, तब तक यमुना का वास्तविक शुद्धिकरण संभव नहीं है। राकेश तिवारी ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि केवल औपचारिकताएं निभाते हैं, जिससे यमुना की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।


