लखनऊ में गोमती तट पर चैती छठ महापर्व का आयोजन हुआ । श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि की कामना किया।चैती छठ महापर्व के अवसर पर अखिल भारतीय भोजपुरी समाज द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें महिलाओं ने बेदी सजाई और लम्बा सिंदूर लगा कर पूजा की टोकरी लेकर गोमती तट पर पहुंची। भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय ने बताया कि लक्ष्मण मेला मैदान में छठ पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। छठ पूजा के लिए पहुंची बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और व्रतियों ने आस्था और परंपरा के साथ सूर्य उपासना की।मंगलवार देर शाम को व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। इससे पहले सभी श्रद्धालु ने घाट पर एकत्र हुए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान भास्कर से सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना की। अर्घ्य देने के बाद परंपरा अनुसार घरों में ‘कोसी भरने’ की रस्म भी निभाई गई। प्रभुनाथ राय ने बताया कि छठ पूजा साल में दो बार मनाई जाती है। एक कार्तिक छठ पूजा होती है दूसरा चैती छठ पूजा। ये छठ नवरात्रि के छठे दिन मनाई जाती है इसका व्रत भी थोड़ा कठिन होता है। गर्मी में 36 घंटा व्रत रहना कठिन कार्य है फिर भी हमारी माताएं और बहने रहती हैं, बिहार में इसके बड़ा धूम है। इस छठ में लाल रंग के सामान का प्रयोग अधिक होता है। इसमें सबका अलग अलग व्रत होता है किसी का 6 साल का कोई 12 साल का रहता है। कुछ लोग आजीवन भी रहते हैं। लक्ष्मण मेला मैदान में हम लोग 42 सालों से छठ मना रहे हैं। प्रभुनाथ ने बताया कि 25 मार्च की प्रातः 5:30 बजे उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर महापर्व का समापन किया जाएगा।


