सीवान में छठ का तीसरा दिन:डूबते सूर्य को अर्घ, घाटों पर उमड़ी भारी भीड़, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, आज उगते सूर्य के साथ होगा समापन

सीवान में छठ का तीसरा दिन:डूबते सूर्य को अर्घ, घाटों पर उमड़ी भारी भीड़, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, आज उगते सूर्य के साथ होगा समापन

सीवान जिलेभर में लोक आस्था के महापर्व छठ का तीसरा दिन पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। मंगलवार को व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ अर्पित कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्यता और मंगल कामना की। छठ घाटों पर भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां हजारों श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना करते नजर आए। वातावरण छठी मईया के गीतों से गुंजायमान रहा और हर ओर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता दिखा। सुबह से ही बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई थी। पूजा सामग्री, फल, सूप और बांस की टोकरी खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रही। वहीं शाम होते-होते सभी प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दाहा नदी घाट, शिवगंगा घाट, जयसवाल घाट, नवलपुर घाट, महादेवा घाट, पंच मंदिरा घाट और बालचंदहाता सहित अन्य छठ घाटों पर व्रतियों ने विधि-विधान से भगवान भास्कर को अर्घ अर्पित किया। छठ से जुड़ी 2 तस्वीरें.. पानी में खड़े होकर सूर्यदेव की उपासना करते नजर आए
घाटों पर महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों की भारी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ पानी में खड़े होकर सूर्यदेव की उपासना करते नजर आए। अर्घ देने के बाद व्रती अपने घर लौटे और परंपरा के अनुसार 12 और 24 ईख का कोशी भरकर पूजा संपन्न की। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। सभी प्रमुख घाटों और आसपास के चौक-चौराहों पर दंडाधिकारी के साथ पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रशासनिक अधिकारी लगातार गश्त करते रहे ताकि पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। विभिन्न समितियों द्वारा घाटों पर रोशनी, स्वच्छ जल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। बांस के सूप और प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग किया जाता
छठ पर्व को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक भी माना जाता है। इस पर्व में मिट्टी के चूल्हे, बांस के सूप और प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग किया जाता है, जो पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देता है। यह पर्व सूर्य उपासना के माध्यम से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य की कामना का भी प्रतीक है। बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ देने के साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास संपन्न होगा, जिसके साथ चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन हो जाएगा। सीवान जिलेभर में लोक आस्था के महापर्व छठ का तीसरा दिन पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। मंगलवार को व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ अर्पित कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्यता और मंगल कामना की। छठ घाटों पर भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां हजारों श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना करते नजर आए। वातावरण छठी मईया के गीतों से गुंजायमान रहा और हर ओर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता दिखा। सुबह से ही बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई थी। पूजा सामग्री, फल, सूप और बांस की टोकरी खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रही। वहीं शाम होते-होते सभी प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दाहा नदी घाट, शिवगंगा घाट, जयसवाल घाट, नवलपुर घाट, महादेवा घाट, पंच मंदिरा घाट और बालचंदहाता सहित अन्य छठ घाटों पर व्रतियों ने विधि-विधान से भगवान भास्कर को अर्घ अर्पित किया। छठ से जुड़ी 2 तस्वीरें.. पानी में खड़े होकर सूर्यदेव की उपासना करते नजर आए
घाटों पर महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों की भारी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ पानी में खड़े होकर सूर्यदेव की उपासना करते नजर आए। अर्घ देने के बाद व्रती अपने घर लौटे और परंपरा के अनुसार 12 और 24 ईख का कोशी भरकर पूजा संपन्न की। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। सभी प्रमुख घाटों और आसपास के चौक-चौराहों पर दंडाधिकारी के साथ पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रशासनिक अधिकारी लगातार गश्त करते रहे ताकि पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। विभिन्न समितियों द्वारा घाटों पर रोशनी, स्वच्छ जल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। बांस के सूप और प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग किया जाता
छठ पर्व को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक भी माना जाता है। इस पर्व में मिट्टी के चूल्हे, बांस के सूप और प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग किया जाता है, जो पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देता है। यह पर्व सूर्य उपासना के माध्यम से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य की कामना का भी प्रतीक है। बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ देने के साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास संपन्न होगा, जिसके साथ चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन हो जाएगा।  

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