धोनी के संन्यास पर फिर चर्चा शुरू, पूर्व भारतीय ओपनर ने कसा तंज, कहा ‘आप डगआउट से टीम नहीं चला सकते’

धोनी के संन्यास पर फिर चर्चा शुरू, पूर्व भारतीय ओपनर ने कसा तंज, कहा ‘आप डगआउट से टीम नहीं चला सकते’

MS Dhoni Retirement in discussion before IPL 2026: आईपीएल 2026 की शुरुआत के महज चार दिन पहले पूर्व भारतीय ओपनर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा (Aakash Chopra) ने चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) को संन्यास ले लेने की सीधी सलाह दे दी है।

चोपड़ा ने साफ कहा कि अगर धोनी आगामी सीजन में केवल इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर उतरने की सोच रहे हैं, तो उनके लिए अब ‘बूट्स हैंग’ करने का वक्त आ गया है। 30 मार्च को चेन्नई अपना पहला मुकाबला राजस्थान रॉयल्स (RR) के खिलाफ गुवाहाटी के बारसापारा क्रिकेट स्टेडियम में खेलेगी।

चोपड़ा की दो टूक – ‘मैदान पर उतरो, वरना हट जाओ’

जियोस्टार के ‘IPL Today Live’ कार्यक्रम में बोलते हुए चोपड़ा ने कहा कि क्रिकेट फुटबॉल नहीं है, जहां मैनेजर डगआउट से पूरी टीम को दिशा दे सके। उन्होंने कहा कि धोनी की सबसे बड़ी ताकत मैदान पर उनकी खेल की समझ है, वही क्लैरिटी और कन्विक्शन उन्हें बाकियों से अलग बनाती है।

चोपड़ा ने यह भी कहा कि सीएसके के पास अब संजू सैमसन (Sanju Samson) के रूप में धोनी का उत्तराधिकारी भी आ चुका है। चोपड़ा के अनुसार, सैमसन इस सीजन के दौरान भी विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

चोपड़ा ने टीम के बैलेंस पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि चेन्नई की मौजूदा स्क्वाड वो टीम नहीं है जो धोनी खुद बनाते, यह रुतुराज गायकवाड़ की टीम है। उन्होंने धोनी और उनके बाद की क्रिकेट जेनेरेशन पर एक दिलचस्प उपमा देते हुए कहा कि अगर बच्चे को दौड़ना सिखाना है, तो उसका हाथ छोड़ना होगा। पकड़े रहे, तो वो कभी दौड़ना नहीं सीखेगा।

क्या कहते हैं आंकड़े

पिछले पांच आईपीेल सीजन में महेंद्र सिंह धोनी का प्रदर्शन कुछ इस प्रकार रहा है:

  • 2021 में उन्होंने 16 मैचों में महज 114 रन बनाए, औसत रहा 16.28
  • 2022 में 14 मैचों में 232 रन, औसत 33.14, यह पिछले पांच सालों में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा
  • 2023 में 16 मैचों में केवल 104 रन, हालांकि टीम उस साल चैंपियन बनी
  • 2024 में उन्होंने 220.54 की स्ट्राइक रेट से 161 रन बनाए
  • 2025 में 14 मैचों में 196 रन, स्ट्राइक रेट 135.17

यह आंकड़े बताते हैं कि धोनी की टीम में भूमिका कभी एक फुल-टाइम बल्लेबाज की थी, मगर अब सिर्फ डेथ ओवरों में फिनिशर के तौर पर रह गई है। घुटने की चोट को देखते हुए उनके खेलने के ओवर भी साल-दर-साल कम होते जा रहे हैं। खुद धोनी ने हाल ही में चेन्नई सुपर किंग्स के एक इवेंट में स्वीकार किया था कि उनकी फिटनेस का ग्राफ ‘ऊपर नहीं, नीचे की ओर जा रहा है।’ ऐसे में आकाश चोपड़ा की बातों को एकदम निराधार नहीं कहा जा सकता, भले ही रिटायरमेंट के फैसले पर अंतिम कॉल धोनी का ही है।​​​​​​​​​​​​​​​​

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