नवादा के सदर अस्पताल में ड्यूटी रोस्टर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जीएनएम, एएनएम और पैरामेडिकल कर्मियों ने आरोप लगाया है कि पिछले आठ महीनों से रोस्टर में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। 8 महीने से एक ही रोस्टर, कर्मचारियों में नाराजगी कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल में 2 जून 2025 को आखिरी बार रोस्टर बदला गया था, लेकिन उसके बाद से अब तक कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। नियम के अनुसार हर तीन महीने में रोस्टर में बदलाव होना चाहिए, ताकि कर्मचारियों के कार्यभार का संतुलन बना रहे। इसके बावजूद लंबे समय से एक ही ड्यूटी पर तैनाती होने से कर्मचारियों में असंतोष गहराता जा रहा है। आवाज उठाने पर कार्रवाई का आरोप कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे रोस्टर बदलने की मांग करते हैं, तो उन्हें नोटिस थमा दिया जाता है और स्पष्टीकरण (शो-कॉज) मांगा जाता है। कुछ कर्मचारियों का यह भी कहना है कि विरोध करने वालों को दूर-दराज के प्रखंडों में स्थानांतरित करने की धमकी दी जाती है, जिससे वे दबाव में आ जाते हैं। ‘कुछ कर्मचारियों को मिली छूट’ कर्मचारी संघ के जिला सचिव संदीप कुमार ने कहा कि रोस्टर नहीं बदलने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारियों को विशेष छूट दी गई है, जिसके कारण अस्पताल की व्यवस्था और भी बिगड़ती जा रही है। पहले भी सुर्खियों में रहा अस्पताल सदर अस्पताल पहले भी कई कारणों से चर्चा में रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल में अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है और कई मामलों में शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। उनका यह भी दावा है कि यदि बिना सूचना के औचक निरीक्षण किया जाए, तो कई स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से गायब पाए जा सकते हैं। प्रबंधन ने दी सफाई इस मामले में अस्पताल प्रबंधक कुमार आदित्य ने कहा कि रोस्टर बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। सुधार की उम्मीद, लेकिन सवाल बरकरार रोस्टर विवाद के चलते अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय पर सुधार नहीं हुआ, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। अब सभी की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई और रोस्टर बदलाव पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि अस्पताल में व्यवस्था कब तक पटरी पर लौटती है। नवादा के सदर अस्पताल में ड्यूटी रोस्टर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जीएनएम, एएनएम और पैरामेडिकल कर्मियों ने आरोप लगाया है कि पिछले आठ महीनों से रोस्टर में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। 8 महीने से एक ही रोस्टर, कर्मचारियों में नाराजगी कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल में 2 जून 2025 को आखिरी बार रोस्टर बदला गया था, लेकिन उसके बाद से अब तक कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। नियम के अनुसार हर तीन महीने में रोस्टर में बदलाव होना चाहिए, ताकि कर्मचारियों के कार्यभार का संतुलन बना रहे। इसके बावजूद लंबे समय से एक ही ड्यूटी पर तैनाती होने से कर्मचारियों में असंतोष गहराता जा रहा है। आवाज उठाने पर कार्रवाई का आरोप कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे रोस्टर बदलने की मांग करते हैं, तो उन्हें नोटिस थमा दिया जाता है और स्पष्टीकरण (शो-कॉज) मांगा जाता है। कुछ कर्मचारियों का यह भी कहना है कि विरोध करने वालों को दूर-दराज के प्रखंडों में स्थानांतरित करने की धमकी दी जाती है, जिससे वे दबाव में आ जाते हैं। ‘कुछ कर्मचारियों को मिली छूट’ कर्मचारी संघ के जिला सचिव संदीप कुमार ने कहा कि रोस्टर नहीं बदलने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारियों को विशेष छूट दी गई है, जिसके कारण अस्पताल की व्यवस्था और भी बिगड़ती जा रही है। पहले भी सुर्खियों में रहा अस्पताल सदर अस्पताल पहले भी कई कारणों से चर्चा में रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल में अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है और कई मामलों में शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। उनका यह भी दावा है कि यदि बिना सूचना के औचक निरीक्षण किया जाए, तो कई स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से गायब पाए जा सकते हैं। प्रबंधन ने दी सफाई इस मामले में अस्पताल प्रबंधक कुमार आदित्य ने कहा कि रोस्टर बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। सुधार की उम्मीद, लेकिन सवाल बरकरार रोस्टर विवाद के चलते अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय पर सुधार नहीं हुआ, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। अब सभी की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई और रोस्टर बदलाव पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि अस्पताल में व्यवस्था कब तक पटरी पर लौटती है।


