ईरान जंग की मार अब फूड डिलीवरी ऑर्डर तक पहुंच गई है। जोमैटो के बाद स्विगी ने भी प्लेटफॉर्म फीस 17 फीसदी बढ़ाकर 14.99 से 17.58 रुपये प्रति ऑर्डर कर दी है। स्विगी ने ऐप पर बताया कि LPG और क्रूड महंगा होने से फूड डिलीवरी इकोसिस्टम की ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ गई है। रेस्टोरेंट से लेकर डिलीवरी पार्टनर तक सब पर बढ़ते खर्चों का दबाव है और यह बोझ अब ग्राहकों पर आ गया है।
2 रुपये से शुरू हुई फीस अब 17.58 पर पहुंची
सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि जोमैटो ने यह फीस अगस्त 2023 में महज 2 रुपये से शुरू की थी। तीन साल से भी कम समय में यह 17.58 रुपये पर पहुंच गई। स्विगी ने भी पिछले साल अगस्त में 12 से 14 और अब 17.58 रुपये तक का सफर तय किया। यह बढ़ोतरी फूड डिलीवरी इंडस्ट्री के बदलते बिजनेस मॉडल को दर्शाती है, जहां मुनाफे का बोझ धीरे-धीरे ग्राहक पर डाला जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि पहले जोमैटो ने 19 फीसदी फीस बढ़ाई और अब स्विगी ने 17 फीसदी लेकिन दोनों की फीस एक ही स्तर 17.58 रुपये पर आकर टिक गई। स्विगी सूत्रों ने खुद माना है कि फीस बढ़ोतरी का एक मकसद जोमैटो के साथ पैरिटी यानी बराबरी हासिल करना भी है। दोनों बड़े खिलाड़ियों का एक साथ एक जैसा कदम उठाना प्रतिस्पर्धा के बजाय तालमेल की तस्वीर पेश करता है।
शेयर मार्केट में दिखा सकारात्मक रुख
शेयर बाजार में इस खबर का असर सकारात्मक रहा। स्विगी के शेयर 3.39 प्रतिशत उछलकर 281.75 रुपये पर और जोमैटो की पैरेंट कंपनी इटरनल के शेयर 4.34 प्रतिशत चढ़कर 236.80 रुपये पर पहुंचे। लेकिन यह तेजी उस बड़े नुकसान के सामने बेहद छोटी है जब दोनों शेयर पिछले 6 महीने में करीब 30 प्रतिशत गिर चुके हैं। फीस बढ़ाकर कंपनियां निवेशकों को यह संदेश देना चाहती हैं कि मार्जिन सुधारने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
दोनों शेयरों को मिल रही ‘BUY’ रेटिंग
हालांकि एनालिस्ट्स अभी भी इन दोनों कंपनियों पर भरोसा बनाए हुए हैं। Bloomberg के आंकड़ों के मुताबिक स्विगी को ट्रैक करने वाले 28 में से 23 एनालिस्ट ‘BUY’ रेटिंग दे रहे हैं और अगले 12 महीनों में 59 प्रतिशत अपसाइड का अनुमान है। जोमैटो के लिए भी 33 में से 30 एनालिस्ट ‘BUY’ पर हैं और अपसाइड भी 59 प्रतिशत है। शेयर गिरे है लेकिन एनालिस्ट्स का मानना है कि लॉन्ग टर्म में इन कंपनियों की ग्रोथ स्टोरी बरकरार है।


