नरसिंहपुर. जिले में परंपरागत रूप से फ सल कटाई के बाद नरवाई जलाने की समस्या को अब नवाचार के जरिए समाधान की दिशा मिल रही है। पर्यावरण संरक्षण और गोसंवर्धन को जोड़ते हुए एक अनोखी पहल सामने आई है। जिसमें किसानों को नरवाई में आग लगाने के बजाय उससे भूसा तैयार कर गोशालाओं को सहयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
इस पहल को बल देने में त्रिनेत्री सेवा समिति डांगीढाना की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो जिले की पांच गोशालाओं का संचालन कर करीब 1000 निराश्रित गोवंश की सेवा कर रही है। समिति ने अपने स्वयं के व्यय से पांच स्ट्रा रीपर भूसा मेकर मशीनें खरीदी हैं, जिनकी मदद से फ सल अवशेषों से बड़े पैमाने पर भूसा तैयार किया जा रहा है। समिति का लक्ष्य वर्षभर के लिए लगभग 1500 ट्रॉली भूसा तैयार करने का है, जिससे गोशालाओं में चारे की समस्या को काफ ी हद तक हल किया जा सके।
इस नवाचार को जमीनी स्तर पर समझने और बढ़ावा देने के लिए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गजेंद्र सिंह नागेश ने घूरपुर उमरिया क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने खेतों में मशीनों के माध्यम से भूसा बनते हुए देखा और पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने किसानों के साथ चौपाल लगाकर संवाद किया और नरवाई जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर विस्तार से चर्चा की।
चौपाल लगाकर संवाद
चौपाल में किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नरवाई में आग लगाने से जहां मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, वहीं पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। इसके विपरीत, यदि फ सल अवशेषों का उपयोग भूसा बनाने में किया जाए तो यह न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी होगा बल्कि गोशालाओं के लिए भी एक स्थायी समाधान बन सकता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इस पहल से जुडकऱ गोसंवर्धन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। इसके साथ ही उन्होंने किसानों को कृषि के साथ उद्यानिकी और वानिकी जैसे सहायक क्षेत्रों में भी कार्य करने के लिए प्रेरित किया। जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके। चौपाल के बाद अधिकारियों ने त्रिनेत्री सेवा समिति द्वारा संचालित मां मगरवाहिनी गोशाला का भ्रमण किया और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने समिति को गौशाला के उन्नयन और बेहतर प्रबंधन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया। इस पहल में समिति के अध्यक्ष अजय दादा पटेल, सचिव नवनीत ऊमरे सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण भी शामिल हुए।


