झज्जर के प्रसिद्ध बालाजी भोजनालय में रसोई गैस की कमी ने संचालन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। वर्षों से गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ता व स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने वाला यह भोजनालय अब गैस की जगह लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाने को मजबूर है। लकड़ी के चूल्हे पर पक रहा भोजन भोजनालय संचालक सुभाष रोहिल्ला ने बताया कि गैस की कमी के चलते अब भोजन तैयार करने के लिए लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे खाना पकाने में पहले से ज्यादा समय लग रहा है और मेहनत भी बढ़ गई है। क्वालिटी से नहीं किया समझौता संचालक का कहना है कि हालात कठिन जरूर हैं, लेकिन भोजन की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा रहा। ग्राहकों को पहले की तरह स्वच्छ और अच्छा भोजन देने की पूरी कोशिश की जा रही है। गैस किल्लत से घटी भोजनालय की क्षमता बालाजी भोजनालय में गैस किल्लत का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। पहले यहां रोजाना करीब 1500 लोगों का खाना तैयार हो जाता था, लेकिन मौजूदा हालात में अब सिर्फ 500 लोगों का ही भोजन बन पा रहा है। गैस की कमी के चलते रसोई का पूरा सिस्टम प्रभावित हुआ है और भोजनालय की क्षमता काफी घट गई है। लकड़ी पर खाना पकाने में बढ़ी परेशानी संचालकों का कहना है कि अब लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है, जिससे पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा समय लग रहा है। गैस पर जहां खाना जल्दी तैयार हो जाता था, वहीं लकड़ी पर भोजन पकाने की प्रक्रिया धीमी और मेहनत भरी हो गई है। समय के साथ खर्च भी बढ़ा लकड़ी पर खाना बनाने से सिर्फ समय ही नहीं बढ़ा, बल्कि खर्च भी पहले से ज्यादा आने लगा है। ईंधन की व्यवस्था, अतिरिक्त मेहनत और धीमी रफ्तार से काम होने के कारण भोजनालय पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। इसके बावजूद भोजनालय की ओर से सेवा को जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है। बढ़ी लागत ने बढ़ाई परेशानी उन्होंने बताया कि गैस की तुलना में लकड़ी पर खाना पकाने में खर्च अधिक आ रहा है। इसके साथ ही संसाधनों और समय की खपत भी बढ़ गई है, जिससे भोजनालय चलाना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है। 5 रुपए से 50 रुपए तक पहुंची थाली सुभाष रोहिल्ला ने बताया कि भोजनालय की शुरुआत गरीबों की सेवा के उद्देश्य से 5 रुपए की थाली से की गई थी। लेकिन लगातार बढ़ती लागत और मौजूदा संकट को देखते हुए अब थाली की कीमत बढ़ाकर 50 रुपए करनी पड़ी है। मन नहीं था, लेकिन फैसला जरूरी था संचालक ने कहा कि थाली के दाम बढ़ाने का मन नहीं था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि यह फैसला लेना जरूरी हो गया। उनका कहना है कि सेवा भावना आज भी वही है, लेकिन खर्च के दबाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ग्राहकों ने बताई भोजनालय की खासियत भोजनालय में खाना खाने आने वाले लोगों का कहना है कि बालाजी भोजनालय लंबे समय से सस्ते और स्वच्छ भोजन के लिए मशहूर है। उनका कहना है कि कीमत बढ़ने के बावजूद यहां के स्वाद, सफाई और सेवा में कोई कमी नहीं आई है। हर महीने लगता है निशुल्क भंडारा भोजनालय की ओर से हर महीने एकादशी के अवसर पर निशुल्क भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। इससे जरूरतमंद लोगों को राहत मिलती है और भोजनालय की सेवा भावना भी बनी हुई है। सेवा भावना के साथ जारी संघर्ष गैस संकट और बढ़ती महंगाई के बीच बालाजी भोजनालय आज भी अपनी सेवा जारी रखे हुए है। हालांकि मौजूदा हालात ने इसके संचालन को कठिन जरूर बना दिया है, फिर भी भोजनालय जरूरतमंदों तक सस्ता भोजन पहुंचाने की कोशिश में जुटा है।


