अररिया में चैती छठ महापर्व का उत्साह चरम पर है। लोक आस्था का यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के लिए समर्पित है। नहाय-खाय के साथ इसकी शुरुआत हो चुकी है, और सोमवार को खरना पर्व के दिन बाजारों में खासी भीड़ देखी गई। फारबिसगंज, जोकीहाट, पलासी और अररिया सहित जिले के मुख्य बाजारों में सुबह से शाम तक चहल-पहल बनी रही। व्रती महिलाएं और उनके परिवारजन पूजा सामग्री खरीदने में व्यस्त दिखे। बाजार में फल और प्रसाद सामग्री की लगी दुकानें विशेष रूप से केला, सेब, अनार, नारंगी, अंगूर, नारियल, सुपारी, गुड़, चावल और मिट्टी के चूल्हे के लिए लकड़ी जैसी सामग्री की खरीदारी की गई। दुकानदारों ने बताया कि छठ के लिए ताजे और अच्छी गुणवत्ता वाले फल-फूलों की मांग इस बार अधिक है। कई स्थानों पर फल और प्रसाद सामग्री की विशेष दुकानें भी सजी थीं। खरना छठ का दूसरा महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद वे मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनी गुड़ की खीर और घी वाली रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हो जाता है। अररिया में देर शाम यह अनुष्ठान संपन्न हुआ, जिसके लिए घरों में तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। जिले में छठ घाटों की सफाई, सजावट और पूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। 24 मार्च को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा, जब भक्त जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। 25 मार्च को उषा अर्घ्य के साथ इस महापर्व का समापन होगा। स्थानीय लोगों के अनुसार, चैती छठ प्रकृति, सूर्य और मातृत्व की पूजा का प्रतीक है। यह पर्व परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। अररिया में इस बार अनुकूल मौसम ने भी भक्तों के उत्साह को बढ़ाया है। छठ पूजा बिहार की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहचान है, और अररिया जैसे जिलों में इसे विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। बाजारों में उमड़ी भीड़ और भक्तों का उत्साह पर्व के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है। अररिया में चैती छठ महापर्व का उत्साह चरम पर है। लोक आस्था का यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के लिए समर्पित है। नहाय-खाय के साथ इसकी शुरुआत हो चुकी है, और सोमवार को खरना पर्व के दिन बाजारों में खासी भीड़ देखी गई। फारबिसगंज, जोकीहाट, पलासी और अररिया सहित जिले के मुख्य बाजारों में सुबह से शाम तक चहल-पहल बनी रही। व्रती महिलाएं और उनके परिवारजन पूजा सामग्री खरीदने में व्यस्त दिखे। बाजार में फल और प्रसाद सामग्री की लगी दुकानें विशेष रूप से केला, सेब, अनार, नारंगी, अंगूर, नारियल, सुपारी, गुड़, चावल और मिट्टी के चूल्हे के लिए लकड़ी जैसी सामग्री की खरीदारी की गई। दुकानदारों ने बताया कि छठ के लिए ताजे और अच्छी गुणवत्ता वाले फल-फूलों की मांग इस बार अधिक है। कई स्थानों पर फल और प्रसाद सामग्री की विशेष दुकानें भी सजी थीं। खरना छठ का दूसरा महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद वे मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनी गुड़ की खीर और घी वाली रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हो जाता है। अररिया में देर शाम यह अनुष्ठान संपन्न हुआ, जिसके लिए घरों में तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। जिले में छठ घाटों की सफाई, सजावट और पूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। 24 मार्च को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा, जब भक्त जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। 25 मार्च को उषा अर्घ्य के साथ इस महापर्व का समापन होगा। स्थानीय लोगों के अनुसार, चैती छठ प्रकृति, सूर्य और मातृत्व की पूजा का प्रतीक है। यह पर्व परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। अररिया में इस बार अनुकूल मौसम ने भी भक्तों के उत्साह को बढ़ाया है। छठ पूजा बिहार की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहचान है, और अररिया जैसे जिलों में इसे विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। बाजारों में उमड़ी भीड़ और भक्तों का उत्साह पर्व के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है।


